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मटर की खेती

Posted by cls On October - 1 - 2008

मटर सर्दी के मौसम की एक महत्त्वपूर्ण सब्जी है । इसमें शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन, विटमिन और कई प्रकार के खनिज पाये जाते है । बाजार में इसकी हरी फलियों की मांग अधिक रहती है और अच्छे दाम मिलते है । मटर की अच्छी उपज लेने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखे –

  1. मटर की बुवाई 1 अक्टुबर से 15 नवम्बर तक की जाती है । इसके बाद बुवाई करने से पूरा लाभ नहीं मिलता ।
  2. इसकी उन्नत किस्में आजाद पी-1, आजाद पी-3, जवाहर मटर-1, पंत उपहार आई पी-3, पी-88, वी एल-3, आदि है । इन किस्मों की बुवाई से अधिक लाभ होता है ।
  3. एक हैक्टेयर बुवाइ के लिये 80-100 किग्रा. बीज चाहिये । बुवाई से पहले बीजों को बाविस्टिन (कार्बेडाजिम) 2 ग्राम या थिराम 3 ग्राम प्रति किग्रा बीज के हिसाब से उपचारित जरूर करे ।
  4. खेत तैयार करते समय गोबर की अच्छी सडी गली खाद प्रति हैक्टेयर 15-20 टन खेत में मिलाकर जुताई करे । अन्तिम जुताई के समय 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हैक्टेयर की दर से खेत में डाले ।
  5. बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 30 सेमी. (एक फुट) और पौधे से पौधे की दूरी 8-10 सेमी. ( तीन चार ईंच) रखे ।
  6. बुवाई के समय खेत में पदान 4 जी , 15 किग्रा. प्रति हैक्टेयर देने से फसल में तनामक्खी, पर्णखनक और फलीछेदक कीडों से बचाव होता है । यदि खेत में सूत्र कृमि का अधिक प्रकोप हो तो बुवाई से पहले कार्बोफ्यूरॉन 3 जी 25 किग्रा. प्रति हैक्टेयर के हिसाब से खेत में अवश्य दे ।
  7. बुवाई के बाद खेत में हल्की सिंचाई करे । बाद में हर 8-10 दिनों के अन्तर से जरुरत के अनुसार सिंचाई करे । फूल और फली आने पर खेत में उचित नमी होना बहुत जरूरी है । इससे पैदावार अच्छी होती है ।
  8. बुवाई के एक महीने बाद या आवश्यकतानुसार निराई गुडाई जरूर करे ।
  9. लीफ माइनर का प्रकोप होने पर फास्फोमिडान 85 एस एल 300 मिली. या मिथील डेमेटान 25 ईसी 500 मिली. प्रति हैक्टेयर की दर से छिड्काव करे ।
  10. छाछया रोग होने पर 2 ग्राम घुलन्शील गंधक, केराथेन एल सी 1मिली. या कैलेक्सिन 1 मिली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करे । जरुरत होने पर 10 दिनों के अन्तराल पर पुनः छिडकाव करे ।
  11. फसल को पाले से बचाने के लिये 0.1 प्रतिशत गंधक के तेजाब का छिडकाव करे । ( 1000 लीटर पानी में 1 लीटर गंधक का तेजाब) । पाले की संभावना होने पर 10 दिनों के अन्तराल पर इसे दोहराये और फसल के किनारों पर घास फूस जलाकर धुंआ करे ।
  12. तैयार फलियों को तोडकर बिक्री के लिये बाजार में ले जाये । पकी हुई फलियों को देरी से तोडने पर दानों मे मिठास कम हो जाती है ।

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