बारिश के मौसम में स्किन की समस्याएं सबसे ज्यादा होती हैं। फंगल व बैक्टीरियल इंफेक्शन, घमौरियां, रैशेज और मुंह पर दाने निकलने जैसी दिक्कतें आम होती हैं।
कारण : इस मौसम में शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है। उमस ज्यादा होने के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में सफाई का ध्यान न रखने से दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
- दिन में दो-तीन बार नहाएं।
- कॉटन के हल्के कपड़े पहनें, जो पसीना सोखें।
- इस मौसम में क्रीम आदि का इस्तेमाल कम-से-कम करें।
- अगर स्किन ऑइली या सामान्य है तो बार-बार पानी से मुंह धोते रहें।
- बारिश में भीगकर आने के बाद साबुन से जरूर नहाएं।
- पैरों की उंगलियों के बीच की सफाई पर खास ध्यान दें।
- पानी में नीबू की कुछ बूंदें निचोड़कर नहाना काफी फायदेमंद हो सकता है।
- खाने में खीरा और नीबू जैसी चीजों और हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करें।
- पानी खूब पिएं और तली-भुनी, बासी या बाहर की चीजें खाने से बचें।
फोड़े-फुंसी
- फोड़े-फुंसी बड़े हों तो टी-बैक्ट (ग्लैक्सो) क्रीम दिन में एक-दो बार लगा लें। नीम की छाल घिसकर लगा सकते हैं। पट्टी नहीं बांधनी है। जेंशन वायलेट या नीली दवाई लगा सकते हैं।
- फोड़े-फुंसी होने पर हीपर सेल्फ 30 , साइलीशिया 30 , आनिर्का 30 ( में से कोई एक ले सकते हैं।
- गंधक रसायन की दो-दो गोली सुबह शाम पानी से लें। बच्चे आधी मात्रा लें। इसे शुगर, बीपी व हार्ट पेशेंट ले सकते हैं।
- मिट्टी का लेप पूरे शरीर पर करें।
- आधा दूध आधा पानी मिलाकर कच्ची लस्सी पिएं।
- नहाते वक्त पेट व पीठ पर खूब पानी डालें।
- रोजाना पांच-दस दाने नीम की निंबोली खायें।
- नीम के पत्तों को उबाल लें। इस पानी से फोड़े-फुंसी धोयें।
- पकाफोड़ा फूट न रहा हो नीम की छाल घिसकर उसका चंदन लगाने से जल्दी फूट जाता है।
- बरसात में पत्तेदार सब्जियां खाने से बचें क्योंकि इनसे पेट खराब होता है। मट्ठा-छाछ या लस्सी भी न पीयें। इससे यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में दर्द हो सकता है।
घमौरियां
- गर्मी से पसीने की ग्रंथियों का मुंह बंद हो जाता है। इससे हल्के सफेद या लाल पिनहेड जैसे बारीक-बारीक छाले बन जाते हैं, जिनमें तीखी व चुभनवाली खारिश होती है। ये दाने बगल, छाती व पीठ पर हो सकते हैं। इन्हें ही आम भाषा में घमौरियां कहते हैं।
- सूती व हल्के कपड़े पहनें।
- दिन में दो-तीन बार नहाने से आराम मिलेगा।
- नायसिल या डर्मीकूल लगाएं।
दाद, खाज, खुजली
- स्किन को ड्राई रखें।
- रैनबैक्सी का एंटीफंगल पाउडर एब्जॉब दिन में दो बार लगाएं।
- कैंडिड पाउडर या कैंडिड क्रीम भी लगा सकते हैं।
- रैनबैक्सी की ही सेबिफिन क्रीम लगाएं।
समर रैशेज
- नमी व पसीने से पीठ की स्किन सख्त हो जाती है या कई बार कट पड़ जाते हैं। इन्हें समर रैशेज कहते हैं।
पाउडर लगाएं। - ज्यादा देर तक किसी चीज के साथ पीठ लगाकर न बैठें।
- धुलाई के बाद कपड़ों से साबुन अच्छी तरह साफ करें।
कीड़े का काटना
- कई बार मच्छर-मक्खी या कीड़ों के काटने या उनकी रगड़ से भी इरिटेंट डर्मिटाइटिस हो जाती है।
इससे बचने के लिए जाली लगाकर रखें। - रात को कपड़े झाड़कर पहनें और जमीन पर न सोयें।
- सोफ्राडेक्स या फ्यूसीबेट क्रीम लगा सकते हैं। एविल 25 एमजी की एक गोली भी ली जा सकती है।
- कैलामाइन लोशन भी लगाया जा सकता है।
Popularity: 3% [?]








