हमारे शास्त्रों में लिखा है – अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्, अर्थात् अजीर्ण में पानी दवा का काम करता है और भोजन पचने के बाद पानी पीने से शरीर बलवान होता है। पानी बहुत से रोगों में दवा का काम करता है। ठंडे और गरम पानी में अलग अलग औषधीय गुण होते है। कई रोगों में ठंडा पानी और कई रोगों में गरम पानी का उपयोग होता है।
- आग से जलने या झुलसने पर, जले- झुलसे अंग को ठंडे पानी में डुबोकर रखे। इससे जलन मिटती है, शान्ति मिलती है और घाव और फफोला नहीं होता। बहुतों को भ्रम है कि जले अंग को पानी में डुबोने से घाव बढ जाते है। असल में जले अंग पर पानी से छींटे देने या पानी डालने से घाव बढ जाते है अतः शरीर के जले अंग पर न तो पानी के छींटे दे और न ही पानी डालना चाहिये बल्कि जले अंग को पानी में कम से कम एक घंटे तक डुबोकर रखना चाहिये।
- मोच आने या चोट लगने या चोट के साथ खून आने पर पर उस जगह पर ठंडे पानी या बर्फ की पट्टी लगाये। इससे सूजन नहीं होती और दर्द कम हो जाता है। गरम पानी की पट्टी लगाने या सेंक करने से सूजन आकर दर्द बढ जाता है।
- गरम पानी से वात रोगों, जोडों के दर्द, घुटने के दर्द, कमर दर्द, गठिया रोग व कंधे की जकडन में लाभ होता है। इसमे गरम पानी से भाप से सेंक दिया जाता है।
- इंजेक्शन लगाने के बाद यदि सूजन आकर दर्द हो तो उस स्थान पर ठंडे पानी या बर्फ की पट्टी लगाने से लाभ होता है। वहां गरम पानी से सेंक न करे।
- यदि रात में नींद न आती हो तो सोने से पहले दोनों पैरों को घुटनों तक सहने योग्य गरम पानी से भरी बाल्टी या टब मे पन्द्रह मिनट तक डुबोकर रखे और सिर पर ठंडॆ पानी में भिगोकर निचोडा हुआ तौलिया रखे। इसके बाद पैरों को बाहर निकालकर पोंछ ले और सिर से तौलिया हटाकर सो जाय। अच्छी नींद आ जायेगी।
- अस्पतालों और नर्सिंग होम में पतले दस्त या उल्टी दस्त के रोगियों को सेलाइन का पानी चढाते है। यह सेलाइन क्या है – नमकीन पानी है। इससे रोगी ठीक हो जाता है।
- बच्चों को पतले दस्त या डायरिया होने पर जीवन रक्षक घोल बनाकर देने से बच्चे स्वस्थ हो जाते है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसलिये यह घोल दिया जाता है। पानी की कमी से मृत्यु हो जाती है। यही कारण है कि रोगी के शरीर में पानी पहुंचाया जाता है, चाहे मुख से हो चाहे सेलाइन से।
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