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जो देता है वह देवता है

Posted by cls On April - 21 - 2010

क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर
(Muni Shri Tarunsagar)
  1. दान देना उधार देने के समान है । देना सीखो क्योंकि जो देता है वह देवता है और जो रखता है वह राक्षस । ज्ञानी तो इशारे से ही देने को तैयार हो जाता है मगर नीच लोग गन्ने की तरह कुटने पिटने के बाद ही देने को राजी होते हैं । जब तुम्हारे मन में देने का भाव जागे तो समझना पुण्य का उदय आया है । अपने होश हवास में कुछ दान दे डालो क्योंकि जो दे दिया जाता है वह सोना हो जाता है और बचा लिया जाता है वह मिट्टी हो जाता है । भिखारी भी भीख में मिली हुई रोटी तभी खाये जब उसका एक टुकडा कीडे मकोडों को डाल दे । अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो कई जन्मों तक भिखारी ही रहेगा ।

     

  2. अगर जिंदगी को स्वर्ग बनाने की तमन्ना है तो पति और पत्नी, सास और बहू, बाप और बेटे को आपस में यह समझौता करना होगा कि अगर एक आग बने तो दूसरा पानी बन जायेगा । अपने घरों में थोडे से पानी की व्यवस्था करके रखिये, पता नहीं कब किसके दिल में क्रोध की आग भडक उठे । क्रोध आग है । अपने घरों में सहनशीलता और शान्ति का जल तैयार रखिये । पता नहीं कब तुम्हारा घर क्रोध की लपटों से घिर जाये । ध्यान रखो- पति कभी क्रोध में आग बने तो पत्नी पानी बन जाये और पत्नी कभी अंगार बने तो पति जलधार हो जाये ।

     

  3. आप भले ही गाली का जबाव थप्पड से दे । थप्पड का जबाव लात से और लात का जबाव ए.के. 47 से दे । कोई बात नहीं अपकी मर्जी । लेकिन आपकी इस मर्जी के साथ मेरी भी एक अर्जी है कि आप क्रोध और गाली का जबाव तुरन्त न दे । थोडा विलम्ब करे । बस दस मिनट का सब्र रखे । क्रोध और गाली का जबाव दस मिनट बाद दे । इस दस मिनट में क्रोध के कारणों और परिणामों पर विचार कर ले फिर अगर उचित लगे तो जबाव दे और सच्चाई तो यह है कि दस मिनट बाद आप क्रोध का जबाव क्रोध से दे ही नहीं सकते क्योंकि क्रोध तो तात्कालिक पागलपन है ।

     

  4. आदमी का तन तो बूढा हो जाता है मगर मन तब भी युवा बना रहता है । और हां, शरीर के बूढा होने से मन की वासनायें बूढी नहीं हो जाती बल्कि बुढापे में वासनाये और अधिक उग्र हो जाती हैं । जैसे पके आम को पहले लोग धीरे धीरे चूसते है मगर ज्यों ज्यों उसका रस समाप्त होने लगता है तो लोग उसे और कसकर चूसते है । असली समस्या शरीर और इन्द्रियां नहीं बल्कि मन है । इन्द्रियां तो केवल स्विच है । मेन स्विच तो मन ही है । मेन स्विच बंद कर दे तो स्विच स्वतः ही काम करना बंद कर देते है ।

     

  5. अपना ऊंचा मकान और ऊंची दुकान देखकर अभिमान मत करना क्योंकि वह दिन दूर नहीं जब तुम इन्हीं मकान और दुकान की मिट्टी के नीचे दबे पडे होंगे । तुम्हारी मिट्टी पर घास उग आई होगी और कोई गधा उस घास को चर रहा होगा । इस शरीर की मिट्टी से ज्यादा कुछ नहीं है । अतः मिट्टी मिट्टी में मिले । मिट्टी की अंत्येष्टि हो, इससे पहले परमेष्टि की शरण ले लेना वरना मौत के समय सिट्टी-पिट्टी गोल हो जायेगी । उपलब्धियों का उत्सव तो मनाना लेकिन उनका अहंकार मत करना ।

     

  6. वक्त तेजी से बदल रहा है और इस बदलते वक्त में अगर तुमने नई पीढी को संस्कारित नहीं किया तो कल जब यह पीढी अंगडाई लेकर मैदान में आयेगी और तुम बुढापे के चौखट पर खडे होंगे तो तुम्हारा युवा बेटा वृद्धाश्रमों का एलबम लाकर तुम्हें दिखायेगा और कहेगा कि पिताजी यह एलबम देखिये, इसमें देश के चुनिंदा वृद्धाश्रम दर्ज है, जिनकी अपनी अपनी विशेषताएं है । आप इनमें से कोई भी एक अपने लिये पसंद कर लीजिये ताकि मैं आपको वहां भिजवाकर अपना पुत्र धर्म निभा सकूं ।

     

  7. पितृ देवो भवः । पिता देव है । मां की ममता धरती से भी भारी है और पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा है क्योंकि बेटे के लिये पिता के अरमान आकाश से भी ऊंचे होते है । दुनियां में कोई किसी को अपने से आगे बढता और ऊंचा उठता नहीं देख सकता । एक पिता ही है जो अपनी संतान को अपने से सवाया होता देखकर खुश होता है । देश के नौजवानों अपने पर्स में रुपये की जगह पिता की तस्वीर रखिये क्योंकि उस तस्वीर ने ही तुम्हारी तकदीर संवारी है । पेड बूढा ही सही, आंगन में लगा रहने दो । फल न सही छांव तो देगा ।

     

  8. हर समय राम भरोसे बैठे रहना उचित नहीं है । अपने पर भी भरोसा रखिये । यह राम भरोसे से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है । हम यह मान ले कि जो होना लिखा है वही होगा तो यह ठीक नहीं है । अगर तुम्हें अपने पर भरोसा नहीं है तो राम भरोसा क्या कर लेगा ? ध्यान रखे – यदि रामजी का भी खुद पर से भरोसा उठ जाय तो उनकी भी नैया डुबक डुबक हो जाया करती है । सच तो यह है कि राम खुद तुम्हारे भरोसे बैठे है कि शायद तुम राम-राज्य की स्थापना के लिये कुछ करोगे ।

     

  9. कहा जाता है कि बच्चे पर मां का प्रभाव पडता है । लेकिन आज बच्चा मां से कम मीडिया से अधिक प्रभावित हो रहा है । कल तक कहा जाता था कि यह बच्चा अपनी मां पर गया है और यह बाप पर । मगर आज जिस तरह देशी विदेशी चैनल हिंसा और अश्लीलता परोस रहे है, उसे देखकर लगता है कि कल यह कहा जायेगा कि यह बच्चा जी टीवी पर गया है और यह स्टार टीवी पर और यह जो निख्ट्टू है, यह तो पूरी फैशन टीवी पर गई है । आज विभिन्न चैनलों द्वारा देश पर जो सांस्कृतिक हमले हो रहे है, वे ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों के हमले से भी ज्यादा खतरनाक हैं ।

     

  10. आज हमारी जिंदगी से हंसी ऐसी गायब हो गई है जैसे कि चुनाव जीतने के बाद नेता गायब हो जाता है । सेहत के लिये जितना हंसना जरुरी है उतना रोना भी जरुरी है । वह आंख ही क्या जिसमें कभी आंसू न छलके और वह मुख ही क्या जिस पर हास्य न बिखरे । आज हमारा दिलो दिमाग इसलिये भारी हो गया है क्योंकि हमने हंसना और रोना बंद कर दिया है । मैं कहता हूं – हंसी आये तो हंस लेना, इससे आंते खुल जाती है और रोना आये तो रो लेना, इससे आंखे धुल जाती है । लेकिन विडम्बना है कि हमने अपनी हंसी या तो फेफडों में कैद कर रखी है या फिर उसकी किसी बैंक में एफ डी करा रखी है ।

     

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