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Archive for the ‘Science and Technology’ Category


What is MP3

Posted by cls On May - 2 - 2009

MPEG layer 3 is a type of audio codec where processed by significant compression from the original audio source with very little loss in sound quality.

The compression up to 12:1 produces a very little degradation. Tighter compression can be achieved, but it will effect in sound degradation results.To obtain certain compression, we must adjust the bit rates. The standart bit rates (near cd quality result) is 128 or 112 kbit/s. Many people claim that low-rate MPEG layer 3 files sound better than Real Audio files with similar bit rates.

The advantage of MP3 is that it can be broken up into pieces, and each piece is still playable. The feature that makes this possible (headerless file format) also means that MP3 files can be made to stream across the net real-time (assuming the playback bitrate and speed of the Internet connection are compatible).
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Wireless Power for Gadgets

Posted by cls On January - 14 - 2009

वायरलेस पावर

आने वाला वक्त वायरलेस पावर का है, अब आपको न सिर्फ तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी बल्कि बैटरी या चार्जर साथ रखने का झंझट भी नहीं रहेगा। इलेक्ट्रिसिटी हॉट स्पॉट के दायरे में दाखिल होते ही आपका सेलफोन जेब में ही चार्ज होने लगेगा, बिना आपको खबर लगे।

यह सब मुमकिन होगा वायरलेस पावर से, जिसमें बिजली हवा के जरिए लैपटॉप, आई पॉड या दूसरे गैजिट्स तक पहुंचेगी। लैस वेगस में इस सप्ताह आयोजित दुनिया के सबसे बड़े गैजिट ट्रेड शो इंटरनैशनल कंस्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो में इस तकनीक से लैस कुछ गैजट्स शोकेस किए गए। भविष्य की बानगी पेश करते इन उपकरणों में बिना तार या सॉकेट वाली लाइटिंग, ऑडियो स्पीकर और डिजिटल पिक्चर फ्रेम आदि शामिल हैं।



वायरलेस वर्ल्ड का आगाज :

एक्सपर्ट्स इसे वायरलेस वर्ल्ड की महज शुरुआत मानते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह वाई-फाई ने इंटरनेट को बदला, उसी तरह वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी यानी वाई ट्राइसिटी बैटरी लाइफ को बदल सकती है। बिना तार की दुनिया में कैफे या एयरपोर्ट टर्मिनलों में लैपटॉप यूजर्स इलेक्ट्रिसिटी हॉट स्पॉट के दायरे में होंगे। उन्हें ऊंचाई पर लगे किसी सॉकिट तक पहुंचने के लिए फर्नीचर का जुगाड़ नहीं करना पड़ेगा।

वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी का दायरा :
एक गैजिट्स वेबसाइट के एडिटर के मुताबिक, तब आपको किसी गैजिट को चार्ज करने या कंप्यूटर को रखने के लिए अलग से मेज नहीं खरीदनी पड़ेगी। अगर सभी कमरों में वायरलेस पावर हुई तो कमरे में दाखिल होते ही आपका मोबाइल चार्ज होने लगेगा। तब आपकी चार्जर की तलाश खत्म हो जाएगी।

लेसर इलेक्ट्रिसिटी :
इलेक्ट्रॉनिक्स शो में पावर बीम नाम के गैजिट को भी पेश किया गया। यह बिजली को अदृश्य लेसर में तब्दील कर उसे कमरे में किसी सोलर सेल पर छोड़ता है। सोलर सेल इसे वापस इलेक्ट्रिसिटी में बदल देता है। पावर बीम के को-फाउंडर डेविड ग्राहम का कहना था कि हम डिक्शनरी से रीचार्ज शब्द को ही हटा देना चाहते हैं। अभी आपका जो सेलफोन चार्ज होने के लिए दिन भर डेस्क पर पड़ा रहता है, कुछ समय बाद आपको ऐसा नहीं करना पड़ेगा।’

पावर ऑफ बीम :
सिलिकन वैली की इस कंपनी का उपकरण लेसर की मदद से 10 मीटर दूर मौजूद सोलर सेल से 1.5 वॉट बिजली पैदा कर सकती है। इतनी बिजली एक इलेक्ट्रॉनिक स्पीकर या छोटे एलईडी बल्ब को रोशन करने के लिए काफी है। हालांकि, इतनी बिजली से लैपटॉप को नहीं चलाया जा सकता। हालांकि कंपनी का दावा है कि इसे अपग्रेड किया जा सकता है और इससे सेहत को भी कोई नुकसान नहीं होगा।

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प्रलय नहीं, सृजन की ओर बढ़ा पहला कदम
11 Sep 2008,

ब्रह्मांड बनने की गुत्थी सुलझाने के लिए अब तक का सबसे महत्वपूर्ण , सबसे खर्चीला और सबसे बड़ा भौतिक प्रयोग सफलतापूर्वक शुरू हो गया। फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सीमा पर स्थित सीईआरएन लैब में बुधवार को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 9: 30 बजे दुनिया भर के लगभग 9 हजार वैज्ञानिकों ने यह महाप्रयोग शुरू किया। इन वैज्ञानिकों में लगभग 200 भारतीय मूल के हैं। Read the rest of this entry »

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