रोग, दुख, संकट तथा आपदाओं से छुटकारा पाने के लिए प्राय: व्रत उपवास किए जाते हैं जो कि वार अनुसार अलग-अलग होते हैं। रविवार व्रत रविवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से करके 12, 30 या 54 व्रत करें। व्रत के दिन भोजन में गेहूं की रोटी, हलवा, गुड़, [...]
Archive for the ‘Religion and Philosophy’ Category
THE IMPORTANCE OF FOUR
August 17th, 2009
cls REMEMBER FOUR THINGS: a) To respect the elders b) To protect and love the young c)To take advice from the intelligent d) To never quarrel with foolish persons. FOUR THINGS SEEM WEAK INITIALLY, BUT IF NEGLECTED CAUSES SORROW: a) Fire b) disease c) debt d) sin. PRACTICE FOUR THINGS: a) Being in company of learned [...]
MONEY OR WEALTH (WHAT IT CAN BUY)
August 16th, 2009
cls Wealth can purchase a ‘bed‘ but not ‘sleep‘. Wealth can purchase ‘books‘ but not ‘knowledge‘. Wealth can purchase ‘foodstuffs‘ but not the power of ‘digestion‘. Wealth can purchase ‘medicines‘ but not ‘health‘. Wealth can purchase a ‘house‘ but not a ‘home‘. Wealth can purchase ‘luxuries‘ but not ‘civilization‘. Wealth can purchase ‘pleasures‘ but not ‘happiness‘. [...]
शोक के प्रसंग में यह निश्चय करो
July 16th, 2009
cls शोक के प्रसंग में यह निश्चय करो कि मेरे लिये कभी शोक का प्रसंग नहीं आ सकता। प्रकृति जादूभरी और परिवर्तनशील है। इसमें पैदा होने और नष्ट होने का खेल सदा होता ही रहता है। रूप बदलता है, मूल वस्तु कभी नष्ट नहीं होती, फिर मैं शोक क्यों करुं? अथवा यह निश्चय करो कि मेरे [...]
बुरे संग से सदा दूर रहो
July 14th, 2009
cls बुरे संग से सदा दूर रहो। बुरी जगह , बुरा अन्न, बुरा ग्रन्थ, बुरा दृश्य, बुरी बात, बुरा वातावरण ये सभी बुरे संग हैं। जब लगातार के बुरे संग से बुरे परमाणुओं के द्वारा अन्दर के अच्छे परमाणु दब जाते है तब बुरी बाते स्वाभाविक ही अच्छी मालूम होने लगती है। जैसा मन होता है [...]
सत्संग उसका प्रभाव और महिमा
October 30th, 2008
cls जिन विषयों से हमारे अन्तःकरण में स्थित दुष्ट विचारों का नाश हो और सद्विचार पैदा हो तथा मन भगवान में लगने लगे, ऐसे विषय सत्सवरुप परमात्मा के साथ हमारा सम्बन्ध कराने वाले होने से सत् है और उनका संग सत्संग है। इसलिये जहां तक बन सके देखने- सुनने, चर्चा करने, खाने पीने, पढने लिखने के [...]
कर्मकाण्ड व गणपति
August 30th, 2008
cls लम्बोदर के प्रमुख चतुर्वर्ण हैं। सर्वत्र पूज्य सिंदूर वर्ण के हैं। इनका स्वरूप व फल सभी प्रकार के शुभ व मंगल भक्तों को प्रदान करने वाला है। नीलवर्ण उच्छिष्ट गणपति का रूप तांत्रिक क्रिया से संबंधित है। शांति और पुष्टि के लिए श्वेत वर्ण गणपति की आराधना करना चाहिए। शत्रु के नाश व विघ्नों को [...]
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