ब्रेस्टफीडिंग हर बूंद जिंदगी की !
मां के गर्भ से जन्म लिए शिशु infant की पहली जरूरत है मां का दूध। सामान्य रूप से जन्म लेने वाले बच्चे को जन्म के तीन से चार घंटे बाद ही मां का दूध पिलाया जाता है। इसके बाद छह महीने तक उसे आवश्यक रूप से मां का दूध पिलाना जरूरी है। डॉक्टरों की राय में बच्चे को दूध पिलाने से बच्च और मां दोनों कई बीमारियों से बच सकते हैं।
बच्चे के विकास में मां के दूध का अहम योगदान रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशु के लिए जन्म के एक घंटे बाद ही उसे दूध पिलाना लाभकारी रहता है।

ब्रेस्टफीडिंग (breastgeading) के फायदे
मां के दूध milk से बच्चे की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
बच्चे को फायदा
नवजात शिशु infant के लिए मां का दूध पोषण का सबसे बढ़िया स्रोत है। इसमें संतुलित मात्रा में वसा, शर्करा, पानी और प्रोटीन होता है, जो बच्चे के विकास के लिए जरूरी है। लगभग सभी बच्चों को मां का दूध आसानी से पच जाता है।
मां का दूध पीने वाले बच्चे मोटापे का शिकार नहीं होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जो बच्चे मां का दूध कम पीते हैं, वे उम्र बढ़ने के साथ मोटापे का शिकार हो जाते हंै।
प्रीमेच्योर बेबीज को मां का दूध पिलाना ही बेहतर होता है। इनको जितना अधिक मां का दूध पीने को मिलता है, ये उतनी जल्दी रिकवर करते हैं।
मां का दूध पीनेवाले बच्चों का आईक्यू अपेक्षाकृत अच्छा होता है।
मां को फायदा
ब्रेस्टफीडिंग या नर्सिग nursing के जरिए महिलाएं गर्भावस्था के दौरान शरीर पर चढ़ी अतिरिक्त चर्बी कम कर सकती हैं। ब्रेस्टफीडिंग से बच्चेदानी (यूट्रस uterus) भी अपने वास्तविक आकार में आ जाती है।
एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग exclusive breastfeading के जरिए मासिक चक्र को सामान्य किया जा सकता है।
मेनोपॉज के बाद होने वाले ऑस्टिया पोरोसिस, आर्थराइटिस का खतरा भी कम करता है।
ब्रेस्टफीडिंग के जरिए मां और उसके बच्चे के बीच अटूट रिश्ता कायम होता है। डॉक्टर मानते हैं कि जन्म लेने वाले शिशु के लिए मां का स्पर्श बहुत कारगर होता है।
ब्रेस्टफीडिंग न कराने का सेहत पर प्रभाव
ब्रेस्ट मिल्क में एंटीबॉडीज antibodies एजेंट agent भी पाए जाते हैं, जो बच्चे को बैक्टीरिया bacteria और वायरस virus से बचाते हैं। हाल ही में हुए शोध की रिपोर्ट बताती है कि जिन बच्चों को अच्छी तरह से मां का दूध पीने को नहीं मिलता है, उन्हें संक्रमण बहुत जल्दी होता है। इनमें कान का संक्रमण, हैजा, श्वसन संबंधी समस्या आदि प्रमुख हैं।
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