वायरलेस पावर
आने वाला वक्त वायरलेस पावर का है, अब आपको न सिर्फ तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी बल्कि बैटरी या चार्जर साथ रखने का झंझट भी नहीं रहेगा। इलेक्ट्रिसिटी हॉट स्पॉट के दायरे में दाखिल होते ही आपका सेलफोन जेब में ही चार्ज होने लगेगा, बिना आपको खबर लगे।
यह सब मुमकिन होगा वायरलेस पावर से, जिसमें बिजली हवा के जरिए लैपटॉप, आई पॉड या दूसरे गैजिट्स तक पहुंचेगी। लैस वेगस में इस सप्ताह आयोजित दुनिया के सबसे बड़े गैजिट ट्रेड शो इंटरनैशनल कंस्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो में इस तकनीक से लैस कुछ गैजट्स शोकेस किए गए। भविष्य की बानगी पेश करते इन उपकरणों में बिना तार या सॉकेट वाली लाइटिंग, ऑडियो स्पीकर और डिजिटल पिक्चर फ्रेम आदि शामिल हैं।

वायरलेस वर्ल्ड का आगाज :
एक्सपर्ट्स इसे वायरलेस वर्ल्ड की महज शुरुआत मानते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह वाई-फाई ने इंटरनेट को बदला, उसी तरह वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी यानी वाई ट्राइसिटी बैटरी लाइफ को बदल सकती है। बिना तार की दुनिया में कैफे या एयरपोर्ट टर्मिनलों में लैपटॉप यूजर्स इलेक्ट्रिसिटी हॉट स्पॉट के दायरे में होंगे। उन्हें ऊंचाई पर लगे किसी सॉकिट तक पहुंचने के लिए फर्नीचर का जुगाड़ नहीं करना पड़ेगा।
वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी का दायरा :
एक गैजिट्स वेबसाइट के एडिटर के मुताबिक, तब आपको किसी गैजिट को चार्ज करने या कंप्यूटर को रखने के लिए अलग से मेज नहीं खरीदनी पड़ेगी। अगर सभी कमरों में वायरलेस पावर हुई तो कमरे में दाखिल होते ही आपका मोबाइल चार्ज होने लगेगा। तब आपकी चार्जर की तलाश खत्म हो जाएगी।
लेसर इलेक्ट्रिसिटी :
इलेक्ट्रॉनिक्स शो में पावर बीम नाम के गैजिट को भी पेश किया गया। यह बिजली को अदृश्य लेसर में तब्दील कर उसे कमरे में किसी सोलर सेल पर छोड़ता है। सोलर सेल इसे वापस इलेक्ट्रिसिटी में बदल देता है। पावर बीम के को-फाउंडर डेविड ग्राहम का कहना था कि हम डिक्शनरी से रीचार्ज शब्द को ही हटा देना चाहते हैं। अभी आपका जो सेलफोन चार्ज होने के लिए दिन भर डेस्क पर पड़ा रहता है, कुछ समय बाद आपको ऐसा नहीं करना पड़ेगा।’
पावर ऑफ बीम :
सिलिकन वैली की इस कंपनी का उपकरण लेसर की मदद से 10 मीटर दूर मौजूद सोलर सेल से 1.5 वॉट बिजली पैदा कर सकती है। इतनी बिजली एक इलेक्ट्रॉनिक स्पीकर या छोटे एलईडी बल्ब को रोशन करने के लिए काफी है। हालांकि, इतनी बिजली से लैपटॉप को नहीं चलाया जा सकता। हालांकि कंपनी का दावा है कि इसे अपग्रेड किया जा सकता है और इससे सेहत को भी कोई नुकसान नहीं होगा।
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