ॐ श्री परमात्मने नमः
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला
भजन संख्या ३
(जंगला ताल ३)
नारायण जिनके परिपालक ।
तिनको कौन दुःखाय सके रे ॥ टेक ॥ नारायण ०
प्रहलाद भक्त को डारा अगन में ।
रोम न एक जलाय सके रे ॥ १ ॥ नारायण ०
गज को पकड ग्राह ने खैचा ।
नहिं जल बीच डुबाय सके रे ॥ २ ॥ नारायण ०
द्रुपदसुता की बीच सभा के ।
रंच न लाज उठाय सके रे ॥ ३ ॥ नारायण ०
ब्रह्मानन्द जो हरिगुण गावे ।
सो निर्भय पद पाइ सके रे ॥ ४ ॥
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