Swine Flu – Facts , Precautions and Treatments 03

दवा के इस्तेमाल में सावधानी बरते-

स्वाइन फ्लू से पीडि़त लोगों और खासतौर पर बच्चों को टैमीफ्लू दवा दी जाती है. इस दवा का इस्तेमाल करते समय बरती जाने वाली वाली कुछ सावधानियां ।

  1. एक ब्रिटिश स्टडी के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों को टैमीफ्लू दवा देते समय इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में सतर्क रहना चाहिए।
  2. टैमीफ्लू की वजह से बच्चों में उलटी की शिकायत या फिर डिहाइड्रेशन हो सकता है।
  3. कई स्टडीज बताती हैं कि बच्चों पर स्वाइन फ्लू के साइड इफेक्ट होते हैं। मसलन , उन्हें उबकाई महसूस होना या फिर रात में बुरे सपने आ सकते हैं।
  4. डॉक्टरों के मुताबिक जब स्वाइन फ्लू के सभी लक्षण नजर आएं , तभी टैमीफ्लू दवा का कोर्स करना चाहिए।
  5. दो साल से कम उम्र के बच्चों को टैमीफ्लू नहीं दी जानी चाहिए।
  6. टैमीफ्लू का छह सप्ताह तक सेवन करने के बाद ही किसी व्यक्ति को फ्लूप्रूफ घोषित किया जा सकता है।
  7. अगर कोई व्यक्ति स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया है , तो उसे टैमीफ्लू देने से रिकवरी की रफ्तार तेज हो जाती है।
  8. स्वाइन फ्लू की गलत डोज लेने से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
  9. चूंकि सरकार ने रेग्युलर केमिस्ट शॉप पर टैमीफ्लू की सेल पर बैन लगा रखा है , इस वजह से ब्लैक माकेर्ट में टैमीफ्लू बिक रही है। सभी लोगों को सलाह दी जाती है कि  डाक्टर की सलाह के बिना  दवा खरीदने और खाने से बचें।

मास्क

  1. सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।
  2. सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता है।
  3. स्वाइन फ्लू के लिए दो तरह के मास्क हैं उपलब्ध कीमत
    1. थ्री लेयर सर्जिकल मास्क 10 से 12 रुपये
    2. एन – 95 100 से 150 रुपये
  4. स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क बिल्कुल कारगर नहीं होता है। लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन – 95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं। इसके बाद मास्क को फेंक देना होता है।
  5. ट्रिपल लेयर सर्जिकल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 फीसदी तक बचाव रहता है और एन -95 से 95 फीसदी तक बचाव संभव है।
  6. वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होता है जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें , तब इसे ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाए क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।
    - एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें , क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।
  7. अगर आपको फ्लू नहीं है , तो मास्क पहनना जरूरी नहीं है।
  8. अगर आप किसी फ्लू पेशंट की देखभाल कर रहे हैं , किसी ऐसी जगह जा रहे हैं , जहां फ्लू पेशंट्स की आमद है , या किसी भीड़ वाली जगह जा रहे हैं , तो सावधानी के लिए मास्क लगाना जरूरी हो जाता है।
  9. जब भी किसी फ्लू पीड़ित के संपर्क में आएं तो उससे मुलाकात के फौरन बाद मास्क को फेंक दें और हाथों को धोएं।
  10. ध्यान रखें कि डॉक्टरों के मुताबिक यदि आपके आस – पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है , तब तक मास्क न लगाने की सलाह दी जाती है।
  11. अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।
  12. मास्क तब जरूर पहनना चाहिए , जब उन्हें खांसी हो रही हो।
  13. मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।
  14. अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।
  15. चाहे पालतू जानवर हों या गली के कुत्ते वगैरह , उनके मुंह के संपर्क में न आएं। न ही अपना प्यार जताने के लिए उन्हें किस करें।

फ्लू वायरस H1N1 कैसे असर करता है ?

  1. शरीर में मुंह या नाक के सहारे वायरस एंटर करता है।
  2. सांस लेने से जुड़े नलियों और फेफड़ों में प्रवेश करता है।
  3. सांस लेने के सिस्टम की कोशिकाओं पर हमला करता है।
  4. शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र वायरस के खिलाफ एक्टिव हो जाता है और इसे खत्म करने की कोशिश करता है।
  5. अगर वायरस की वजह से फेफड़ों की बहुत सारी कोशिकाएं मृत हो जाती हैं , तो व्यक्ति मर सकता है।

वायरस के बारे में कुछ खास बाते-

  1. वायरस के बहुत सूक्ष्म रूप धारण करने और अलग – अलग रूपों में बदलते , विकसित होने की क्षमता के कारण डॉक्टर हमेशा वायरस का मूल खोजते हैं।
  2. वायरस तीन प्रकार के होते हैं – ए , बी और सी.
  3. इसमें से ए और बी के कारण खास तौर पर एपिडेमिक ( महामारी ) फैलती है।
  4. ए इंसानों और जानवरों सभी में पाया जाता है।
  5. बी इंसानों में ही अमूमन पाया जाता है।
  6. ए – एच 1 एन 1 स्वाइन इनफ्लुएंजा.
    1. एच हीमेगग्लूटिनिन प्रोटीन वायरस को उसकी होस्ट सेल ( वह कोशिका जिसमें वायरस सबसे पहले एंटर करता है ) से अटैच करता है।
    2. 1 स्पेसिफिक एच और एन प्रोटीन टाइप के बारे में बताता है।
    3. एन न्यूरामिनिडेस प्रोटीन नए बने वायरस को होस्ट सेल से बाहर निकलने में मदद करता है स्वाइन इनफ्लुएंजा स्ट्रेन के बारे में बताता है

वायरस की साइकल

  1. सबसे पहले वायरस होस्ट सेल से अटैच हो जाता है और धीमे – धीमे सेल उसे अपने अंदर ले लेती है।
  2. वायरस का आरएनए रिलीज होता है और होस्ट सेल के न्यूक्लियर में पहुंच जाता है।
  3. यहां पहुंचकर यह सेल का इस्तेमाल वायरस के जेनेटिक मटीरियल की कॉपी तैयार करने में करता है।
  4. यह मटीरियल आपस में जुड़कर नए वायरस तैयार करता है
  5. फिर वायरस कई बार होस्ट सेल को खत्म कर बाहर निकलते हैं और कई बार उसे नष्ट किए बिना ही बाहर आ जाते हैं और दूसरी सेल के साथ यही प्रॉसेस दोहराते हैं।
  6. सबटाइप दो सरफेस प्रोटींस या कहें कि एंटीजंस से तय होता है

कैसे डिवेलप होता है  H1N1 वायरस xxxxx

  1. मुर्गों में एवियन फ्लू होता है। इंसानों पर इस वायरस का खतरनाक असर होता है , लेकिन इस वायरस का एक स्पीशीज से दूसरी स्पीशीज में ट्रांसफर काफी मुश्किल होता है , खास तौर पर इंसान सीधे तौर पर इससे प्रभावित नहीं होते।
  2. सूअर: यह एक जानवर कई सारे वायरस के पनपने के लिए मुफीद होता है। एवियन फ्लू वायरस सूअरों में आसानी से पनपता है और दूसरे वायरस के साथ मिलकर नया स्वाइन फ्लू वायरस तैयार होता है।
  3. मनुष्य: जेनेटिक बनावट में मनुष्य और सूअर काफी समान होते हैं। इसलिए इन्फ्लुएंजा वायरस सूअरों से मनुष्यों में आसानी से ट्रांसफर हो सकता है।

FAQ – अकसर पूछे जाने वाले सवाल

  1. अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं , तो क्या करूं ?
    सामान्य जिंदगी जीते रहें , जब तक आपमें फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं , तो डॉक्टर से कन्सल्ट करें।
  2. अगर साथ में रहने वाले किसी शख्स को स्वाइन फ्लू है , तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए ?
    हां , आप ऑफिस जा सकते हैं , मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है , तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।
  3. स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं ?
    अस्पताल वयस्कों को स्वाइनफ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत : 5 दिनों तक ऑब्जवेर्शन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए , ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं , वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर होता है।

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