Archive for the ‘Religion and Philosophy’ Category

व्रत कब एवं कैसे करें

रोग, दुख, संकट तथा आपदाओं से छुटकारा पाने के लिए प्राय: व्रत उपवास किए जाते हैं जो कि वार अनुसार अलग-अलग होते हैं। रविवार व्रत रविवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से करके 12, 30 या 54 व्रत करें। व्रत के दिन भोजन में गेहूं की रोटी, हलवा, गुड़, [...]

THE IMPORTANCE OF FOUR

REMEMBER FOUR THINGS: a) To respect the elders b) To protect and love the young c)To take advice from the intelligent d) To never quarrel with foolish persons. FOUR THINGS SEEM WEAK INITIALLY, BUT IF NEGLECTED CAUSES SORROW: a) Fire    b) disease    c) debt    d) sin. PRACTICE FOUR THINGS: a) Being in company of learned [...]

MONEY OR WEALTH (WHAT IT CAN BUY)

Wealth can purchase a ‘bed‘ but not ‘sleep‘. Wealth can purchase ‘books‘ but not ‘knowledge‘. Wealth can purchase ‘foodstuffs‘ but not the power of ‘digestion‘. Wealth can purchase ‘medicines‘ but not ‘health‘. Wealth can purchase a ‘house‘ but not a ‘home‘. Wealth can purchase ‘luxuries‘ but not ‘civilization‘. Wealth can purchase ‘pleasures‘ but not ‘happiness‘. [...]

शोक के प्रसंग में यह निश्चय करो

शोक के प्रसंग में यह निश्चय करो कि मेरे लिये कभी शोक का प्रसंग नहीं आ सकता। प्रकृति जादूभरी और परिवर्तनशील है। इसमें पैदा होने और नष्ट होने का खेल सदा होता ही रहता है। रूप बदलता है, मूल वस्तु कभी नष्ट नहीं होती, फिर मैं शोक क्यों करुं? अथवा यह निश्चय करो कि मेरे [...]

बुरे संग से सदा दूर रहो

बुरे संग से सदा दूर रहो। बुरी जगह , बुरा अन्न, बुरा ग्रन्थ, बुरा दृश्य, बुरी बात, बुरा वातावरण ये सभी बुरे संग हैं। जब लगातार के बुरे संग से बुरे परमाणुओं के द्वारा अन्दर के अच्छे परमाणु दब जाते है तब बुरी बाते स्वाभाविक ही अच्छी मालूम होने लगती है। जैसा मन होता है [...]

अहंकार से मुक्ति

विद्वता और तेजस्विता के लिए प्रसिद्ध अंगिरा ऋषि के मार्गदर्शन में उनके अनेक शिष्य ज्ञान प्राप्त कर अपना जीवन सफल बनाने की साधना करते थे। उनके एक अत्यंत प्रतिभावान शिष्य उदयन से ऋषि अत्यंत स्नेह रखते थे। एक बार ऋषि ने महसूस किया कि उदयन के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है। उसमें न सिर्फ [...]

सत्संग उसका प्रभाव और महिमा

जिन विषयों से हमारे अन्तःकरण में स्थित दुष्ट विचारों का नाश हो और सद्विचार पैदा हो तथा मन भगवान में लगने लगे, ऐसे विषय सत्सवरुप परमात्मा के साथ हमारा सम्बन्ध कराने वाले होने से सत् है और उनका संग सत्संग है। इसलिये जहां तक बन सके देखने- सुनने, चर्चा करने, खाने पीने, पढने लिखने के [...]

कर्मकाण्ड व गणपति

लम्बोदर के प्रमुख चतुर्वर्ण हैं। सर्वत्र पूज्य सिंदूर वर्ण के हैं। इनका स्वरूप व फल सभी प्रकार के शुभ व मंगल भक्तों को प्रदान करने वाला है। नीलवर्ण उच्छिष्ट गणपति का रूप तांत्रिक क्रिया से संबंधित है। शांति और पुष्टि के लिए श्वेत वर्ण गणपति की आराधना करना चाहिए। शत्रु के नाश व विघ्नों को [...]

भगवान दर्शन

Radha Krishna

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