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विज्ञापन उद्योग : एक शानदार विकल्प

Posted by cls On October - 15 - 2008

अखबार, टीवी, फिल्म, रेडियो, दीवारों और न जाने कहां-कहां, हर जगह ऐडवर्टाइजमंट का ही बोलबाला है। मीडिया, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो या प्रिंट सभी विज्ञापन के दम पर ही टिके हुए हैं।

अगर आपके पास भी कुछ विशेष है, अलग आइडिया है तो यह इंडस्ट्री आपका इंतजार कर रही है। एक छोटा सा कोर्स कर लें, बेहतर कल के हकदार होंगे।

जबर्दस्त उछाल

साल 1992 में जहां यह उद्योग मात्र 1800 करोड़ रुपये का था, वहीं पिछले दस सालों में यह लंबी छलांग लगा चुका है। अब यह लगभग 20 हजार करोड़ से भी अधिक का हो चुका है। ऐसे में इसकी वृद्घि का अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले कुछ सालों से यह 20 फीसदी प्रतिवर्ष से अधिक का ग्रोथ रेट बनाए हुए है। वहीं जानकार आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी की संभावना बता रहें हैं। ऐसे में उन छात्रों के लिए भरपूर संभावना है, जो कुछ अलग करना चाहते हैं।

आज भारतीय विज्ञापन उद्योग दुनिया के किसी भी देश की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री से तुलना कर सकती है। यह बराबरी केवल धन के मामले में ही नहीं है, बल्कि तकनीक और गुणवत्ता में भी की जा सकती है। इस क्षेत्र के बहुमुखी विकास ने ही इसमें कई विकल्प एक साथ खोले हैं। कला लेखन, संवाद लेखन, निर्देशन और निर्माण। कोई भी छात्र इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकता है।

इसमें अधिक सफल होने के लिए सैद्घांतिक ज्ञान के अलावा मेहनत भी चाहिए। इसके लिये आपको कई दिनों तक लगातार काम करना पड़े। ऐसे में काम का दबाव बहुत अधिक हो सकता है। हकीकत यह है कि इतना तनाव होने के बाद भी इसकी नौकरी का अपना अलग मजा है, जिसे हर कोई नहीं समझ सकता।

योग्यता

यूं तो विज्ञापन उद्योग में प्रवेश के लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं है। बारहवीं उत्तीर्ण छात्र इसका कोर्स कर सकते हैं। वहीं कुछ संस्थानों में ऐडमिशन के लिए ग्रेजुएट की मांग होती है। देश के कई सरकारी और निजी इंस्टिट्यूट में इसके कोर्स कराए जा रहे हैं। विज्ञापन उद्योग का क्षेत्र काफी विशाल है। इसमें कई सेक्शन हैं, अपनी पसंद के अनुसार चयन कर सकते हैं। अकाउंट प्लानिंग, मीडिया प्लानिंग, क्रिएटिव, क्लाइंट सर्विसिन्ग, आर्ट डिपार्टमेंट, मार्केट रिसर्च, कॉपी डिपार्टमेंट, विजुअलाइजर्स, फोटोग्राफर्स आदि।

अकाउंट प्लानिंग

यह काफी महत्वपूर्ण विभाग है। किसी कंपनी का कितना धन विज्ञापन पर व्यय होगा, कौन सा माध्यम या मीडिया फायदेमंद हो सकती है, इन सभी बातों का निर्णय प्लानिंग वाले क्रिएटिव टीम के साथ मिलकर लेते हैं।

मीडिया प्लानिंग

मीडिया से संबंधित काम मीडिया प्लानर्स का होता है। अपने लक्षित ग्राहकों तक बात पहुंचाने के लिए मीडिया का कौन सा माध्यम सबसे उपयुक्त होगा। यह निर्णय इनका ही होता है। पर इसके लिए ये लोग अकाउंट प्लानर और क्रिएटिव के साथ मिलकर निर्णय लेते हैं। ये विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों को भी सलाह देते हैं। ये समाचार पत्र और मैगजीन में किस पेज पर ऐडवर्टाइजिंग करवाना है, बताते हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कौन सा चैनल और कार्यक्रम सही होगा, इसका निर्णय भी करते हैं।

क्रिएटिव

इसकी टीम में कॉपी राइटर्स और आर्ट डाइरेक्टर्स होते हैं। कॉपी राइटर्स पंच लाइन लिखते हैं। मसलन, लेट्स लर्न टू टीच इंडिया, कर लो दुनिया मुट्ठी में, बड़ा है तो बेहतर है, कनेक्टिंग पीपल, मनोरंजन का बाप, आदि। वहीं आर्ट डाइररेक्टर विजुअल पर कार्य करते हैं। यह एक सच्चाई है कि इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट के विज्ञापन का इंपेक्ट अधिक से अधिक लोगों पर हो इसके लिए पंच लाइन और दृश्यों में सामंजस्य होना जरूरी है।

क्लाइंट सर्विसिन्ग

इनका कार्य क्लाइंट और क्रिएटिव के बीच पुल का होता है। क्लाइंट को किस तरह का विज्ञापन चाहिए और उसको अधिक से अधिक फायदा कहां पर मिलेगा। यह बताने का कार्य इन्हीं का होता है। इसके लिए ये क्रिएटिव के साथ मिलकर योजना बनाते हैं। इस जॉब में सफल होने के लिए बेहतर कम्यूनिकेशन स्किल का होना भी जरूरी है।

अगर हिंदी के साथ अंग्रेजी पर भी पकड़ हो तो सोने पर सुहागा है। यह एक हकीकत है कि क्लाइंट सर्विसिन्ग का कार्य करते हुए आपको देश और विदेश के विभिन्न लोगों से मिलना पड़ता है। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि सामने वाला हिंदी जानता हो। जिन लोगों को मार्केट रिसर्च में दिलचस्पी है, उनके लिए भी जॉब उपलब्ध हैं।

वेतन

जहां तक वेतन की बात है, तो यह आपके कार्य और अनुभव के अनुसार निर्धारित होगा। फिर भी आप विज्ञापन उद्योग में बिल्कुल नए हैं, तो 20 हजार रुपये प्रतिमाह से कम नहीं होना चाहिए। यह राशि अनुभव के साथ ही बढ़ती जाएगी।

संभावना

विज्ञापन उद्योग में हर साल 20 प्रतिशत के हिसाब से वृद्घि हो रही है। पिछले डेढ़ दशक में यह कई गुणा बढ़ चुका है। वहीं आने वाले समय में इसकी रफ्तार अधिक होने की संभावना है। वैसे भी जब आप किसी अच्छे संस्थान से विज्ञापन का कोर्स कर लेते हैं, तो इंटरव्यू के समय आपका पक्ष मजबूत हो जाता है। विशेषकर तब, जब आपके पास कोई खास अनुभव नहीं हो।

इस उद्योग में जॉब दोनों तरह की कंपनियों में उपलब्ध रहता है। पहली कंपनी वह जो अपना ब्रैंड चलाने के लिए विज्ञापन करना चाहती है और दूसरी वह जो इसमें मदद करती है। अगर काम को पूर्ण करने का जुनून हो तो जल्द से जल्द सफलता मिलना आसान हो जाता है। देश के कई संस्थान इसका कोर्स करा रहें हैं।

कुछ मुख्य संस्थान

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन, नई दिल्ली
www.iimc.nic.in
नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवरटाइजिंग, नई दिल्ली
www.niaindia.org
जी इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव आर्ट्स, मुंबई, महाराष्ट्र
www.zica.org
एमिटी स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
www.amity.edu
सिंबायोसिस इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन
www.simc.edu

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One Response to “विज्ञापन उद्योग : एक शानदार विकल्प”

  1. Blogger says:

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