क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर
(Muni Shri Tarunsagar)
- 50 वर्ष के बाद भोजन बदल देना चाहिये । 100 वर्ष के बाद मकान को गिरा देना चाहिये । 500 वर्ष बाद मंदिर और मस्जिद ढहा देना चाहिये । 1000 वर्ष धर्म में आग लगा देनी चाहिये । 100 वर्ष के बाद मकान की डिजाइन पुरानी हो जाती है । 500 वर्ष बाद मंदिर और मस्जिद अपने मूल उद्देश्य से भटक जाते है और 1000 वर्ष के अन्तराल के बाद धर्म में भी कूडा कचरा इकट्ठा हो जाता है । आज हर धर्म के साथ लगभग यहीं हुआ है और यही कारण है कि वह समस्याओं का समाधान नहीं दे पा रहा है ।
- दिल्ली का सफ़र करना हो तो कितनी तैयारी करते हो और मौत के लिये ? मौत का सफ़र भी बडा लम्बा है । इस सफ़र में अंधेरे रास्तों से गुजरना पडता है और रास्ते में दायें-बायें मुडने के न तो कोई निशान होते है और न ही किसी मोड पर हरी लाल बत्ती जल रही होती है । इतना ही नहीं, चीख पुकार करने पर भी कोई सुनने वाला नहीं मिलता । यहां तुम्हारे घर में चाहे अन्न के भंडार भरे पडे हो, पर वहां सफ़र में आटे की एक चुटकी भी साथ नहीं ले जा सकते । भीषण गर्मी में जान सूखती है, पर नीम का एक पत्ता भी सिर ढकने के लिये नहीं मिलता । संकट की इस घडी में सिर्फ़ भगवान का नाम ही सहारा होता है ।
- गुस्सा और जिद्द, आज के जीवन में ये दो जबर्दस्त बुराइयां हैं । पुरुष गुस्से से परेशान है तो महिलायें जिद्द से दुःखी है । मैं कहता हूँ- भाई लोग गुस्सा करना थोडा कम कर दे और महिलायें जिद्द करने से बाज आ जाये तो नरक बना यह जीवन आज और अभी स्वर्ग बन जाये । जिद्द एक ऐसी दीवार है जो अगर पति-पत्नी, बाप-बेटे, सास-बहू के बीच में आ जाये तो फिर यह दीवार तोडना मुश्किल है । यह दीवार तो नहीं टूटती है, रिश्ते जरुर टूट जाते है । हां, जिद्द क्रोध की लाडली बहन है और इन दोनों भाई-बहन में बडा प्रेम है ।
- यह आंख बडी नालायक है किसी से लड जाय तो दुःख देती है, किसी से भिड जाय तो दुःख देती है । अगर यह आ जाय (eye flu) तो दुःख देती है और चली जाय तो दुःख देती है । जिन्दगी मे अधिकतर गडबडियां इसी आंख से शुरु होती है । तभी तो डंडे भले ही पीठ पर पड़े तो भी आंसू तो आंख को ही बहाने पडते है । यह आंख झुक जाय तो हया बन जाती है, उठ जाये तो दुआ बन जाती है । आंख के बडे कारनामे है । बाहर की आंख मुंदे, इससे पहले भीतर की आंख खुल जानी चाहिये वरना इतिहास में तुम्हारा नाम अंधों की सूची में दर्ज होगा ।
- अतिथि देवता है । घर में अतिथि आया हुआ हो तो अमृत ही क्यों न हो, अकेले नहीं पीना चाहिये । जिस घर में अतिथि सत्कार नहीं होता, वह घर घर नहीं श्मशान है । उस घर की चौखट पर भूलकर भी पैर पड जाये तो स्नान करना चाहिये । और जिस घर में अतिथि सत्कार में कभी चूक नहीं होती, वह घर घर नहीं तीर्थ है । उस घर की चौखट को छूने मात्र से तीर्थ दर्शन का फल मिलता है । जो गृहस्थ, अतिथि को खिलाकर फिर खुद खाता है, वह कभी भूखा नहीं सोता । जो व्यक्ति जाने वाले अतिथि की सेवा कर चुका है और आने वाले अतिथि का इन्तजार करता है, वह खुद देवताओं का अतिथि बनता है ।
- अगर आप बाप है तो आपका अपने बेटे के प्रति बस एक ही फर्ज है कि आप अपने बेटे को इतना योग्य बना दे कि वह संत, मुनि और विद्वानों की सभा में सबसे आगे की पंक्ति में बैठने का हकदार बने । अगर आप बेटे है तो आपका अपने बाप के प्रति बस यही एक कर्त्तव्य है कि आप ऐसा आदर्शमय जीवन जिये कि जिसे देखकर दुनियां आपके बाप से पूछे कि किस तपस्या और पुण्य के फल से तुम्हें ऐसा होनहार बेटा मिला है ।
- तुमने सुना होगा कि ईश्वर की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता । मगर मैं कहता हूं कि तुम्हारे हिले बिना भी एक पत्ता नहीं हिलता । ईश्वर की इस मर्जी के नाम पर आज दुनियां में बडे बडे पाप और संगीन अपराध हो रहे हैं । एक आदमी शराब पीता है । उससे पूछो- तू ऐसा क्यों करता है ? तो वह कहता है- मैं कहां करता हूं, यह सब तो ऊपर वाले की मर्जी है । सब उसी की मर्जी से हो रहा है । मैं कहता हूं- ऊपर वाले की मर्जी से कुछ नहीं होता । जो होता है तुम्हारी अपनी अर्जी से होता है । उस ऊपर वाले के नाम पर इस नीचे वाले ने दुनियां को नरक बना रखा है ।
- भारत एक धर्म राष्ट्र है । भारत का हर आदमी भारत है । तुम्हारी देह भारत का चलता फिरता नक्शा है । तुम अपने दोनों हाथ कूल्हें पर रखकर खडे हो जाओ तो स्वतः ही भारत का नक्शा बन जायेगा । तुम्हारा दाहिना हिस्सा राजस्थान है तो बायी ओर बिहार और उडीसा है । पेट मध्यप्रदेश है । पैर तमिलनाडु है । गला पंजाब है । इसलिये ऐसा लगता है पंजाब समस्या के लिये लम्बे समय तक गला घोंटा जाता रहा है । माथा जम्मू-कश्मीर है, शायद इसीलिये वह आज भी सिर दर्द बना हुआ है ।
- राम और कृष्ण दोनों महापुरुष है । मगर दोनों के जीवन में एक बुनियादी फर्क है कि राम तो एकदम सीधे और सरल है जबकि कृष्ण कठिन और गूढ है । राम का नाम भी सरल है, स्वभाव भी सरल है । जबकि कृष्ण का नाम, स्वभाव और लीला तीनों कठिन है । राम राम जपने से आपको कष्ट नहीं होगा लेकिन कृष्ण जपने से जबडे दुखने लगते है । राम का जीवन और कृष्ण का कथन तुम्हारे लिये अनुकरणीय है । राम ने जो किया- वह तुम्हें करना है । कृष्ण ने जो कहा- वह तुम्हें करना है । कृष्ण ने जो किया वह तुम मत करने लगना, वरना सिर पर जूते पडेंगे ।
- बडा आदमी वह नहीं जिसके पास कई नौकर, गाडी और बंगले है । बल्कि बडा आदमी वह है, जो किसी का कर्जदार नहीं है । जो जितना कमाता है, उतने से ही संतुष्ठ रहता है । बडा आदमी वह है जिसकी सेहत अच्छी है और जो अपना काम खुद कर लेता है । बडा आदमी वह है जो किसी जरुरतमंद की सेवा को तैयार रहता है और किसी गरीब का हक नहीं छीनता । बडा आदमी वह है जो कठिन परिस्थियों में भी मुस्कराता है और जिसे कोई उदासी कभी उदास नहीं कर पाती । बडा आदमी वह है जिसे तकिये पर सिर रखते ही नींद आ जाती है और सुबह उठने के किसी अलार्म की जरुरत नहीं पडती ।
Courtsey: Kadve Pravachan by Krantikari Sant Muni Tarunsagar
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