Archive for the ‘Shri Ramcharitmanas’ Category

Ramanand Sagar’s Ramayan (1986) – All Episodes

Overview : Ramayan is a highly successful Indian television series created, written, and directed by Ramanand Sagar. The 78-episode series originally aired weekly on Doordarshan from January 25, 1987, to July 31, 1988, on Sundays at 9:30 a.m. IST. During its original broadcast, Ramayan was enormously popular, drawing over 100 million viewers. Its popularity reached [...]

श्री राम गुणगान की महिमा

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड श्री राम गुणगान की महिमा निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।यह चरित कलि मल हर जथामति दास तुलसी गायऊ॥सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना।तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना॥ सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु [...]

समुद्र पर श्री रामजी का क्रोध

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड समुद्र पर श्री रामजी का क्रोध बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥५७॥ लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥१॥ ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी [...]

दूत का रावण को समझाना

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड दूत का रावण को समझाना की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर।कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर ॥५३॥ नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें॥मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा। जातहिं राम तिलक तेहि सारा॥१॥ रावन दूत हमहि सुनि [...]

समुद्र पार करने के लिए विचार

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड समुद्र पार करने के लिए विचार सुनु कपीस लंकापति बीरा। केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा॥संकुल मकर उरग झष जाती। अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥३॥ कह लंकेस सुनहु रघुनायक। कोटि सिंधु सोषक तव सायक॥जद्यपि तदपि नीति असि गाई। बिनय करिअ सागर सन जाई॥४॥ प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय [...]

विभीषण का भगवान्‌ श्री रामजी की शरण में जाना

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड विभीषण का भगवान्‌ श्री रामजी की शरण में जाना रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि।मैं रघुबीर सरन अब जाउँ देहु जनि खोरि॥४१॥ अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयू हीन भए सब तबहीं॥साधु अवग्या तुरत भवानी। कर कल्यान अखिल कै हानी॥१॥ रावन जबहिं बिभीषन त्यागा। भयउ बिभव बिनु तबहिं [...]

रावण को विभीषण का समझाना

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड रावण को विभीषण का समझाना सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आसराज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥३७॥ सोइ रावन कहुँ बनी सहाई। अस्तुति करहिं सुनाइ सुनाई॥अवसर जानि बिभीषनु आवा। भ्राता चरन सीसु तेहिं नावा॥१॥ पुनि सिरु नाइ बैठ निज आसन। बोला बचन पाइ अनुसासन॥जौ [...]

मंदोदरी-रावण संवाद

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड मंदोदरी-रावण संवाद उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब तें जारि गयउ कपि लंका॥निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा।१॥ जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई॥दूतिन्ह सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी॥२॥ रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन [...]

श्री रामजी का समुद्र तट पर पहुँचना

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड श्री रामजी का समुद्र तट पर पहुँचना कपिपति बेगि बोलाए आए जूथप जूथ।नाना बरन अतुल बल बानर भालु बरूथ॥३४॥ प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा। गर्जहिं भालु महाबल कीसा॥देखी राम सकल कपि सेना। चितइ कृपा करि राजिव नैना॥१॥ राम कृपा बल पाइ कपिंदा। भए पच्छजुत मनहुँ गिरिंदा॥हरषि राम तब [...]

श्री राम-हनुमान्‌ संवाद

श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित श्री रामचरितमानस सुंदरकाण्ड श्री राम-हनुमान्‌ संवाद चलत महाधुनि गर्जेसि भारी। गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी॥नाघि सिंधु एहि पारहि आवा। सबद किलिकिला कपिन्ह सुनावा॥१॥ हरषे सब बिलोकि हनुमाना। नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना॥मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा। कीन्हेसि रामचंद्र कर काजा॥२॥ मिले सकल अति भए सुखारी। तलफत मीन पाव जिमि बारी॥चले हरषि [...]

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