Saas Bahu Aur Sensex
सास , बहू और सेंसेक्स

कलाकार :
फारुख शेख , किरण खेर , तनुश्री दत्ता ,
डाइरेक्टर :
शोना उर्वशी
रेटिंग :
**
इस फिल्म में शेयर मार्किट के साथ महिलाओं को जोड़ने की कोशिश तो की गई , लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और लचर निर्देशन के चलते कहानी कई जगह पर दम तोड़ती है। हमारे यहां आज भी ज्यादातर महिलाएं शेयर मार्किट से खुद को दूर रखती हैं। फिल्म देखकर तो यही लगता है कि महिलाएं भी शेयर मार्किट की अच्छी खासी जानकारी रखती हैं और अपनी बचत का एक हिस्सा इस मार्किट में लगाने लगी हैं।

लगता है , फिल्म की डाइरेक्टर शोना चाहती हैं कि शेयर मार्किट में महिलाएं भी आएं। फिल्म मासूमी से शुरू होती है। कविता और नाटक लिखने की शौकीन मासूमी पिछले कई सालों से शेयर मार्किट में अपनी किस्मत आजमा रही है। मासूमी लंबी अवधि की योजनाओं में पैसा लगाना पसंद करती है। वहीं दूसरी और टीवी स्टार शेरोन प्रभाकर छोटी अवधि की योजनाओं में पैसा लगाती है , उसे वायदा कारोबार पर बहुत भरोसा है। शेयर मार्किट में ईमानदार शेयर ब्रोकर के तौर अपनी पहचान बना चुके फिरोज सेठ को भले ही महिलाओं का इस मार्किट में आना पसंद नहीं , लेकिन जब कोई महिला उनके पास कोई भी जानकारी लेने आती है , तो वह हमेशा अच्छी और फायदेमंद सलाह देते हैं।
एक सोसायटी की करीब आधा दर्जन महिलाओं के आसपास घूमती यह कहानी कई जगह दम तोड़ती है। खासकर फिल्म में हर थोड़ी देर बाद एक शेयर मार्किट से जुड़े चैनल को देखकर यही लगता है , जैसे निर्माता को इस चैनल को प्रमोट करने में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी है। करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद बिग स्क्रीन पर नजर आए फारुख शेख इस फिल्म में एक पारसी शेयर ब्रोकर की भूमिका में खूब जमे हैं , वहीं किरण खेर बार – बार हीरो या हीरोइन की मम्मी की भूमिकाएं करते – करते टाइप्ड हो गई हैं। तनुश्री दत्ता , मासूमी , अंकुर खन्ना के लिए इस फिल्म में करने को कुछ नहीं था। हां निर्माता की इस बात के लिए तारीफ की जा सकती है कि शेयर मार्किट पर एक ऐसी फिल्म बनाई है , जिसमें मध्यम वर्गीय परिवार की महिलाओं को सेंसेक्स से जोड़ा गया है।
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सास, बहू और सेंसेक्सः सेंसेक्स का चक्कर
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