क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Shri Tarunsagar) दान देना उधार देने के समान है । देना सीखो क्योंकि जो देता है वह देवता है और जो रखता है वह राक्षस । ज्ञानी तो इशारे से ही देने को तैयार हो जाता है मगर नीच लोग गन्ने की तरह कुटने पिटने के बाद ही देने [...]
Archive for the ‘Indian Saints and their Preaches’ Category
50 वर्ष के बाद भोजन बदल देना चाहिये
April 21st, 2010
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Shri Tarunsagar) 50 वर्ष के बाद भोजन बदल देना चाहिये । 100 वर्ष के बाद मकान को गिरा देना चाहिये । 500 वर्ष बाद मंदिर और मस्जिद ढहा देना चाहिये । 1000 वर्ष धर्म में आग लगा देनी चाहिये । 100 वर्ष के बाद मकान की डिजाइन पुरानी हो [...]
मनुष्य की चुसने की आदत (habit) बहुत पुरानी है
July 22nd, 2009
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) मनुष्य की चुसने की आदत (habit) बहुत पुरानी है । जब वह पैदा हुआ तो पैदा होते ही मां का स्तन चूसने लगा । फिर थोडा बडा हुआ तो अंगूठा (thumb) चूसने लगा । फिर थोडा और बडा हुआ तो आम और गन्ना चूसने लगा । और जब [...]
आज मैचिंग का जमाना है
July 14th, 2009
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) आज मैचिंग का जमाना है । ऊपर से नीचे और आगे से पीछे सब ओर मैचिंग चल रही है । वस्त्रों और गहनों के मैचिंग के इस दौर में आज एक और मैचिंग जरुरी हो गई है । वह है स्वभाव ( Nature) की मैचिंग । अगर तुम [...]
धर्म का दुश्मन..
July 13th, 2009
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) धर्म का दुश्मन नास्तिक नहीं बल्कि तथाकथित धर्म के ठेकेदार है । ईश्वर को जितना बदनाम इन तथाकथित ठेकेदारों ने किया है, उतना नास्तिकों ने नहीं । वैसे भी हीरे के दुश्मन कंकर पत्थर कहां होते है, नकली हीरे होते है । यह सच है कि आज खजाने [...]
आप घर के बाहर भले ही …..
September 7th, 2008
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) आप घर से बाहर भले ही डॉक्टर,doctor वकील,advocate व्यापारी businessman और बुद्धिजीवी बने रहे लेकिन शाम को जब घर पहुंचे तो अपने पेशे को बाहर छोडकर ही घर में प्रवेश करें । कारण कि वहां तुम्हारे दिमाग की नहीं दिल की जरुरत है ।
मन ही बन्धन और मोक्ष का कारण है-
September 5th, 2008
cls मन ही बन्धन और मोक्ष का कारण है (गोलोकवासी परम भागवत संत श्रीरामचन्द्र केशव डोंगरेजी महाराज) (कल्याण दिसम्बर २००५ से साभार) आत्मा के लिये कोई वास्तविक सुख दुःख नहीं होता. सुख दुःख मन में ही होते है. सुख दुःख मन का धर्म है. मन में सुख दुःख होने पर आत्मा कल्पना करती है कि मुझे [...]
समय अमूल्य है ..
September 4th, 2008
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) समय अमूल्य है । जिंदगी में एक वर्ष का क्या महत्त्व है ? यह इसी वर्ष फेल हुये विद्यार्थी से पूछिये । एक माह का महत्त्व जानना हो तो उस माँ से पूछिये जिसने अठ-मासिया बच्चे को जन्म दिया है । सात दिन का महत्त्व जानने के लिये [...]
जिन्दगी मे केवल चार दिन है ..
September 2nd, 2008
cls क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर (Muni Tarunsagar) जिंदगी में केवल चार दिन है और वे चार दिन भी दो आरजू और दो इन्तजार मे कट जाते है । इससे आगे बढें तो इंसान की सिर्फ दो दिन की कुल जिंदगी है और उन दो दिनों में एक दिन मौत का होता है, अब बचा केवल [...]
संत कबीर
September 2nd, 2008
cls कबीरदास : जीवन परिचय Kabir, the Weaver Saint of Benares काशी के इस अक्खड़, निडर एवं संत कवि का जन्म लहरतारा के पास सन् १२९७ में ज्येष्ठ पूर्णिमा को हुआ। जुलाहा परिवार में पालन पोषण हुआ, संत रामानंद के शिष्य बने और अलख जगाने लगे। कबीर सधुक्कड़ी भाषा में किसी भी सम्प्रदाय और रुढियों की [...]
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