मटर सर्दी के मौसम की एक महत्त्वपूर्ण सब्जी है । इसमें शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन, विटमिन और कई प्रकार के खनिज पाये जाते है । बाजार में इसकी हरी फलियों की मांग अधिक रहती है और अच्छे दाम मिलते है । मटर की अच्छी उपज लेने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखे –

- मटर की बुवाई 1 अक्टुबर से 15 नवम्बर तक की जाती है । इसके बाद बुवाई करने से पूरा लाभ नहीं मिलता ।
- इसकी उन्नत किस्में आजाद पी-1, आजाद पी-3, जवाहर मटर-1, पंत उपहार आई पी-3, पी-88, वी एल-3, आदि है । इन किस्मों की बुवाई से अधिक लाभ होता है ।
- एक हैक्टेयर बुवाइ के लिये 80-100 किग्रा. बीज चाहिये । बुवाई से पहले बीजों को बाविस्टिन (कार्बेडाजिम) 2 ग्राम या थिराम 3 ग्राम प्रति किग्रा बीज के हिसाब से उपचारित जरूर करे ।
- खेत तैयार करते समय गोबर की अच्छी सडी गली खाद प्रति हैक्टेयर 15-20 टन खेत में मिलाकर जुताई करे । अन्तिम जुताई के समय 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हैक्टेयर की दर से खेत में डाले ।
- बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 30 सेमी. (एक फुट) और पौधे से पौधे की दूरी 8-10 सेमी. ( तीन चार ईंच) रखे ।