स्वाइन फ्लू – टेस्टिंग एण्ड ट्रीटमेंन्ट सेंटर इन दिल्ली
- नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिजीज , 22 शामनाथ मार्ग , नई दिल्ली -54
011 23971272, 060, 344, 524, 449, 326 - ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ( एम्स ), अंसारी नगर , अरबिंदो मार्ग रिंग रोड , नई दिल्ली -29
011 26594404, 26861698,- प्रफेसर आर . सी . डेका 9868397464
- डॉक्टर राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल , खड़क सिंह मार्ग , नई दिल्ली -01
011 23741640, 23741649, 23741639 - वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट , यूनिवसिर्टी एनक्लेव , नई दिल्ली -07
011-27667102, 27667441, 27667667, 27666182 - ईस्ट दिल्ली – लालबहादुरशास्त्री हॉस्पिटल , खिचड़ीपुर
- वेस्ट दिल्ली – दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल , हरी नगर
- नॉर्थ दिल्ली –
- अरुणा आसफ अली हॉस्पिटल
- सिविल लाइंस – हिंदूराव हॉस्पिटल , मल्कागंज
- नॉर्थ – ईस्ट दिल्ली – गुरु तेगबहादुर हॉस्पिटल , दिलशाद गार्डन
- नॉर्थ वेस्ट दिल्ली – बाबा साहब आंबेडकर हॉस्पिटल , रोहिणी
- भगवान महावीर हॉस्पिटल , पीतमपुरा
- बाबू जगजीवन राम हॉस्पिटल , जहांगीरपुरी
- संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल , मंगोलपुरी
- महर्षि बाल्मीकि हॉस्पिटल , पूठ खुर्द
- साउथ दिल्ली
- मदनमोहन मालवीय हॉस्पिटल , मालवीय नगर
- सफदरजंग हॉस्पिटल , एम्स के बगल में , रिंग रोड
- सेंट्रल दिल्ली- लोकनायक हॉस्पिटल , दिल्ली गेट
- नई दिल्ली – राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल , बाबा खड़क सिंह मार्ग
- एयरपोर्ट – एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन हॉस्पिटल , आईजीआई एयरपोर्ट
- हेल्पलाइन 011- 23921401
- एनसीआर में सैंपलिंग सेंटर
- नोएडा : डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल , नोएडा , 0120 2501 872
- गुड़गांव : सिविल हॉस्पिटल , ओल्ड गुड़गांव , 0124-2321121, 4080963
- फरीदाबाद : बादशाह खान ( बीके ) हॉस्पिटल , फरीदाबाद
- गाजियाबाद : एमएमजे हॉस्पिटल , जसीपुरा मोड़ , गाजियाबाद 0120- 2850 141
- कंबाइंड हॉस्पिटल , संजय नगर
कौन पहने मास्क
- मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें ही है , जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।
- इसके अलावा फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।
- भीड़भरी जगहों मसलन , सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।
- मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर , नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।
- एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।
इन्फेक्शन लेवल
- एच 1 एन 1 इन्फेक्शन दो लेवल पर फैलता है। अपर एयर यानी नाक और गले तक और लोअर एयर यानी फेफड़ों में , यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है।
- इसका इलाज भी दो स्टेज पर होता है।
- नॉन फार्मा – जिसमें मरीज को आइसोलेट किया जाता है और दूसरा
- फार्मा , जिसमें दवाएं दी जाती हैं।
- ये वायरस हाथ , पेपर और लकड़ी में 8 घंटे तक एक्टिव रहते हैं और प्लास्टिक और स्टील में 24 से 48 घंटे तक। ऐसे में साफ सफाई का खास ध्यान रखें।
सेकंड लाइन ट्रीटमेंट
कई मामलों में टेमी फ्लू ( स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ) का रेजिस्टेंस पाया गया है , ऐसे में सेकंड लाइन ट्रीटमेंट की तैयारी भी हो रही है। इसके लिए रिलियांजा व जेनामिविर , जो कि इनहेलर के फॉर्म में है , के इस्तेमाल पर हेल्थ मिनिस्ट्री और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के एक्सपर्ट विचार कर रहे हैं , लेकिन यह दवा रीनल पेशंट्स को नहीं दी जा सकती , क्योंकि किडनी पर इसका साइड इफेक्ट देखा गया है। साथ ही वैक्सीन बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
वायरस कब तक रहता है
- एच 1 एन 1 वायरस स्टील , प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे , कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे , टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं।
- इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेन्ट , अल्कोहल , ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं।
- लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।
सेल्फ हीलिंग का फंडा असफल:
एच 1 एन 1 इन्फ्लुएंजा वायरस के इन्फेक्शन में सेल्फ हीलिंग का फंडा पूरी तरह से फेल हो चुका है। अब तक देश भर में हुई 6 मौतों की हिस्ट्री से यह प्रूव हो गया है कि स्वाइन फ्लू में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है , क्योंकि इसके वायरस में शरीर के सारे सिस्टम को शटडाउन करने की क्षमता है।
अब तक स्वाइन फ्लू से जिन मरीजों की मौत हुई है , उनमें से ज्यादातर देर से अस्पताल पहुंचे थे। उनका सही समय पर इलाज शुरू नहीं हो पाया था , इसलिए उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो गए और उनकी मौत हो गई। बीमारी के बाद के पहले तीन दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी स्टेज पर इलाज शुरू हो जाए तो मरीज के ठीक होने की 100 फीसदी गारंटी रहती है , लेकिन अगर इलाज में इससे ज्यादा देर होती है तो केस बिगड़ सकता है।
अगर किसी में बुखार , सर्दी , खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण दिखते हैं तो वह तुरंत हॉस्पिटल में जाए। अगर तुरंत डॉक्टर के पास नहीं जा सकते हैं तो ज्यादा से ज्यादा दो दिन पैरासिटामॉल लेकर यह देख सकते हैं। अगर दो दिन में बुखार उतर जाए और अच्छा महसूस हो तो घबराने की कोई बात नहीं , लेकिन इसके बाद भी अगर लक्षण बरकरार रहें तो तुरंत किसी बड़े अस्पताल में जाएं , जहां स्वाइन फ्लू के इलाज की व्यवस्था हो।
स्वाइन फ्लू में तीन दिन के बाद सांस लेने में दिक्कत , शरीर में दर्द , गले में खराश जैसे लक्षण गंभीर होते जाते हैं और भूख लगनी बंद हो जाती है। 5-6 दिन में किडनी , लिवर , लंग्स या हार्ट की समस्याएं भी शुरू हो सकती हैं और अचानक बॉडी का पूरा सिस्टम शट डाउन हो सकता है। ऐसे में कोई भी चांस न लें।
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