भारत में नकली दवाओं का कारोबार काफी पुराना है। केंद्र सरकार ने इसके खतरे को देखते हुए नकली दवाओं के बारे में बताने पर इनाम का ऐलान किया है। ‘विसल ब्लोअर’ पॉलिसी के तहत सरकार नकली दवाओं का कंसाइनमंट पकड़वाने वालों को कंसाइनमंट की कीमत का 20 फीसदी इनाम के तौर पर देगी। इनाम की रकम 25 लाख रुपये तक हो सकती है।
‘फेक’ इंडस्ट्री
- भारत में फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री 85 हजार करोड़ रुपये की है। इसमें 35 हजार करोड़ रुपये के फार्मा प्रडक्ट्स को एक्सपोर्ट किया जाता है।
- हेल्थ मिनिस्ट्री का अनुमान है कि भारत में बेचे जाने वाली करीब 5 फीसदी दवाएं नकली और .3 फीसदी मिलावटी होती हैं । देशभर में नकली दवा उद्योग के सही-सही साइज का पता लगाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये खर्च कर एक सर्वे भी कराया जा रहा है।
- साउथ ईस्ट एशिया की बात करें तो 30 फीसदी से अधिक दवाएं नकली होती हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के 2001 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बनने वाली 35 पर्सेन्ट दवाएं नकली होती हैं। इसके पांचवें हिस्से में गलत या नुकसानदायक तत्व मिलाए जाते हैं।
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत में बिकने वाली हर पांचवीं दवा नकली होती है।
सरकारी तैयारी
- नकली दवाओं का कारोबार रोकने के लिए सरकार ने 23 स्टेट और 6 सेंट्रल टेस्टिंग लैबोरेटरियों के मॉडर्नाइजेशन का काम शुरू कर दिया है।
- लैब के स्टाफ और ड्रग्स इंस्पेक्टरों को री-ओरिएंटेशन ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक कैपेसिटी बिल्डिंग इन फूड ऐंड ड्रग्स रेग्युलेशन प्रोग्राम के तहत 400 करोड़ रुपये दे रहा है।
क्या है सजा
- नकली दवाओं के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स ऐक्ट में सुधार किया गया है। इसमें शामिल होने वाले लोगों के लिए अधिकतम सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी गई है।
- इसके अलावा जुर्माने की रकम को बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है। इससे जुड़े कुछ अपराधों को गैरजमानती कैटिगरी में रखा गया है।
डेथ पेनल्टी का प्रपोजल?
- 2003 में आर. ए. मशालकर कमिटी ने नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए डेथ पेनल्टी की सिफारिश की थी। दिसंबर 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट ने इस पर सहमति भी दे दी थी, लेकिन यह प्रस्ताव संसद में पास नहीं हो सका।
बढ़ता खतरा
- एसोचैम ने अनुमान लगाया है कि नकली दवाओं के कारोबार में हर साल 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है।
- ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक को-ऑपरेशन ऐंड डिवेलपमेंट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में 75 फीसदी नकली दवाओं का ओरिजिन भारत से ही होता है।
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