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Archive for the ‘Education and Career’ Category


Career Guidance

Posted by cls On January - 18 - 2009

In modern world, there are a number of options open for children who finish with their schooling, and also for those who wish to pursue something else at a later point in their life. But with a tremendous growth in career options, there has been a tremendous growth in competition too. Second chances are hard to come by. hence, people try to get it right in first shot, otherwise, it becomes harder to cover up , if one decides to take up something else later.

Therefore one should try to stick to one thing and should consider the job in which he or she is interested and not that his or her friends are interested in. Changing streams later is not a good option, even though it has to be done, if it has to be done.

Both parents and their children seem to be confused. Actually, there is a conflict of interest. Even though in today’s world , parents are being open minded and exploring more and more options, majority is still suffering from the same problem, and that is, “One day my child will become a doctor, an engineer, a scientist, or a lawyer”. Majority of parents follow this rule, not realizing that their children cannot if they cannot. Its not everybody’s cup of tea to pursue one of these professions if they cant.

Also, in today’s world, studies are not the only thing there is in one’s life. Studies are important, but so are co-curricular activities. One must do well in sports too, if he or she is to do well in life by maintaining a balanced one. Having a balanced life is also important, for the sake of studies. If one attains balance in life, nothing becomes impossible for that person. A good frame of mind is important to succeed in life.

Hence one should pursue whatever he or she takes interest in. Nothing is big or small , if it is done well. Keeping these points in mind, various career options have been given down below. Explore those you desire, and also, there are links provided to the right, relevant to your search. If you find something interesting, do explore that too.

Actuarial Science
Advertising
Aeronautics
Airhostess
Architecture
Astronomy
Ayurveda
Beauty Care
Bioinformatics
Biotechnology
Call Centers
Chartered Accountancy
Chemical Engineering
Civil Engineering
Civil Service
Commercial Pilot
Company Secretary
Dancing
Dairy Technology
Dentistry
Electronics Engineering
Event Management
Fashion Technology
Film Making
Fire Engineering
Fisheries Science
Floriculture
Foreign Language
Forensic Science
Forestry / Wildlife
Gemology
Genetic Engineering
Hotel Management
Indian Army
Indian Air Force
Industrial Engineering
Insurance
Interior Designing
ICWAI
Journalism
Law
Librarianship
Mechanical Engineering
Medical Transcription
Medical Lab Technology
Medicine
Merchant Navy
Modelling
Music
Nursing
Nutrition
Oceanography
Occupational Therapy
Optometry
Pharmacy
Photography
Photonics
Physiotherapy
Prosthetics & Orthotics
Psychiatry
Psychology
Public Relations
Radiography
Radio Jockey
Securities Analysis
Speech Pathology & Audiology
Statistics
Tea Management
Teaching
Technical Writing
Travel and Tourism
Veterinary Science
Video Editing
Video Jockey

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अखबार, टीवी, फिल्म, रेडियो, दीवारों और न जाने कहां-कहां, हर जगह ऐडवर्टाइजमंट का ही बोलबाला है। मीडिया, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो या प्रिंट सभी विज्ञापन के दम पर ही टिके हुए हैं।

अगर आपके पास भी कुछ विशेष है, अलग आइडिया है तो यह इंडस्ट्री आपका इंतजार कर रही है। एक छोटा सा कोर्स कर लें, बेहतर कल के हकदार होंगे।

जबर्दस्त उछाल

साल 1992 में जहां यह उद्योग मात्र 1800 करोड़ रुपये का था, वहीं पिछले दस सालों में यह लंबी छलांग लगा चुका है। अब यह लगभग 20 हजार करोड़ से भी अधिक का हो चुका है। ऐसे में इसकी वृद्घि का अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले कुछ सालों से यह 20 फीसदी प्रतिवर्ष से अधिक का ग्रोथ रेट बनाए हुए है। वहीं जानकार आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी की संभावना बता रहें हैं। ऐसे में उन छात्रों के लिए भरपूर संभावना है, जो कुछ अलग करना चाहते हैं।

आज भारतीय विज्ञापन उद्योग दुनिया के किसी भी देश की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री से तुलना कर सकती है। यह बराबरी केवल धन के मामले में ही नहीं है, बल्कि तकनीक और गुणवत्ता में भी की जा सकती है। इस क्षेत्र के बहुमुखी विकास ने ही इसमें कई विकल्प एक साथ खोले हैं। कला लेखन, संवाद लेखन, निर्देशन और निर्माण। कोई भी छात्र इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकता है।

इसमें अधिक सफल होने के लिए सैद्घांतिक ज्ञान के अलावा मेहनत भी चाहिए। इसके लिये आपको कई दिनों तक लगातार काम करना पड़े। ऐसे में काम का दबाव बहुत अधिक हो सकता है। हकीकत यह है कि इतना तनाव होने के बाद भी इसकी नौकरी का अपना अलग मजा है, जिसे हर कोई नहीं समझ सकता।
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डेयरी टेक्नॉलॉजी

Posted by cls On October - 7 - 2008

खुले बाजार एवं मांग को देखते हुए सरकार ऐसे कई सेक्टरों को प्रोत्साहित कर रही है, जिससे कई लोगों को रोजगार मिल सके। डेयरी इंडस्ट्री भारत की एग्रो-बेस्ड अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डेयरी उत्पादों के संग्रहण, वितरण, प्रोसेसिंग, दूध उत्पादन, पशुओं की देखभाल एवं उच्च तकनीक के रूप में आज डेयरी इंडस्ट्री एक विशष्टि रोजगार क्षेत्र बनकर उभरा है। दूध एवं अन्य डेयरी उत्पादों की प्रोसेसिंग, प्रोडक्शन एवं पुन: आंकलन इसी इंडस्ट्री द्वारा किया जाता है। दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश भारत में डेयरी उद्योग का आकार 2011 तक दोगुना होकर 5.2 लाख करोड़ रूपए होने का अनुमान है। डेयरी इंडिया के नतीजों के मुताबिक 2011 तक दूध का बाजार बढ़कर 1.59 लाख करोड़, घी का 42,680 करोड़, पनीर का 50,500 करोड़ और दूध के पाउडर का 9,100 करोड़ रूपए हो जाएगा।

भारत में डेयरी क्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञों की जबरदस्त मांग है। एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री के एक प्रमुख हिस्से डेयरी सेक्टर में बड़े पैमाने पर डेयरी प्लांट एवं डेयरी फाउंडेशन की स्थापना हो रही है। इस क्षेत्र में लगभग 500 से लेकर 700 ऐसे डेयरी प्लांट हैं जो डेयरी फाउंडेशन और प्राइवेट कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
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देशभर के आईआईटी संस्थानों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए दाखिले के मापदंड और आसान बनाने का फैसला किया है। खड़गपुर में रविवार को सातों आईआईटी के डायरेक्टरों की बैठक हुई। इसमें एससी/एसटी छात्रों को अप्रैल 2009 में होने वाले जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) में प्राप्त अंकों में 50 फीसदी की रियायत देने का फैसला किया गया। मौजूदा समय में यह दर 40 फीसदी है।

जेईई-2008 में जनरल कैटिगरी के आखिरी छात्र को 489 में से 172 अंक पाने पर दाखिला मिला है। एससी/एसटी छात्रों को 40 फीसदी छूट मिलने के बाद 104 अंकों पर दाखिला मिला था। जेईई 2009 में जनरल कैटिगरी की कटऑफ यही
रहने पर एससी/एसटी छात्रों के लिए कट ऑफ घटाकर 86 (172 का 50 फीसदी) कर दिया जायेगा। इसी तरह विषय के हिसाब से भी कट ऑफ में छूट दी जाएगी।

इस हिसाब से यदि जेईई 2008 में जनरल कैटिगरी के आखिरी छात्र को मैथ्स में 10, फिजिक्स में 0 और केमिस्ट्री में 6 अंक पाकर दाखिला मिला है तो एक एससी/एसटी छात्र को 40 फीसदी रियायत मिलने से मैथ्स में 6, फिजिक्स में 0 और केमिस्ट्री में 3.6 अंक मिलने पर भी दाखिला मिलेगा।
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आईआईटी अपडेट

Posted by cls On October - 6 - 2008

देश के आईआईटीज़ ने अपने यहां सीटों की संख्या बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। अगले तीन सालों में इनमें करीब 40 प्रतिशत सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा, 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत साल 2012 तक आठ नए आईआईटी भी स्थापित किए जाने हैं। इनमें से छह में अगले साल पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इससे आईआईटी में प्रवेश के मौके और बढ़ जाएंगे। आइये आईआईटी एंट्रंस की तैयारी से पहले इन प्रतिष्ठित संस्थानों के बारे में विस्तार से जान लिया जाए!


Main Building IIT, Mumbai

एंट्रंस एग्ज़ाम

आईआईटी एंट्रंस के लिए परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है। आईआईटी-जेईई 09 (IIT JEE 09) 12 अप्रैल 2009 को आयोजित होगा। इसके लिए आवेदन पत्रों की बिक्री 19 नवंबर से 24 दिसंबर के बीच की जाएगी, जबकि 19 नवंबर से 16 दिसंबर तक फार्म डाक से मंगाए जा सकेंगे। आईआईटीज में इन फॉर्मों को 24 दिसंबर 08 तक जमा करना होगा। इस बारे में विस्तृत जानकारी आठ नवंबर 08 के समाचार-पत्रों में प्रकाशित की जाएगी।

न्यूक्लियर डील का असर

अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील फाइनल करने के साथ ही केंद्र सरकार देश में न्यूक्लियर एन्जीनियर्स तैयार करने पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय में न्यूक्लियर एन्जीनियरिंग का कोर्स शुरू किया जा रहा है। आईआईटी चेन्नई में भी इस कोर्स को शुरू किए जाने की संभावना है, जबकि आईआईटी कानपुर में इससे संबंधित कोर्स पहले से ही चल रहा है।
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बोर्ड के परीक्षार्थियों के लिए सीबीएसई ने अटेंडंस का कायदा इस बार सख्ती से लागू कराने का फैसला किया है। सभी स्कूलों को सर्कुलर भेजकर कहा गया है कि बोर्ड एग्ज़ाम देने वाले 10वीं और 12वीं के छात्रों की 75% हाजिरी जरूर होनी चाहिए। इस नियम पर खरे नहीं उतरने वाले छात्रों को 2009 में होने वाली बोर्ड परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।

सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि

  1. जो छात्र स्कूलों में रेग्युलर नहीं आ रहे हैं , उन्हें लिखित रूप से 75 % हाजिरी के नियम की जानकारी दी जाए।
  2. सीबीएसई चेयरमन किसी छात्र को हाजिरी में 15 फीसदी छूट देने के आवेदन पर उसी स्थिति में विचार करेंगे , जब स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से आवेदन प्रस्तावित किया गया होगा।

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ऑनलाइन पढ़ें और आगे बढ़ें

हमारे देश में सरस्वती जैसे लाखों किशोर व युवा हैं, जो महानगरों के स्कूल-कॉलेजों में पढाई करने का ख्वाब देखते हैं। लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उनका यह सपना हकीकत में कम ही बदल पाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उच्चस्तरीय कॉलेजों की पढाई को ग्रामीण लोगों के द्वार तक पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने ई-यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। ई-यूनिवर्सिटी अपने सैटेलाइट एडुसेट के जरिए उच्चस्तरीय शिक्षा को एक क्लिक पर कम्प्यूटर या टेलीविजन के माध्यम से दूर-दराज के लोगों तक पहुंचा रही है


क्या है ई-यूनिवर्सिटी?

अभी भी गांवों में रहने वाले युवाओं को कॉलेज की पढाई के लिए या तो मीलों चलकर कस्बे के महाविद्यालय में जाना होता है या फिर पढाई करने के लिए अपने घर-परिवार से दूर शहर में जाना पडता है। इसके लिए उनके रास्ते में अन्य तमाम मुसीबतें भी आती हैं। इसलिए यूजीसी ने एक योजना के तहत एक ऐसी यूनिवर्सिटी का गठन किया है, जिसमें न तो परंपरागत कॉलेज की तरह किसी बडे आधारभूत ढांचे की जरूरत है और न ही लाखों-करोडों रुपये खर्च करने की! बेहद कम खर्च में देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले विद्यार्थी घर बैठे देश के ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स के लेक्चर्स का लाभ उठा सकेंगे।

कैसे होगी पढाई

दरअसल, यूजीसी की योजना के मुताबिक आने वाले दिनों में ई-यूनिवर्सिटी में सैटेलाइट के जरिए कॉलेज की पढाई उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे स्टूडेंट्स को पढाई के लिए कहीं दूर नहीं जाना पडेगा, बल्कि वे अपने घरों में बैठकर ही टेलीविजन और इंटरनेट के जरिए पढाई पूरी कर लेंगे। वे जब चाहें, तब एक निश्चित वेब पेज खोलकर अपने विषय का अध्ययन कर सकते हैं। ई-लर्निग में अलग-अलग विषयों की हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी (ई-कॉपी) में बदला जाता है। कहने का मतलब यह है कि आप अपने वेब पेज को खोलकर अपने मनचाहे विषय के ऑप्शन पर क्लिक कर उसे पढ सकते हैं। इसमें स्टूडेंट्स को कठिन लगने वाले सवालों के कई ऑप्शन मौजूद रहते हैं, जिसे क्लिक कर वह अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है। इसमें ऑनलाइन एग्जाम्स की भी व्यवस्था होती है।


टेक्निक का कमाल है ई-यूनिवर्सिटी

ई-यूनिवर्सिटी के तहत दिल्ली स्थित मेन स्टडी सेंटर सहित कुल 17 इलेक्ट्रिनिक मल्टी मीडिया रिसर्च सेंटर्स (ईएमएमआरसी) हैं, जहां सैटेलाइट के जरिए क्लासेज की व्यवस्था की गई है। इसके अन्य सेंटर्स जिन शहरों में स्थित हैं, उनके नाम हैं- अहमदाबाद, कोलकाता, हैदराबाद(ईएफएलयू),हैदराबाद (उस्मानिया यूनिवर्सिटी), जोधपुर, मदुरै, पुणे, कालीकट, चेन्नई, इम्फाल, इंदौर, मैसूर, पटियाला, रुडकी, सागर, श्रीनगर आदि। यूजीसी का अपना सैटेलाइट लिंक (एडुसेट) भी है, जो दिल्ली और अन्य सेंटर्स को आपस में जोडता है। इसी की सहायता से स्टडी प्रोग्राम का प्रसारण होता है। यदि एक पंचायत के पास डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) का एंटीना है, तो उस पंचायत के सभी गांव के छात्र-छात्राएं टेलीविजन की सहायता से पढाई कर पाएंगे। यदि वहां इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध हो, तो यह उनके लिए और भी लाभप्रद होगा। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप इस पते पर सम्पर्क कर सकते हैं : कन्सोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन, एनएससी कैम्पस, अरुणा आसफ अली मार्ग नई दिल्ली (फोन : 011-2897418, 26897419, ई-मेल : cecugc @cec-ugc.org)

करियर की भी खुली नई राह

ई-यूनिवर्सिटी के इस काम को आसान बनाने के लिए बडी संख्या में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होगी। अलग-अलग विषयों की हार्ड कॉपी को ई-कन्टेंट में बदलना, टेक्स्ट का कम्पाइलेशन, भिन्न-भिन्न सॉफ्टवेयर्स का सेटअप, नॉन-लीनियर एडिटिंग, कैमरा हैंडलिंग आदि अनेक कार्य हैं, जिसके लिए ट्रेंड लोगों की दरकार होगी है। साइंस, टेक्नोलॉजी और एकेडमिक्स के एक्सप‌र्ट्स इस क्षेत्र में समुचित काम पा सकते हैं।

कौन-कौन से हैं काम?

ई-कन्टेंट (स्टडी मैटीरियल) को तैयार करने के लिए कार्यो को दो भागों में बांटा गया है-कन्टेंट डेवलॅपमेंट और प्रोग्राम डेवलॅपमेंट। ई-यूनिवर्सिटी के सभी कार्य इन्हीं दो भागों के इर्द-गिर्द घूमते हैं। इसमें जो प्रमुख पद होंगे, उनके नाम इस प्रकार हैं : ई-कन्टेंट डेवलॅपर, कोर्स कोऑर्डिनेटर, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, पे्रजेंटर, रिसोर्स पर्सन, स्टूडियो इन चार्ज, नॉन-लीनियर एडिटर, मल्टीमीडिया प्रोग्रामर, कैमरामैन, डेटा एंट्री ऑपरेटर आदि।

आरंभिक कमाई

यदि आप अच्छे एकेडमिक रिजल्ट के साथ-साथ टेक्निकल स्किल में भी महारत रखते हैं, तो फिर आपको इस फील्ड में आकर्षक वेतनमान मिल सकता है। यहां सैलरी की शुरुआत 12-15 हजार रुपये से होती है। इसकेअलावा, ऊंचे पदों पर 40-50 हजार रुपये तक मिल सकते हैं।

स्टूडेंट्स के लिए बेहतर विकल्प

भारत में 4 करोड 20 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। यदि उन बच्चों को स्कूल और कॉलेजों में डाला जाए, तो दस लाख अतिरिक्त क्लास रूम, उतनी ही संख्या में टीचर, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, लेक्चरर आदि की जरूरत पडेगी। साथ ही, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी अरबों रुपये खर्च करने पडेंगे। ऐसी स्थिति में भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए ई-यूनिवर्सिटी एक बेहतर विकल्प है। अमेरिका और ग्रेट-ब्रिटेन आदि जैसे देशों में ई-यूनिवर्सिटी सफलतापूर्वक चलाई जा रही है।

समय की मांग है ई-लर्निग

ई-यूनिवर्सिटी की शुरुआत कैसे हुई?

यूजीसी 15 अगस्त, 1984 से दूरदर्शन के माध्यम से देश भर में एजुकेशनल टीवी प्रोग्राम प्रसारित कर रहा है। इससे छोटे शहरों, कस्बों, गांवों आदि में रहकर पढाई कर रहे युवा लाभान्वित होते रहे हैं। भारत को नॉलेज सुपर पॉवर बनाने के लिए दूर-दराज के इलाकों को कॉलेज शिक्षा से जोडना अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दिया है टेलीविजन और इंटरनेट की दुनिया ने। इसी का परिणाम आज ई-यूनिवर्सिटी के रूप में सबके सामने है। इससे गांव-देहात के लोग घर बैठे कॉलेज के एक्सप‌र्ट्स के व्याख्यान को देख और सुन सकेंगे। वे चाहें, तो उनसे ऑनलाइन प्रश्न भी पूछ सकते हैं।

क्या ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं को इसका लाभ उठाने के लिए अधिक पैसा खर्च करना होगा?

नहीं, इससे लाभ पाने के लिए बहुत कम पैसा खर्च करना होगा। इसके लिए प्रत्येक पंचायत के पास एक डीटीएच एंटीना, अधिक पॉवर वाला जेनरेटर और इंटरनेट की सुविधा होनी चाहिए।

ई-लर्निग के माध्यम से कौन-कौन से कोर्स संचालित किए जाते हैं?

शुरुआत में हमारे यहां डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स की व्यवस्था की गई है। इन कोर्सो के तहत आप एडिटिंग, मार्केटिंग, लाइब्रेरी मैनेजमेंट आदि का डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। हालांकि, आने वाले समय में आप ग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री ई-यूनिवर्सिटी के जरिए ले सकते हैं।

कैसे पढाएंगे विशेषज्ञ?

दरअसल, मुख्य सेंटर्स पर विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को लेक्चर्स के लिए हायर करते हैं। कई विशेषज्ञ हमारे यहां पार्ट-टाइम भी काम कर रहे हैं। यदि किसी विषय का व्याख्याता हैदराबाद का है, तो हम वहीं उनका क्लास रिकॉर्ड कर सभी सेंटर्स पर टेलीकास्ट करवा देते हैं।

छोटे शहरों के लिए क्या योजना है?

आने वाले दिनों में छोटे शहरों में भी स्टडी सेंटर्स खोले जाएंगे। इससे छात्रों को भाषाई समस्या का सामना नहीं करना पडेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई मलयाली भाषा में अपने कोर्स मैटीरियल को समझना चाहता है, तो स्टडी सेंटर पर उसी भाषा के जानकार से संबंधित विषय पर व्याख्यान दिलवाया जाएगा। इससे रीजनल भाषा का ज्ञान रखने वाले छात्रों को भी लाभ हो सकेगा।

क्या इसके लिए लेक्चरर को कोई विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी?

कई बार ऐसा होता है कि अपने विषयों में पारंगत होने के बावजूद लोग कैमरा फ्रेंडली नहीं होते हैं। उन्हें कक्षा में बिना स्टूडेंट के लेक्चर देने में असुविधा होती है। इसलिए टेक्निकल ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्हें कैमरा फ्रेंडली होने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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फैशन इंडस्ट्री

फैशन इंडस्ट्री के बूम से आज कौन परिचित नहीं है। इसमें शोहरत है, ग्लैमर है और है भरपूर पैसा। रोजगार के लिहाज से आज फैशन इंडस्टी् का फलक बहुत ही व्यापक हो चुका है और इसमें हर प्रकार के पेशेवर को खास विशेषज्ञता के साथ ही प्रवेश मिल पाता है। रोजगार के लिहाज से फैशन इंडस्ट्री के व्यापक क्षेत्र पर एक नजर Read the rest of this entry »

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