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Archive for the ‘Festivals and Rituals’ Category


ऑनलाइन ‘गणेश पूजन’

Posted by cls On August - 30 - 2008

भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी गणेश चतुर्थी कहलाती है। श्री गणेशजी विघ्न विनाशक हैं। इन्हें देवसमाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेशजी का जन्म हुआ था। श्री गणेशजी बुद्धि के देवता हैं। गणेशजी का वाहन चूहा है। ऋद्धि तथा सिद्धि इनकी दो पत्नियाँ हैं। इनका सर्वप्रिय भोग मोदक (लड्डू) है। श्री गणेशजी की आरती करने के लिये निम्न निर्देशों का पालन करें – Read the rest of this entry »

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स्यमन्तक मणि कथा

Posted by cls On August - 30 - 2008

एक बार नंदकिशोर ने सनतकुमारों से कहा कि चौथ की चंद्रमा के दर्शन करने से श्रीकृष्ण पर जो लांछन लगा था, वह सिद्धि विनायक व्रत करने से ही दूर हुआ था। ऐसा सुनकर सनतकुमारों को आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूर्णब्रह्म श्रीकृष्ण को कलंक लगने की कथा पूछी तो नंदकिशोर ने बताया-एक बार जरासन्ध के भय से श्रीकृष्ण समुद्र के मध्य नगरी बसाकर रहने लगे। इसी नगरी का नाम आजकल द्वारिकापुरी है। Read the rest of this entry »

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गणेशजी का महत्व

Posted by cls On August - 30 - 2008

आज गणेशोत्सव सारे विश्व में बड़े ही हर्ष एवं आस्था के साथ मनाया जाने लगा है। घर-घर में गणेशजी की पूजा होने लगी है। लोग मोहल्लों, चौराहों पर गणेशजी की स्थापना, आरती, पूजा करते हैं। बड़े जोरों से गीत बजाते, प्रसाद बाँटते एवं अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशजी की मूर्ति को विधिवत किसी समुद्र, नदी या तालाब में विसर्जित कर अपने घरों को लौट आते हैं।
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गजाननजी को ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह से संबद्ध किया जाता है। इनकी उपासना नवग्रहों की शांतिकारक व व्यक्ति के सांसारिक-आध्यात्मिक दोनों तरह के लाभ की प्रदायक है। अथर्वशीर्ष में इन्हें सूर्य व चंद्रमा के रूप में संबोधित किया है। सूर्य से अधिक तेजस्वी प्रथम वंदनदेव हैं। Read the rest of this entry »

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रक्षाबंधन

Posted by cls On August - 15 - 2008

भारतीय संस्कृति में सूत्र (धागा) के द्वारा ‘रक्षा’ की कामना करने की परंपरा का उल्लेख बहुत प्राचीनकाल से मिलता है। हिंदू धर्म में किसी भी प्रकार की पूजा करते समय पुरोहित द्वारा यजमान की कलाई पर मौली (विशेष प्रकार का धागा) बांधी जाती है। इसे बांधते समय पंडित जी के मुख से एक श्लोक सुना होगा, जो इस प्रकार है : Read the rest of this entry »

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ॐ श्री परमात्मने नमः

भगवान श्री शंकर ने मां दुर्गा से पूछा -शिव उवाच:
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