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दूध का महत्त्व

Posted by cls On November - 4 - 2008

भारत में गाय के दूध के औषधीय गुणों को अति प्राचीनतम काल से जाना जाता है। चिकित्सा की दृष्टि से दूध बहुत महत्त्वपूर्ण औषधि है तथा शरीर के लिये उच्च श्रेणी का खाद्य पदार्थ है।

भोज्य पदार्थ के रुप में दूध महत्त्वपूर्ण आहार का विलक्षण समुच्चय है। दूध शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन, विटामिन, कार्बोंहाइड्रेट्स, खनिज, वसा, इन्जाइम तथा आयरन इत्यादि सभी तत्त्वों से युक्त होता है। दूध में प्रोटीन और कैल्शियम होने से यह दूधिया होता है। मनुष्य के लिये दूध एक सम्पूर्ण आहार है। इसे पौष्टिक भोजन के रुप में सेवन बालक, प्रौढ, वृद्ध सभी आयु के व्यक्ति सेवन कर सकते है, क्योंकि -

  1. प्रकृति में उपलब्ध पदार्थों में केवल दूध में शुगर लेक्टोज (दुग्ध-शर्करा) होता है।
  2. व्यक्ति के नाडी मण्डल और बुद्धि विकास के लिये दुग्ध-शर्करा बहुत आवश्यक होता है।
  3. ऊर्जस्वी गतिशील शारीरिक क्रिया कलापों के लिये कार्बोहाइड्रेट जरुरी होता है।
  4. शरीर मे लाल रक्त कोशिकाओं के संश्लेषण (समन्वय) और शारीरिक शक्ति के सुधार के लिये आयरन (लौह तत्त्व) आवश्यक होता है।
  5. कैल्शियम और फास्फोरस दांतों और हड्डियों को मजबूत रखते है।
  6. विटामिन ए आँखों की रोशनी और त्वचा को स्वस्थ रखता है और कम्पन रोग को हटाता है।
  7. विटामिन बी नाडी मण्डल और शरीर के विकास के लिये जरूरी है।
  8. विटामिन सी शारीरिक रोगों के प्रति प्रतिरोधक शक्ति पैदा करता है।
  9. विटामिन डी सुखण्डी रोग से सुरक्षा प्रदान करता है।

इनके अलावा दूध के नियमित उपयोग की सिफारिश निम्न कारणों से भी की जाती है-

  1. रात्रि में सोने से पहले एक कप दूध का सेवन रक्त के नव निर्माण में सहायक होता है एवं विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करता है।
  2. प्रातःकाल हलके गर्म दूध का सेवन पाचन क्रिया को संयोजित करता है।
  3. गरम दूध में मिस्री और काली मिर्च मिलाकर पीने से सर्दी जुकाम ठीक हो जाता है।
  4. दूध मे सबसे कम कॉलेस्ट्रोल (14 मि.ग्रा./100 ग्राम) होता है अतः मधुमेह के रोगियों को वसा रहित दूध सेवन की सलाह दी जाती है।
  5. उच्च रक्तचाप से पीडित रोगी को प्रतिदिन 200 मि.ली. दध पीने की सलाह दी जाती है।
  6. अग्निअवर्धक व्रण (Peptic Ulcer) के रोगियों के लिये दूध एक आदर्श आहार है। 50 मि.ली. ठंडे दूध में एक चम्मच चने का सत्तू दो दो घंटे पर देने से अल्सर में लाभ होता है।
  7. दूध सेवन से सात्त्विक विचार, मानसिक शुद्धि और बौद्धिक विकास होता है।

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