एक अजनबी मुसाफिर किसी गाँव में पहुँचा। गाँव में दाखिल होते ही उसे कुछ लोग मिल गए। एक बुजुर्ग को संबोधित करते हुए उसने पूछा, ‘‘इस गाँव के लोग कैसे हैं ? क्या वे अच्छे और मददगार हैं ?’’ Read the rest of this entry »
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एक अजनबी मुसाफिर किसी गाँव में पहुँचा। गाँव में दाखिल होते ही उसे कुछ लोग मिल गए। एक बुजुर्ग को संबोधित करते हुए उसने पूछा, ‘‘इस गाँव के लोग कैसे हैं ? क्या वे अच्छे और मददगार हैं ?’’ Read the rest of this entry »
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साधना और साध्य का अंतर समझने के लिए गौतम बुद्ध एक कथा कहते थे। यह कथा वे अपने शिष्यों को अनेक बार सुनाते थे- Read the rest of this entry »
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भुवननगर में एक राजा राज करता था। उसके भवन के शयनकक्ष में एक जूँ रहती थी। वह नियमित रुप से राजा का रक्तपान कर सुखपूर्वक जीवन- यापन करती थी। एक दिन कहीं से एक खटमल राजा के शयनकक्ष में आ गया। खटमल को देखकर जूँ निराश हो गयी। Read the rest of this entry »
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दो भाईयो की दुकान एक ही बजार मे थी, ओर थी भी बिलकुल आमने सामने,ओर दोनो भाई बेचते भी एक ही तरह का समान थे, दोनो की दुकाने भी भगवान की दया से चलती भी खुब थी,पेसो की कमी भी दोनो को नही थी, लेकिन इस के वावजुद दोनो भाईयो की सेहत दिन पर दिन गिरती जाती थी,बहुत दवा दारु किया,झाड पुछ भी करवाया,पुजा पाठ यानि सब कुछ करवाया लेकिन दोनो भाईयो की सेहत मे कोई भी फ़र्क नही आया, थक हार कर अब दोनो भाई जादु टोनो बालो के पास भी गये लेकिन बात फ़िर भी ना बनी,ओर दोनो भाई यह सोच कर बेठ गये कि कोई लाईलाज बिमारी लग गई हे.समय बीतता रहा, एक दिन एक रिश्तेदार जब उन्हे मिलने आया तो दोनो भाईयो को देख कर हेरान हुया, फ़िर दो चार दिन उन के साथ रहा ओर जाने से पहले बोला मेरे पास एक ईलाज हे आप दोनो की बिमारी का, लेकिन थोडा कठिन हे,दोनो भाई सुन कर खुश हुये ओर बोले बताओ हम सब कुछ करने को तेयार हे, तो उस रिशते दार ने कहा ईलाज शुरु करने से पहले आप दोनो को अपना स्थान बदलना पडेगा,दोनो भाई कुछ समझ नही सके तो, रिशतेदार बोला तुम दोनो भाई एक महीने तक अपनी दुकान मे मत जाना, बल्कि एक महीना दुसरे की दुकान इमान्दारी से समभालाना, उस के बाद तुम्हारा ईलाज करुगा,दुसरे दिन से ही भाई एक दुसरे की दुकान सम्भालने लगे।
एक महीने के बाद जब वह रिश्तेदार इन से मिलने आया तो दोनो भाई काफ़ी स्वस्थ दिख रहे थे,ओर काफ़ी खुश भी थे, तब रिश्तेदार ने कहा की आप दोनो को कोई भी बिमारी नही बस तुम दोनो मे ईर्ष्या थी,जब तुम अपनी अपनी दुकान पर बेठे दुसरे की दुकान मे ग्राहक को जाते देखते थे तो जलते थे, ओर यह बात मेने दो दिन तुम्हारे साथ रह कर देखी थी, ओर उसी ईर्ष्या से तुम अपना ही नुकसान करते थे, अब तुम दुसरे की दुकान पर बेठ कर अपनी दुकान मे जाते ग्राहक देख कर खुश होते हो, यही तुम्हारे स्वस्थ होने का राज हे।
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