कहावत है “Health is Wealth”, “तन्दुरुस्ती हजार नियामत ” । इसीलिये सेहत बरकरार रखने के लिये लोग तमाम प्रयास करते रहते है। लेकिन पते की बात यह है कि बिना किसी प्रयास और खर्च के आप ताजिन्दगी स्वस्थ रह सकते है, बस आप इन बातों पर ध्यान दे-
ताजा फल सब्जी खायें
आपका शरीर चलता फिरता यानि जीवित है तो तय है कि उसके ठीक से चलते फिरते रहने के लिये उसे भोजन भी जीवित यानी बिल्कुल ताजा चाहिये। इसलिये रोज ताजा, शाकाहारी, कच्ची और हल्की पकी चीजों के साथ जितना संभव हो ताजा फल खायें। ताजा फल और सब्जियां प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावशील और बेहतर तरीके से काम करने के लिये शक्ति देते है। आजकल बाजार में उपलब्ध फलों और सब्जियों में कैमिकल्स का उपयोग अत्यधिक होता है अतः यथासम्भव कैमिकल्स से पैदा फल-सब्जियां न खाये।
फल कैसे खाये-
फलों को भोजन के साथ नहीं लेना चाहिये। फल दूसरी चीजों की अपेक्षा तेजी से ऊर्जा में बदलते है। इन्हें अकेला खाने पर यह पेट में क्षारीय रुप में पहुंचता है। जबकि दूसरी चीजों के साथ खाने पर एसिड रुप में पहुंचता है जो ठीक से पचता नहीं और विषाक्त भी हो सकता है।
सलाद जरुर खाये
( गाजर, मूली, ककडी, टमाटर, खीरा, शलजम, कच्ची हरी सब्जियां जैसे पत्ता गोभी, मटर आदि)
अनेक शोध और अध्ययन खुलासा करते है कि पौष्टिक तत्त्वों से भरपूर सलाद कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के साथ अन्य तमाम रोगों से दूर रखता है। सलाद जैविक वस्तुयें है और इन्हें अवश्य खाये।
मांसाहार कम करे
एंटीबायोटिक्स और कृत्रिम हार्मोन्स के साथ मांसाहार और पॉल्ट्री खाद्य पदार्थ रोगों की खान है। हमारे लसिका तन्त्र (लिम्फ सिस्टम) की रचना ऐसी नहीं है जो इन्हें नियंत्रित कर सके या इन्हें बाहर निकाल सके। इसलिये यह शरीर में बढते रहते है और विषैला रसायन इकट्ठा करते है। इससे धीरे धीरे प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर हो जाता है।
डेयरी उत्पाद का प्रयोग कम करे
डेयरी उत्पाद में फायदेमन्द फाइबर और कार्बोहाइड्रेट्स नहीं होते। इनमें भरपूर फैट और कोलेस्ट्रोल पाया जाता है। इनके अधिक उपयोग से एलर्जी, अपच, मोटापा, दिल की बीमारी, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी बीमरियां हो सकती है। बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद और फास्ट फूड का प्रयोग भी कम से कम करे, ये मैदे आदि के बने होने से जल्दी नहीं पचते और बीमारियां बढाते है।
व्यायाम व प्राणायम नियमित रुप से करे
रोजाना नियमित व्यायाम व प्राणायम आपको सभी प्रकार की बीमरियों से बचाकर, अपके तन मन में चुस्ती फुर्ती और व्यक्तित्व में बदलाव लाते है।
सकारात्मक सोच रखे
जीवन में क्या सही और क्या गलत हो रहा है, यह आपकी सोच और व्यवहार पर निर्भर है। जीवन को आधे भरे गिलास की तरह देखें, आधे खाली गिलास की तरह की नहीं।
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