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Archive for the ‘Health and Home Treatments’ Category



बीमार दिल को दुरूस्त करने में अब तक की तमाम उपचार विघियों से दो कदम आगे की क्रांतिकारी सफलता हनोवर के मेडिकल कॉलेज को मिली है। यहां एक बीमार मरीज का दिल नया बना दिया है और वह भी दिल की कोशिका से नहीं, बल्कि आंत से निकली (स्टेम सेल)कोशिका से। शरीर के किसी और हिस्से की कोशिका को दिल रिपेयर करने के लिए स्टेम सेल का इस्तेमाल बहुत ही उम्मीद से भरा है। जिस व्यक्ति के दिल में यह सफल प्रयोग किया गया उसका दिल अब एकदम सामान्य काम कर रहा है।

यह करिश्माई सफलता कैंसर से पीडित नीदरलैंड्स की 40 साल की महिला के इलाज पर हासिल हुई। उनके शरीर में कैंसर वाला ट्यूमर ऐसी जगह पर था कि उसे निकाला नहीं जा सकता था और बहुत गंभीर स्थिति में था। प्रोफेसर आक्सेल हाफेरिष ने बताया कि मरीज के दिल के दाएं हिस्से में ट्यूमर ऊपर तक पहुंच गया था और इसकी जड़ें फेंफड़ों में थीं, जो बेहद जटिल मामला था। ऐसे में सामान्यत ऑपरेशन नहीं हो सकता है लेकिन हमने अंतिम तौर पर यह सफल प्रयास किया। फिलहाल इस ऑपरेशन से उस महिला की जान बचा ली गई है।

यूं बना नया दिल
इस केस में खतरे के लिहाज से ह्वदय के प्रत्यारोपण का तो कोई सवाल ही नहीं था, वहीं ट्यूमर को निकालने का मतलब जीवन संकट में डालना था। ऐसे में चिकित्सकों ने नए शोध पर भरोसा करते हुए ह्वदय के दो हिस्सों को अलग करने वाला हिस्सा काटा और उसकी जगह छोटी आंत से निकली कोशिका(15 सेंटीमीटर का एक हिस्सा) लगा दी। यह कोशिका वहां लगाई गई जहां दिल के दाएं हिस्से की दीवार थी। बाद में छोटी आंत से निकला हिस्सा दिल की दीवार में बदल गया। इस प्रक्रिया में छह सप्ताह का समय लगा।

बच्चों के लिए शोध, लेकिन प्रयोग अभी बाकी
इंसानों पर पहले कभी ऎसा प्रयोग कभी नहीं हुआ, लेकिन चूहों, सुअरों और भेड़ों पर कई साल चले प्रयोगों के बाद यह सिद्ध हो गया था कि यह प्रक्रिया सफल हो सकती है। इस शोध की प्राथमिक प्रेरणा थी कि इस प्रक्रिया को उन बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाए जिनके ह्वदय में जन्मजात गड़बड़ी होती है। लेकिन अभी बच्चों पर इस का प्रयोग बाकी है। उल्लेखनीय है कि यूरोप में हर साल एक हजार बच्चे ऐसे पैदा होते हैं जिनके ह्वदय में कुछ गड़बड़ी होती है। इनमें कई की मृत्यु बहुत जल्दी हो जाती है जबकि कई अन्य को प्रत्यारोपण के लिए ह्वदय नहीं मिल पाता। ऐसे में शोघकर्ता इस नवीन प्रक्रिया से काफी आशावान हैं।

Source: Rajasthan Patrika

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7 Things You Must Know About Your Skin

Posted by cls On December - 26 - 2010

7 Things You Must Know About Your Skin
Knowing what is best for your skin can help you radiate beauty as your skin is your biggest organ which actually aids your physical appearance so make sure you know what your skin needs!

The beauty of your skin depends on a variety of factors including skin care routine and diet, this is why if you want to benefit from a fabulous radiant skin you must pay attention to your skin’s needs. There are a variety of things you must known about your skin so try to take the following skin care tips into consideration, making them a part of your skin care routine:

Cleansing the skin at night is a definite must as the skin accumulates a lot of dirt during the day and that dirt can penetrate the pores, clog them and lead to the development of breakouts which everyone wants to avoid. Use a mild cleanser to remove any traces of dirt off your skin after which use a toner to ensure that your skin is cleaned to perfection, as this way your skin will be able to regenerate and breath during the night. Moisturizers and nourishing serums are a must after cleansing your face so don’t forget to use them every time! Read the rest of this entry »

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त्वचा की देखरेख / Skin Care

Posted by cls On December - 26 - 2010

त्वचा शरीर का सबसे बड़ी अंग प्रणाली है। यह सख्त और नमनशील है और अपने नीचे के ऊतकों को हवा, पानी, विदेशी पदार्थों और बैक्टीरिया से बचाती है। यह चोट के प्रति संवेदनशील है और उसमें अपनी मरम्मत करने की उल्लेखनीय क्षमता है। बहरहाल, अपनी इस लोच के बावजूद त्वचा लंबे समय तक दाब, अत्यधिक बल या घर्षण बरदाश्त नहीं कर सकती।

त्वचा पर लगातार दाब त्वचा को पोषण और आक्सीजन आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को निचोड़ देता है। जब त्वचा को बहुत समय तक रक्त नहीं मिलता है तो ऊतक मर जाते हैं और एक प्रेशर अल्सर बनता है।

प्रेशर अल्सर लकवाग्रस्त व्यक्ति के जीवनकाल में पेश आने वाली एक प्रमुख जटिलता है। यह आकलन किया गया है कि मिसाल के तौर पर रज्जुमज्जा चोट वाले तीन में से एक व्यक्ति में चोट आने के बाद के शुरुआती दिनों में प्रेशर सोर हो जाता है जबकि 50 प्रतिशत और 80 प्रतिशत में बाद में होता है। प्रेशर सोर से बचा जा सकता है लेकिन यह उन लोगों में भी हो जा सकता है जिन्हें बढि़या सेवा और अच्छे उपकरण दिए गए हैं। इन सोर को ठीक होने में अकसर ढेर सारा समय, धन और सेवा की जरूरत पड़ती है; प्रेशर सोर की वजह से महीनों बिस्तर पर पड़े रहना पड़ सकता है, खास कर तब जब यह आपरेशन के कारण हुआ हो। इसमें हजारों डॉलर खर्च हो सकते हैं और इसमें आपकी नौकरी, स्कूल या परिवार का मूल्यवान समय खर्च हो सकता है। Read the rest of this entry »

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Banana Diet – One of the Easiest Ways to Loose Weight

Posted by cls On December - 17 - 2009

Morning Banana Diet Rules

Every diet has rules. If a diet works for you, it’s simply because the rules have had the effect of making you eat less food . Diet rules generally do this by making eating a little harder or less convenient, through restricting when or what you can eat. Throw in a little “scientific theory” for motivation, and you have a diet. And remember, no diet works for everybody. So what are the Morning Banana Diet rules? Here’s a synopsis collected from various sources:

Eat a banana for breakfast

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Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 05

Posted by cls On August - 17 - 2009

स्वाइन फ्लू – टेस्टिंग एण्ड ट्रीटमेंन्ट सेंटर इन दिल्ली

  1. नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिजीज , 22 शामनाथ मार्ग , नई दिल्ली -54
    011 23971272, 060, 344, 524, 449, 326
  2. ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ( एम्स ), अंसारी नगर , अरबिंदो मार्ग रिंग रोड , नई दिल्ली -29
    011 26594404, 26861698,
    1. प्रफेसर आर . सी . डेका 9868397464
  3. डॉक्टर राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल , खड़क सिंह मार्ग , नई दिल्ली -01
    011 23741640, 23741649, 23741639
  4. वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट , यूनिवसिर्टी एनक्लेव , नई दिल्ली -07
    011-27667102, 27667441, 27667667, 27666182
  5. ईस्ट दिल्ली – लालबहादुरशास्त्री हॉस्पिटल , खिचड़ीपुर
  6. वेस्ट दिल्ली – दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल , हरी नगर
  7. नॉर्थ दिल्ली –
    1. अरुणा आसफ अली हॉस्पिटल
    2. सिविल लाइंस – हिंदूराव हॉस्पिटल , मल्कागंज
  8. नॉर्थ – ईस्ट दिल्ली – गुरु तेगबहादुर हॉस्पिटल , दिलशाद गार्डन
  9. नॉर्थ वेस्ट दिल्ली – बाबा साहब आंबेडकर हॉस्पिटल , रोहिणी
    1. भगवान महावीर हॉस्पिटल , पीतमपुरा
    2. बाबू जगजीवन राम हॉस्पिटल , जहांगीरपुरी
    3. संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल , मंगोलपुरी
    4. महर्षि बाल्मीकि हॉस्पिटल , पूठ खुर्द
  10. साउथ दिल्ली
    1. मदनमोहन मालवीय हॉस्पिटल , मालवीय नगर
    2. सफदरजंग हॉस्पिटल , एम्स के बगल में , रिंग रोड
  11. सेंट्रल दिल्ली- लोकनायक हॉस्पिटल , दिल्ली गेट
  12. नई दिल्ली – राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल , बाबा खड़क सिंह मार्ग
  13. एयरपोर्ट – एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन हॉस्पिटल , आईजीआई एयरपोर्ट
  14. हेल्पलाइन 011- 23921401
  15. एनसीआर में सैंपलिंग सेंटर
    1. नोएडा : डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल , नोएडा , 0120 2501 872
    2. गुड़गांव : सिविल हॉस्पिटल , ओल्ड गुड़गांव , 0124-2321121, 4080963
    3. फरीदाबाद : बादशाह खान ( बीके ) हॉस्पिटल , फरीदाबाद
    4. गाजियाबाद : एमएमजे हॉस्पिटल , जसीपुरा मोड़ , गाजियाबाद 0120- 2850 141
    5. कंबाइंड हॉस्पिटल , संजय नगर

कौन पहने मास्क

  1. मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें ही है , जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।
  2. इसके अलावा फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।
  3. भीड़भरी जगहों मसलन , सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।
  4. मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर , नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।
  5. एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।

इन्फेक्शन लेवल

  1. एच 1 एन 1 इन्फेक्शन दो लेवल पर फैलता है। अपर एयर यानी नाक और गले तक और लोअर एयर यानी फेफड़ों में , यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है।
  2. इसका इलाज भी दो स्टेज पर होता है।
    1. नॉन फार्मा – जिसमें मरीज को आइसोलेट किया जाता है और दूसरा
    2. फार्मा , जिसमें दवाएं दी जाती हैं।
  3. ये वायरस हाथ , पेपर और लकड़ी में 8 घंटे तक एक्टिव रहते हैं और प्लास्टिक और स्टील में 24 से 48 घंटे तक। ऐसे में साफ सफाई का खास ध्यान रखें।

सेकंड लाइन ट्रीटमेंट

कई मामलों में टेमी फ्लू ( स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ) का रेजिस्टेंस पाया गया है , ऐसे में सेकंड लाइन ट्रीटमेंट की तैयारी भी हो रही है। इसके लिए रिलियांजा व जेनामिविर , जो कि इनहेलर के फॉर्म में है , के इस्तेमाल पर हेल्थ मिनिस्ट्री और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के एक्सपर्ट विचार कर रहे हैं , लेकिन यह दवा रीनल पेशंट्स को नहीं दी जा सकती , क्योंकि किडनी पर इसका साइड इफेक्ट देखा गया है। साथ ही वैक्सीन बनाने का काम भी शुरू हो गया है।

वायरस कब तक रहता है

  1. एच 1 एन 1 वायरस स्टील , प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे , कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे , टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं।
  2. इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेन्ट , अल्कोहल , ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं।
  3. लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

सेल्फ हीलिंग का फंडा असफल:

एच 1 एन 1 इन्फ्लुएंजा वायरस के इन्फेक्शन में सेल्फ हीलिंग का फंडा पूरी तरह से फेल हो चुका है। अब तक देश भर में हुई 6 मौतों की हिस्ट्री से यह प्रूव हो गया है कि स्वाइन फ्लू में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है , क्योंकि इसके वायरस में शरीर के सारे सिस्टम को शटडाउन करने की क्षमता है।

अब तक स्वाइन फ्लू से जिन मरीजों की मौत हुई है , उनमें से ज्यादातर देर से अस्पताल पहुंचे थे। उनका सही समय पर इलाज शुरू नहीं हो पाया था , इसलिए उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो गए और उनकी मौत हो गई। बीमारी के बाद के पहले तीन दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी स्टेज पर इलाज शुरू हो जाए तो मरीज के ठीक होने की 100 फीसदी गारंटी रहती है , लेकिन अगर इलाज में इससे ज्यादा देर होती है तो केस बिगड़ सकता है।

अगर किसी में बुखार , सर्दी , खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण दिखते हैं तो वह तुरंत हॉस्पिटल में जाए। अगर तुरंत डॉक्टर के पास नहीं जा सकते हैं तो ज्यादा से ज्यादा दो दिन पैरासिटामॉल लेकर यह देख सकते हैं। अगर दो दिन में बुखार उतर जाए और अच्छा महसूस हो तो घबराने की कोई बात नहीं , लेकिन इसके बाद भी अगर लक्षण बरकरार रहें तो तुरंत किसी बड़े अस्पताल में जाएं , जहां स्वाइन फ्लू के इलाज की व्यवस्था हो।

स्वाइन फ्लू में तीन दिन के बाद सांस लेने में दिक्कत , शरीर में दर्द , गले में खराश जैसे लक्षण गंभीर होते जाते हैं और भूख लगनी बंद हो जाती है। 5-6 दिन में किडनी , लिवर , लंग्स या हार्ट की समस्याएं भी शुरू हो सकती हैं और अचानक बॉडी का पूरा सिस्टम शट डाउन हो सकता है। ऐसे में कोई भी चांस न लें।

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Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 04

Posted by cls On August - 16 - 2009

क्या  दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है ?
जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है , शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। इसलिए जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता , जो अभी तक नहीं देखा गया , किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती।

आयुर्वेदिक उपचार:

बचाव के उपाय : इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं।

  1. 4-5 तुलसी के पत्ते , 5 ग्राम अदरक , चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो – तीन बार पीएं।
  2. गिलोय ( अमृता ) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पीएं।
  3. गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।
  4. 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो – तीन बार पीएं।
  5. आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पीएं।
  6. आधा चम्मच हल्दी को गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
  7. एक लीटर पानी में आधा चम्मच सूखा धनिया उबालकर रख लें। उसे थोड़ा – थोड़ा कर दिन में पीएं। इसमें 1-2 इलायची भी डाल सकते हैं।
  8. आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पीएं। इससे रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  9. हल्का – सा जुकाम और छींकें होते ही लक्ष्मीविलास रस की आधी गोली पानी से या थोड़े सौंठ मिले गरम दूध के साथ लें।
  10. आधा चम्मच सौंठ या अदरक के साथ उबालकर दूध , चाय या पानी पीएं।
  11. तुलसी का पानी दिन में तीन बार पीएं। इसे बनाने के लिए 10-15 पत्ते पानी में दो – तीन घंटे तक डाले रखें।
  12. जुकाम या नजले का हल्का असर आते ही जुशांदे की एक पुडि़या लाकर तीन गिलास पानी में उबालें व आधा रहने पर घर में सबको पिला दें। जुशांदे में गुलबनफशा होता है , जो एंटी – एलजिर्क होता है।
  13. करौंदे का सेवन किसी भी रूप में करें।
  14. धूम्र चिकित्सा
    1. गुगुल , कपूर और चार – पांच काली मिर्च गाय के उपले पर रखकर जलाएं या फिर अष्टगंध जलाएं।
    2. घर में लोबान , गुगुल , राल , पीली सरसों , राई – देवदारू , कूठ , प्रियंगु , अगर – तगर , लोध्र , नागरमोथा आदि सामग्री को उपले पर रखकर जलाएं।
    3. ऐसी धूनी दिन में सुबह – शाम दो बार तक कर सकते हैं।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें:  यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें :

  1. त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें , ये सभी एंटी – वायरल हैं।
  2. अस्पतालों या फ्लू प्रभावित क्षेत्र में जाने पर मास्क न मिले तो , तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
  4. बिल्वादि टैबलेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
  5. महासुदर्शन चूर्ण , श्रृंगादि भस्म।

रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये:  इसके लिए इनमें से कोई एक चीज लें :

  1. कच्चा आंवला , आंवला स्वरस , आंवला चूर्ण या आंवला मुरब्बा।
  2. 1 से 2 ग्राम अश्वगंध पाउडर दिन में एक बार।
  3. शतावर चूर्ण 1 से 2 ग्राम , दिन में एक बार।
  4. शतावर का सूप पीएं।

यह जरूर करें

  1. पानी ज्यादा पीएं ताकि पेशाब के रास्ते वायरस बाहर चला जाए।
  2. पेट साफ रखें , कब्ज के मरीज अपना खास ध्यान रखें। पेट खराब होने पर रोगप्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
  3. बाहर से आने पर हल्दी मिले पानी से हाथ धोएं। बाद में साबुन से भी हाथ धो लें।
  4. घर में फिनाइल या डिटॉल मिले पानी का पोंछा लगाएं।

पहले से बचाव के कुछ घरेलू उपाय :

  1. एक चम्मच काला नमक व एक चुटकी हल्दी पाउडर को मिलाकर जलनेति करें। पहले बायें से दायें फिर दायें से बायें नाक से निकालें। सांस के जरिए जाने वाला वायरस काफी हद तक निकल जाता है।
  2. गाय का घी दोनों नासिकाओं में दो – दो बूंदें सोते समय डालें। ध्यान रहे , घी गले में न जाकर सीधा नाक में चढ़े।
  3. रात को सोते समय पांव के तलवों की सरसों के तेल से मालिश करें। इसके बाद हल्की व हल्के कॉटन के मोजे पहनकर सो जाएं।
  4. हरी सब्जियां , फल और विटामिन सी वाले फल जैसे संतरा , मौसमी , आंवला व नींबू आदि का सेवन करें।
  5. पेय पदार्थ ज्यादा लें।
  6. घर से निकलते वक्त सरसों का तेल नासिकाओं में लगाएं।

स्वाइन फ्लू होने पर दवा के साथ किए जाने वाले घरेलू उपाय
( इन उपायों को करने से रिकवरी तेज हो जाती है। ) -

  1. दिन में तीन बार सुबह उठने पर , नाश्ते के तीन घंटे बाद दोपहर में और फिर दोपहर के खाने के 3 से 4 घंटे बाद शाम को , धीरे – धीरे अनुलोम – विलोम प्राणायाम करें और गहरी सांसें लें। 5-5 मिनट तक ऐसा अभ्यास करें।
  2. सुबह खाली पेट आधी छोटी चम्मच हल्दी की गोली बनाकर पानी से लें।
  3. तुलसी के 10-12 पत्तों का रस शहद में मिलाकर सुबह – शाम लें।
  4. तुलसी के 2-4 गमले घर में रखें।

मुद्रा, प्राणायम और आसन:

  1. स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जाना चाहिये। इसके लिए प्राण मुद्रा व लिंग मुद्रा , दोनों काम करेंगी।
  2. मुद्रा का प्रयोग रोज 1 से 45 मिनट तक कर सकते हैं।
  3. आसन शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं , तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले निम्न अभ्यास करें :
  4. कपालभाति , ताड़ासन , महावीरासन , उत्तानपादासन , पवनमुक्तासन , भुजंगासन , मंडूकासन , अनुलोम – विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे – धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।
  5. व्याघ्रासन , यानासन व सुप्तव्रजासन। ये आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।

होम्योपैथी उपचार

कैसे करें बचाव

  1. फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम –200  की चार – पांच बूंदे , आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह – शाम पांच दिन तक लें। इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं।
  2. मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती , इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज

  1. बीमारी के शुरुआती दौर के लिए जब खांसी – जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं :
  2. - जेलसीमियम 30, चार – पांच बूंदें , दिन में तीन से चार बार।
  3. -  यूपीटोरियम पर्फोलेटम 30, चार – पांच बूंदें , दिन में तीन से चार बार।
  4. - रसटॉक्स -30, चार – पांच बूंदें , दिन में तीन से चार बार।
  5. अगर फ्लू के मरीज को उलटियां भी आ रही हों तो इपिकॉक -30 की चार – पांच बूंदे , दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।
  6. जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम 30 की चार – पांच बूंदें , दिन में तीन – चार बार लें। यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।
  7. जो मरीज बहकी – बहकी बातें करने लगे , उनको बैप्टीशिया -30 की चार – पांच बूंदे , दिन में तीन से चार बार दें।

क्या खाएं और क्या करे- 

  1. - घर का ताजा बना खाना खाएं।
  2. - ताजे फल , हरी सब्जियां खाएं।
  3. - मौसमी , संतरा , आलूबुखारा , गोल्डन सेव , सरदा व तरबूज और अनार अच्छे हैं।
  4. - सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं।
  5. - पानी ज्यादा पीएं।
  6. - नींबू – पानी , सोडा व शर्बत जैसे पेय पदार्थ पीते रहें।
  7. - दूध , चाय , सभी फलों के जूस , मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं।

क्या न खाएं और न करे-

  1. - बासा खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं।
  2. - इन दिनों बाहर के खाने से बचें।
  3. - तला – भुना , पकौड़े – समोसे , कचौड़ी , छोले – भटूरे , फास्ट फूड और जंक फूड न खाएं।
  4. - बाहर के कटे हुए फल , चाट – टिक्की न खाएं
  5. - वैसे , तो इस रोग के दौरान व इससे बचने के लिए खाने – पीने पर ज्यादा रोक नहीं है पर ऑर्डर पर मंगाए जाने वाले व नॉनवेज भोजन से जरूर बचें।

कुछ अन्य तथ्य:

  1. -1918 में फैला था स्पेनिश स्वाइन फ्लू , दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने गंवाई थी जान , भारत में भी 70 लाख लोग मारे गए थे।
  2. - स्वाइन फ्लू से पीडि़त सूअर की लार और सांस के जरिए वायरस दूसरे जानवरों में फैल गया है।
    -18 मार्च 2009 को मैक्सिको में यह बीमारी शुरू हुई। उसके बाद चार महीने के अंदर पूरी दुनिया में फैल गई।

हेल्पलाइन नंबर

Chennai
King Institute of Preventive Medicine  ( 24/7 Service)
Guindy, Chennai – 32
(044) 22501520, 22501521 & 22501522

Communicable Diseases Hospital
Thondiarpet, Chennai
(044) 25912686/87/ 88, 9444459543

Government General Hospital
Opp. Central Railway Station, Chennai 03
(044) 25305000, 25305723, 25305721, 25330300

Pune
Naidu Hospital
Nr Le’Meridian, Raja Bahadur Mill, GPO, Pune – 01
(020) 26058243

National Institute of Virology
20A Ambedkar Road , Pune – 11
(020) 26006290

Kolkata
ID Hospital
57,Beliaghata, Beliaghata Road , Kolkata – 10 
(033) 23701252

Coimbatore
Government General Hospital
Near Railway Station,
Trichy Road , Coimbatore – 18
(0422) 2301393, 2301394, 2301395, 2301396

Hyderabad
Govt. General and Chest Diseases Hospital ,
Erragadda, Hyderabad
(040) 23814939

Mumbai
Kasturba Gandhi Hospital
Arthur Road, N M Joshi Marg, Jacob Circle , Mumbai – 11
(022) 23083901, 23092458, 23004512

Sir J J Hospital
J J Marg, Byculla, Mumbai – 08
(022) 23735555, 23739031, 23760943, 23768400 / 23731144 / 5555 / 23701393 / 1366

Haffkine Institute
Acharya Donde Marg, Parel, Mumbai – 12
(022) 24160947, 24160961, 24160962

Kochi
Government Medical College
Gandhi Nagar P O, Kottayam – 08
(0481) 2597311,2597312

Government Medical College
Vandanam P O, Allapuzha – 05
(0477) 2282015

Taluk Hospital
Railway Station Road , Alwaye,Ernakulam
(0484) 2624040 Â Sathyajit – 09847840051

Taluk Hospital
Perumbavoor PO , Ernakulam 542
(0484) 2523138 Â Vipin – 09447305200

Gurgaon & Delhi
All India Institute of Medical Sciences (AIIMS)
Ansari Nagar, Aurobindo Marg Ring Road , New Delhi – 29
(011) 26594404, 26861698Â Prof. R C Deka -9868397464

National Institute for Communicable Diseases
22, Sham Nath Marg,
New Delhi – 54
(011) 23971272/060/ 344/524/449/ 326

Dr. Ram Manohar Lohia Hospital
Kharak Singh Marg,
New Delhi – 01
(011) 23741640, 23741649, 23741639
Dr. N K Chaturvedi 9811101704

Vallabhai Patel Chest Institute
University Enclave, New Delhi- 07
(011) 27667102, 27667441, 27667667, 27666182

दिल्ली
राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल :011- 2340-4328
दिल्ली सरकार : 1075, 155345 और 23921401
सभी हेल्पलाइन नंबर सातों दिन और चौबीसों घंटे काम करते हैं।

Bangalore
Victoria Hospital
K R Market, Kalasipalayam, Bangalore – 02
(080) 26703294Â Dr. Gangadhar – 94480-49863

SDS Tuberculosis & Rajiv Gandhi Institute of Chest Diseases
Hosur Road, Hombegowda Nagar, Bangalore – 29
(080) 26631923 Â Dr. Shivaraj – 99801-48780

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Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 03

Posted by cls On August - 16 - 2009

दवा के इस्तेमाल में सावधानी बरते-

स्वाइन फ्लू से पीडि़त लोगों और खासतौर पर बच्चों को टैमीफ्लू दवा दी जाती है. इस दवा का इस्तेमाल करते समय बरती जाने वाली वाली कुछ सावधानियां ।

  1. एक ब्रिटिश स्टडी के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों को टैमीफ्लू दवा देते समय इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में सतर्क रहना चाहिए।
  2. टैमीफ्लू की वजह से बच्चों में उलटी की शिकायत या फिर डिहाइड्रेशन हो सकता है।
  3. कई स्टडीज बताती हैं कि बच्चों पर स्वाइन फ्लू के साइड इफेक्ट होते हैं। मसलन , उन्हें उबकाई महसूस होना या फिर रात में बुरे सपने आ सकते हैं।
  4. डॉक्टरों के मुताबिक जब स्वाइन फ्लू के सभी लक्षण नजर आएं , तभी टैमीफ्लू दवा का कोर्स करना चाहिए।
  5. दो साल से कम उम्र के बच्चों को टैमीफ्लू नहीं दी जानी चाहिए।
  6. टैमीफ्लू का छह सप्ताह तक सेवन करने के बाद ही किसी व्यक्ति को फ्लूप्रूफ घोषित किया जा सकता है।
  7. अगर कोई व्यक्ति स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया है , तो उसे टैमीफ्लू देने से रिकवरी की रफ्तार तेज हो जाती है।
  8. स्वाइन फ्लू की गलत डोज लेने से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
  9. चूंकि सरकार ने रेग्युलर केमिस्ट शॉप पर टैमीफ्लू की सेल पर बैन लगा रखा है , इस वजह से ब्लैक माकेर्ट में टैमीफ्लू बिक रही है। सभी लोगों को सलाह दी जाती है कि  डाक्टर की सलाह के बिना  दवा खरीदने और खाने से बचें।

मास्क

  1. सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।
  2. सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता है।
  3. स्वाइन फ्लू के लिए दो तरह के मास्क हैं उपलब्ध कीमत
    1. थ्री लेयर सर्जिकल मास्क 10 से 12 रुपये
    2. एन – 95 100 से 150 रुपये
  4. स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क बिल्कुल कारगर नहीं होता है। लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन – 95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं। इसके बाद मास्क को फेंक देना होता है।
  5. ट्रिपल लेयर सर्जिकल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 फीसदी तक बचाव रहता है और एन -95 से 95 फीसदी तक बचाव संभव है।
  6. वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होता है जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें , तब इसे ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाए क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।
    - एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें , क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।
  7. अगर आपको फ्लू नहीं है , तो मास्क पहनना जरूरी नहीं है।
  8. अगर आप किसी फ्लू पेशंट की देखभाल कर रहे हैं , किसी ऐसी जगह जा रहे हैं , जहां फ्लू पेशंट्स की आमद है , या किसी भीड़ वाली जगह जा रहे हैं , तो सावधानी के लिए मास्क लगाना जरूरी हो जाता है।
  9. जब भी किसी फ्लू पीड़ित के संपर्क में आएं तो उससे मुलाकात के फौरन बाद मास्क को फेंक दें और हाथों को धोएं।
  10. ध्यान रखें कि डॉक्टरों के मुताबिक यदि आपके आस – पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है , तब तक मास्क न लगाने की सलाह दी जाती है।
  11. अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।
  12. मास्क तब जरूर पहनना चाहिए , जब उन्हें खांसी हो रही हो।
  13. मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।
  14. अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।
  15. चाहे पालतू जानवर हों या गली के कुत्ते वगैरह , उनके मुंह के संपर्क में न आएं। न ही अपना प्यार जताने के लिए उन्हें किस करें।

फ्लू वायरस H1N1 कैसे असर करता है ?

  1. शरीर में मुंह या नाक के सहारे वायरस एंटर करता है।
  2. सांस लेने से जुड़े नलियों और फेफड़ों में प्रवेश करता है।
  3. सांस लेने के सिस्टम की कोशिकाओं पर हमला करता है।
  4. शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र वायरस के खिलाफ एक्टिव हो जाता है और इसे खत्म करने की कोशिश करता है।
  5. अगर वायरस की वजह से फेफड़ों की बहुत सारी कोशिकाएं मृत हो जाती हैं , तो व्यक्ति मर सकता है।

वायरस के बारे में कुछ खास बाते-

  1. वायरस के बहुत सूक्ष्म रूप धारण करने और अलग – अलग रूपों में बदलते , विकसित होने की क्षमता के कारण डॉक्टर हमेशा वायरस का मूल खोजते हैं।
  2. वायरस तीन प्रकार के होते हैं – ए , बी और सी.
  3. इसमें से ए और बी के कारण खास तौर पर एपिडेमिक ( महामारी ) फैलती है।
  4. ए इंसानों और जानवरों सभी में पाया जाता है।
  5. बी इंसानों में ही अमूमन पाया जाता है।
  6. ए – एच 1 एन 1 स्वाइन इनफ्लुएंजा.
    1. एच हीमेगग्लूटिनिन प्रोटीन वायरस को उसकी होस्ट सेल ( वह कोशिका जिसमें वायरस सबसे पहले एंटर करता है ) से अटैच करता है।
    2. 1 स्पेसिफिक एच और एन प्रोटीन टाइप के बारे में बताता है।
    3. एन न्यूरामिनिडेस प्रोटीन नए बने वायरस को होस्ट सेल से बाहर निकलने में मदद करता है स्वाइन इनफ्लुएंजा स्ट्रेन के बारे में बताता है

वायरस की साइकल

  1. सबसे पहले वायरस होस्ट सेल से अटैच हो जाता है और धीमे – धीमे सेल उसे अपने अंदर ले लेती है।
  2. वायरस का आरएनए रिलीज होता है और होस्ट सेल के न्यूक्लियर में पहुंच जाता है।
  3. यहां पहुंचकर यह सेल का इस्तेमाल वायरस के जेनेटिक मटीरियल की कॉपी तैयार करने में करता है।
  4. यह मटीरियल आपस में जुड़कर नए वायरस तैयार करता है
  5. फिर वायरस कई बार होस्ट सेल को खत्म कर बाहर निकलते हैं और कई बार उसे नष्ट किए बिना ही बाहर आ जाते हैं और दूसरी सेल के साथ यही प्रॉसेस दोहराते हैं।
  6. सबटाइप दो सरफेस प्रोटींस या कहें कि एंटीजंस से तय होता है

कैसे डिवेलप होता है  H1N1 वायरस xxxxx

  1. मुर्गों में एवियन फ्लू होता है। इंसानों पर इस वायरस का खतरनाक असर होता है , लेकिन इस वायरस का एक स्पीशीज से दूसरी स्पीशीज में ट्रांसफर काफी मुश्किल होता है , खास तौर पर इंसान सीधे तौर पर इससे प्रभावित नहीं होते।
  2. सूअर: यह एक जानवर कई सारे वायरस के पनपने के लिए मुफीद होता है। एवियन फ्लू वायरस सूअरों में आसानी से पनपता है और दूसरे वायरस के साथ मिलकर नया स्वाइन फ्लू वायरस तैयार होता है।
  3. मनुष्य: जेनेटिक बनावट में मनुष्य और सूअर काफी समान होते हैं। इसलिए इन्फ्लुएंजा वायरस सूअरों से मनुष्यों में आसानी से ट्रांसफर हो सकता है।

FAQ – अकसर पूछे जाने वाले सवाल

  1. अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं , तो क्या करूं ?
    सामान्य जिंदगी जीते रहें , जब तक आपमें फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं , तो डॉक्टर से कन्सल्ट करें।
  2. अगर साथ में रहने वाले किसी शख्स को स्वाइन फ्लू है , तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए ?
    हां , आप ऑफिस जा सकते हैं , मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है , तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।
  3. स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं ?
    अस्पताल वयस्कों को स्वाइनफ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत : 5 दिनों तक ऑब्जवेर्शन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए , ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं , वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर होता है।

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Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 02

Posted by cls On August - 16 - 2009

किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर मरीज को-

  1. तुरन्त अपने  नजदीक स्थित उस अस्पताल में जाएं , जहां स्वाइनफ्लू के इलाज की व्यवस्था हो.
  2. ज्यादा जानकारी के लिए टॉल – फ्री नंबर 011-23921401 पर कॉल करे। यह नंबर सातों दिन और चौबीसों घंटे काम कर रहा है। इसके अलावा अस्पतालों के हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं।
  3. http://mohfw.nic.in/  इस वेबसाइट के स्वाइनफ्लू सेक्शन पर जानकारी ले सकते हैं। वेबसाइट के होमपेज पर टॉप पर स्वाइन फ्लू संबंधी लिंक है , जिस पर क्लिक करते ही आप फ्लू से जुड़ी गाइडलाइंस और तमाम दूसरी जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

स्वाइनफ्लू की आशंका होने पर क्या करें

  1. फौरन डॉक्टर से संपर्क करें।
  2. पीड़ित व्यक्ति को एच 1 एन 1 संक्रमण होने की आशंका है , तो नजदीकी अस्पताल में जाकर टेस्ट करवायें।
  3. स्वाइन फ्लू वायरस संक्रमण की आशंका होने पर गले से स्वैब सैंपल लेकर , टेस्ट के लिए भेजा जाता है।
  4. अगर सैंपल लिया गया है , तो पेशंट को टैमीफ्लू दवा दी जाएगी , यानी सैंपल लेते ही दवा का कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।
  5. पेशंट की स्थिति गंभीर होने पर उसे फौरन स्वाइन फ्लू वॉर्ड में एडमिट करवाये।
  6. स्वाइन फ्लू टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आती है , तो उसे अस्पताल या घर में एक अलग कमरे रख कर इलाज जारी रखे। इस दौरान संक्रमण न फैलने पाए इसका खास ध्यान रखे।
  7. स्वाइन फ्लू संक्रमण से ग्रस्त लोगों के संपर्क में आने वालों का भी फ्लू टेस्ट करवाये।

कैसे होती है संदिग्ध मरीजों की पहचान

  1. सिर दर्द ,
  2. बुखार ,
  3. गले में खरास ,
  4. कफ ,

शरीर के किसी हिस्से में दर्द और छोटे बच्चों में सांस लेने में दिक्कत महसूस होने जैसे लक्षण वाले मरीजों से यह पूछा जाता है कि वह हाल में विदेश से तो नहीं लौटा या स्वाइन फ्लू पीड़ित या इसके संदिग्ध मरीज के संपर्क में तो नहीं आया। अगर इनमें से कोई बात सामने आती है तो तुरंत सैंपल लेकर जांच के लिए एनआईसीडी भेज दिया जाता है और रिपोर्ट आने तक जरूरी हो तो मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है वरना सावधानी बरतने की सलाह के साथ घर भेज दिया जाता है , लेकिन हॉस्पिटल की टीम मरीज पर नजर रखती है।

संदिग्ध मरीजों को सलाह

  1. घर में बाकी लोगों से दूर रहें
  2. घर से बाहर न निकलें
  3. मरीज और उसके संपर्क में आने वाले सभी लोग मास्क पहनें
  4. आराम करें और लिक्विड चीजें ज्यादा लें
  5. डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दवा आदि लें

कैसे होती हैं सैंपल की जांच
स्वाइन फ्लू बुखार की पुष्टि के लिए ‘ रीयल टाइम पीसीआर ‘ टेस्ट किया जाता है। संदिग्ध मरीज के गले से कफ या थूक ( सिक्रेशन ) लिया जाता है। अमूमन जांच रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर आ जाती है। सिक्रेशन में एच 1 एन 1 वायरस के राइबो न्यूक्लिक एसिड ( आरएनए ) देखा जाता है। जांच दो चरणों में की जाती है। प्रत्येक चरण में लगभग 12 घंटे का समय लगता है।

इलाज के विकल्प

  1. पैरासिटामॉल- ज्यादातर लोग फ्लू के लक्षण दिखने पर अगर पर्याप्त आराम करते हैं और पैरासिटामॉल टैब्लेट लेते हैं , तो उन्हें आराम मिलता देखा गया है। इस दवा के इस्तेमाल से बुखार कम होने लगता है और फ्लू के दूसरे लक्षण भी कम होने लगते हैं।
  2. एंटी – वायरस – डब्ल्यूएचओ ने अभी तक सिर्फ टैमीफ्लू को ही स्वाइन फ्लू के इलाज के दवा के तौर पर रिकमंड किया है। अगर किसी में भी स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते हैं , तो उसे टैमीफ्लू दी जाती है। टैमीफ्लू वायरस को पूरी तरह से खत्म नहीं करती , लेकिन बीमारी को खत्म करने में मदद करती है। इसके साथ ही टैमीफ्लू स्वाइनफ्लू वायरस की वजह से होने वाली दूसरी बीमारियों मसलन , न्यूमोनिया आदि से लड़ने में मददगार होती है। एंटी – वायरल्स वायरस को पूरी तरह से खत्म नहीं करतीं , लेकिन उनकी संख्या में वृद्धि होने से रोकती हैं। सामान्य फ्लू के वायरस अपने आप सात दिन में खत्म हो जाते हैं।
  3. एंटीबायोटिक्स – एंटीबायोटिक्स का स्वाइन फ्लू संक्रमण करने वाले वायरस पर कोई असर नहीं होता है। लेकिन अगर किसी पेशंट को सेकंडरी बैक्टीरियल इनफेक्शन हो जाता है , तो उसे एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं। मसलन , अगर किसी पेशंट को सीने में इन्फेक्शन की शिकायत है , तो ये दवाई दी जाएंगी।
  4. वैक्सीन – फिलहाल स्वाइन फ्लू की कोई भी वैक्सीन बाजार में उपलब्ध नहीं है। हालांकि दो वैक्सीन डिवेलपमेंट की फाइनल स्टेज में हैं। उम्मीद की जा रही है कि साल 2009 के अंत तक वैक्सीन तैयार हो जाएगी।

स्वाइन फ्लू न हो , इसके लिए क्या करें

  1. बुखार , सर्दी , खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण दिखते हैं तो फौरन हॉस्पिटल जाएं।
  2. फौरन डॉक्टर के पास नहीं जा सकते हैं तो ज्यादा से ज्यादा दो दिन पैरासिटामॉल ( क्रोसिन आदि ) लेकर देख सकते हैं।
  3. दो दिन में बुखार उतर जाए और अच्छा महसूस हो तो घबराने की बात नहीं , लेकिन लक्षण बढ़ते जाएं तो फौरन किसी बड़े अस्पताल में जाएं , जहां स्वाइन फ्लू के इलाज की व्यवस्था हो।
  4. बीमारी के बाद के पहले तीन दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी स्टेज पर इलाज शुरू हो जाए तो मरीज के ठीक होने की 100 फीसदी गारंटी रहती है।
  5. मरीज को खांसते या छींकते समय हमेशा रूमाल का इस्तेमाल करना चाहिए।
  6. मरीज को अच्छी तरह हवादार कमरे में रखें।
  7. वह आराम करे और खुले में न तो थूके , न खांसे और न ही छींके।
  8. अच्छा और न्यूट्रीशियस फूड लें और बाहर और दूसरे के संपर्क में न जाएं।
  9. मरीज को घर के ऐसे कॉमन एरिया में न जाने दें , जहां परिवार के दूसरे सदस्य रहते हैं।
  10. कोशिश करें कि मरीज रूम में अकेला ही सोए। अगर ऐसा नहीं हो सकता है तो इस बात का ध्यान रखें कि मरीज और रूम शेयर करने वाले दूसरे आदमी का मुंह सोते समय विपरीत दिशा में हो।
  11. मरीज हर समय मास्क पहन कर रखें।
  12. अगर मास्क उपलब्ध न हो तो साफ कपड़े के टुकड़े , रूमाल या टिश्यू पेपर से मुंह और नाक को पूरी तरह ढक कर रखें।
  13. इस्तेमाल किए गए मास्क , टिश्यू पेपर आदि को ढक्कनदार और पॉलीथीन से कवर्ड डस्टबिन में ही फेंकें।
  14. मरीज स्मोकिंग न करें , दूसरे लोगों से क्लोज कॉन्टैक्ट में आने से बचें , हमेशा कम से कम एक हाथ की दूरी बनाकर रखें।
  15. बाहर से आने वालों से न मिलें और हॉस्पिटल जाने के अलावा बाहर बिल्कुल न निकलें।
  16. अपने हाथ बार – बार साबुन या किसी और हैंडवॉश से साफ करें।

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Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 01

Posted by cls On August - 16 - 2009

सेफ्टी स्वाइन फ्लू से
ग्लोबल होती दुनिया का एक नया चेहरा है । मार्च 2009 में मैक्सिको में शुरू हुआ स्वाइन फ्लू धीमे – धीमे भारत में भी फैलता  जा रहा है। इस बीमारी  से डरने के बजाय जरुरत है इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की । एक्सपर्ट्स के अनुसार स्वाइन फ्लू से सेफ्टी के तमाम पहलुओं के बारे में जानकारियां:

Swine flu hits India

क्या है एच 1 एन 1 स्वाइन फ्लू इनफ्लुएंजा
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी एक बीमारी है , जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच 1 एन 1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। लेकिन सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों , सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। अब स्वाइन फ्लू का जो वायरस फैल रहा है , वह पूरी तरह से इंसानों में विकसित हुआ वायरस है।

कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू
जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक , या मुंह और नाक से निकले दव कण गिरते हैं , वह वायरस की चपेट में आ जाता है। ये कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन , दरवाजे , फोन , की बोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी ये वायरस फैल सकते हैं , अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया है।

अन्य जानकारियां

  1. इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है दिमाग से डर को निकालना।
  2. ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं।
  3. जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है , वे इलाज के जरिए सात दिनों में ठीक हो जाते हैं।
  4. कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो गए , जबकि कुछ लोगों को तो ठीक होने के बाद ही पता चला कि उन्हें स्वाइन फ्लू था।
  5. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है , उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संख्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानी एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं , जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है। 

 कब करवाएं टेस्ट- जब इनमें से कोई दो लक्षण नजर आएं –

  1. बुखार
  2. बहुत तेज जुकाम , जिसमें नाक से पानी बहता रहता है और गले में खराश
  3. डायरिया
  4. लगातार उबकाई महसूस होना या उलटी होना
  5. सुस्ती और भूख न लगना
  6. कफ और इस वजह से सांस लेने में तकलीफ

कौन रहे ज्यादा सावधान

  1. 5 साल से कम उम्र के बच्चे , 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी बरते.
  2. इसके अलावा जिन लोगों को निम्न में से कोई एक बीमारी है , उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए :
    1. - फेफड़ों , किडनी या दिल से जुड़ी बीमारी
    2. - मस्तिष्क संबंधी ( न्यूरोलॉजिकल ) बीमारी मसलन , पर्किन्सन
    3. - कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
    4. - डायबीटीज के रोगी
    5. - ऐसे लोग जिनको पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अब भी हो
  3. ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  4. गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान
    1. गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोध तंत्र ( इम्यून सिस्टम ) शरीर में होने वाले हॉर्मोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है।
    2. खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27 वें से 40 वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। इसलिए गर्भवती महिलाएं फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें और जल्द से जल्द एंटी – वायरल मेडिसिन लें।
  5. बच्चों का रखें ध्यान , ये रहे इमरजेंसी वॉर्निंग साइन :
    1. - अगर जोर से सांस ले रहे हैं , जल्दी – जल्दी सांस ले रहे हैं या सांस लेने में किसी किस्म की तकलीफ हो रही है
    2. - त्वचा की रंगत नीली होती जा रही है
    3. - बच्चा पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पी रहा है
    4. - सुबह देर तक बिस्तर पर पड़ा रहता है या किसी से बात करने के बजाय गुमसुम रहता है
    5. - गोद में लेते ही बच्चा चीखने , रोने लगता है
    6. - फ्लू के लक्षण कई बार ठीक होते दिखते हैं , लेकिन सावधानी बरतें क्योंकि यह एक बार फिर कफ और बुखार के साथ लौट सकता है
    7. - बुखार के साथ रैशेज आ रहे हों , तो भी चिंता की बात है
  6. वयस्कों के लिए वॉर्निंग साइन :
    1. - सांस लेने में दिक्कत
    2. - पेट या सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
    3. - अचानक से सिर में दर्द होना
    4. - लगातार उलटी होना या उबकाई महसूस होना

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