फिल्मः- वेल्कम टू सज्जनपुर
निर्देशकः- श्याम बेनेगल
कलाकारः- श्रेयस तलपडे, अमृता राव, यशपाल शर्मा, राजेश्वरी, ईला अरुण, दिव्या दत्ता आदि।
रेटिंग: ***
कई सालों पहले मशहूर टेलीविजन धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ ने दर्शकों के दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी थी। श्याम बेनेगल की फिल्म ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ भी इसी धारावाहिक के जमाने की यादें ताजा करती हैं। इसमें कुछ ऐसे कलाकार है, जो जाने-अनजाने ही आपको परिचित लग सकते हैं।

कुछ किरदार तो ऐसे हैं जो आपसे गंभीर रूप से जुड़े हुए हैं, जैसे-एक सत्ता का भूखा ठग, एक नपुंसक, एक गर्म दिमाग वाला सेना का सिपाही और उसकी विधवा बहू, एक कम्पाउंडर, एक गृहिणी जिसका पति मुम्बई में काम करता है, और पिछले चार से दीवाली के मौके पर घर नहीं आया वगैरह।
‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ बेहतरीन निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की निर्देशन-परिपाटी पर ही आधारित फिल्म है। पूरे फिल्म में कई भावुक दृश्यों और नाटकीय परिदृश्यों के बावजूद यह कहीं से भी आपके दिमाग को भारी नहीं बनाती।
‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ फिल्म सादगी से भरी है, इसमें पटकथा से ज्यादा महत्व किरदारों को दिया गया है, और यही वजह है कि पूरे फिल्म में आपकी दिलचस्पी बनी रहेगी।
इस फिल्म को इसकी सीधी-सादी कहानी के लिए ही देखा जाना चाहिए। इस फिल्म में कहानी के जरिए ही श्याम बेनेगल जैसे मंजे हुए निर्देशक ने न जाने कितना कुछ कह दिया है।
महादेव (श्रेयस तलपडे) सज्जनपुर में पढ़े-लिखे व्यक्तियों में से एक है। वह एक उपन्यासकार बनना चाहता है, लेकिन उसे अपनी आजीविका कमाने के लिए एक मजेदार काम मिल जाता है। वह डाकघर के बाहर बैठकर लोगों की चिठ्ठियां लिखने और पढ़ने का काम शुरु कर देता है।
महादेव (श्रेयस तलपडे) की समझ-बूझकर चिठ्ठी लिखने की कला उसे सज्जनपुर में रहने वाले ज्यादातर अनपढ़ लोगों के बीच मशहूर कर देती है।
श्याम बेनेगल भले ही अपने गहन सोच रखने वाली समानांतर फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हों, लेकिन जब आप ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ देखेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि उन्हें हल्की-फुल्की मनोरंजन प्रधान फिल्में बनाने में भी महारत हासिल है।
इस फिल्म में श्रेयस का किरदार और उसका अलग-अलग लोगों के साथ बातचीत का तरीका पूरे परिदृश्य को काफी मजेदार बना देता है। फिल्म ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ के एक दृश्य जहां एक गुंडा (यशपाल शर्मा) जो राजनेता बनने का ख्वाब देखता है और एक गांव की पुराने ख्यालात वाली महिला (ईला अरुण) के दृश्य देखने योग्य हैं।
महादेव (श्रेयस तलपडे) के कुछ रोमांस वाले दृश्य जहां वो अपने बचपन की प्रेमिका (अमृता राव) को याद (हालांकि उसके बचपन की प्रेमिका का विवाह किसी और के साथ हो जाता है) करना काफी मजेदार बन पड़ा है।
फिल्म के दूसरे भाग में कहानी में मोड़ और अचानक तेजी से बदलने वाले परिदृश्य ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ को सबसे ज्यादा मजेदार बनाते हैं। इस फिल्म का अंत भी काफी दिलचस्प बन पड़ा है।
हालांकि फिल्म में जरुरत के बिना घुसाए गए गाने फिल्म के स्वाद को फीका करते नजर आते हैं। देखा जाए तो ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ में गानों की जरुरत ही नहीं थी। फिल्म में कहानी को भी थोड़ा जरुरत से ज्यादा लम्बा खींचा गया है।
फिल्म ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ में सभी कलाकारों ने बहेतरीन अभिनय किया है। इसमें सबसे अधिक श्रेय अभिनेता श्रेयस तलपडे को जाता है। फिल्म ‘इक़बाल’ के बाद ये उनका सबसे बेहतरीन अभिनय कहा जा सकता है। अमृता राव का अभिनय भी सराहनीय है।
दूसरे अभिनेताओं का अभिनय जैसे यशपाल शर्मा (बेजोड़), ईला अरुण का बेहतरीन, दिव्या दत्ता का दमदार, रवि किशन का अभिनय लाजवाब, राजेश्वरी (उम्दा) और रवि झंकाल का अभिनय शानदार बन पड़ा है। कुणाल कपूर की मौजूदगी सिनेप्रेमियों को थोड़ा चौंकाएगी।
कुल मिलाकर, फिल्म ‘वेल्कम टू सज्जनपुर’ देखने लायक है। बॉक्स ऑफिस के नजरिए से भी यह फिल्म तारीफ के काबिल होने की वजह से बेहतरीन प्रदर्शन करेगी।
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