पहला आ॓लंपिक : पहला विजेता
पहले आ॓लंपिक खेल का आयोजन आज से ठीक 2784 साल पहले यानी 776 ईसा-पूर्व में जून और जुलाई के बीच पड़ने वाली पूर्णिमा को हुआ था। उस दौर में आ॓लंपिक में सिर्फ एक प्रतियोगिता ही थी–200 गज की दौड़। इसे यूनानी भाषा में ‘स्टेडो’ कहा जाता था। इसी शब्द से स्टेडियम की उत्पत्ति हुई, जिसका अर्थ है-खेलकूद का मैदान।
स्टेडो खेल स्टेडियम के भीतर रेतीले ट्रैक पर होता था। दौड़ में भाग लेने वाले प्रतियोगियों को नंगे दौड़ना पड़ता था। यह मुकाबला जिस स्टेडियम में होता था, उसकी लंबाई करीब 265 गज और चौड़ाई 35 गज के आसपास थी। यह स्टेडियम यूनान के सबसे खूबसूरत शहर आ॓लंपिया में था। स्टेडियम से कुछ ही दूर अलफ्यूज नदी बहती थी।
उस दौर में आ॓लंपिक खेलों में केवल यूनानी ही भाग ले सकता था। फिर यह भी जरूरी था कि वह आजाद नागरिक हो। गुलामों को इस खेल में भाग लेने की सख्त मनाही थी। आ॓लंपिक खेलों का पहला विजेता कोरोबस भी आजाद नागरिक था। वह आ॓लंपिया के निकटवर्ती शहर इलिस का रहने वाला था। वह रसोइये का कार्य करता था।
जिस समय उसने आ॓लंपिक की रेस जीती, स्टेडियम में करीब 45 हजार लोग मौजूद थे। जीतने पर ज्यूस मंदिर के पवित्र कुंजों में लगे जैतून के वृक्षों की टहनियों व पत्तों से बना मुकुट पहना कर उसका स्वागत किया गया। कोरोबस को राज्य द्वारा जीवनभर विशेष सुविधा प्रदान की गई। ऐसी सुविधा वहां बाद के विजेताओं को भी मिली, क्योंकि ऐसा माना जाता था कि आ॓लंपिक जीतने वाले पर देवताओं की विशेष कृपा रहती थी। खास कर ज्यूस देवता की। आ॓लंपिक की शुरूआत इसी ज्यूस देवता द्वारा एक अन्य देवता कोनोस को हराए जाने की स्मृति में शुरू हुई।
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