जमीन में जल का पता लगाने हेतु प्रयोग
यह प्रयोग अत्यन्त ही सरल है तथा इसके माध्यम से जमीन में कहां पानी है और कहाँ नहीं यह ज्ञात किया जा सकता है।
कुआँ अथवा ट्यूबवेल खुदवाते समय हर व्यक्ति जानना चाहता है कि जहां कुआऑ खुदवा रहे है वहां पानी निकलेगा भी अथवा नहीं ? पानी का पता लगाने के लिये यह प्रयोग बहुत हद तक कारगर साबित हुआ है । इस प्रयोग के अन्तर्गत :

- 4-6 मिट्टी के छोटे-छोटे नये कुल्हड़ ले आयें।
- मिट्टी के बने हुए छोटे लोटे के समान बर्तन को कुल्हड़ कहते है।
- अब जिस दिन पूर्णिमा हो उस दिन 4-6 ऐसे स्थान चुन लें जिनमें से किसी एक स्थान पर कुऑ या ट्यूबवेल खुदवाना हो।
- तदुपरान्त प्रत्येक कुल्हड को जल से पूरा भरकर उस पर मिट्टी का ही ढक्कन लगाकर ईश्वर का ध्यान करके चुने हुये स्थानों पर रख दे।
- रात्रि पर्यन्त उन्हें वहीं रखा देने दें।
- दूसरे दिन सुबह सबेरे (सूर्योदय के समय) प्रत्येक कुल्हड़ का ढक्कन हटाकर देखें। जिस कुल्हड में जल पूर्ण भरा हो उसके नीचे खुदाई करने पर जल निकलेगा तथा जो कुल्हड़ खाली हो उसके नीचे जमीन में जल नहीं है-यह जानें।
- ऐसा कुल्हड़ जिसमें जल आधा भरा होगा-उसके नीचे पानी गहराई पर मिलेगा।
- यह प्रयोग एक साधु का बताया हुआ है था तथा इसकी सार्थकता को कई बार आजमाया गया है।
- इस प्रयोग में प्रयुक्त कुल्हड़ कोरे अर्थात् नवीन ही होने चाहिये।
- कई पौधे भी ऐसे होते हैं जिनके माध्यम से जमीन में जल के होने की जानकारी होती है।
- मसलन जहाँ जमीन पर नारियल अथवा बबूल अथवा खजूर के पेड़ होते हैं वहाँ जल होता है।
- जिस जमीन पर कैक्टस खूब फले फूलें वहाँ जल होता ही नहीं या फिर वह बहुत नीचे होता है।
- जमीन पर बैर के पेड़ होना भी जमीन में जल की सूचना देते हैं।
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