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महाप्रयोग की प्रयोगशाला भी हैकरों से अछूती नहीं रही

Posted by cls On September - 14 - 2008

कहां-कहां बचोगे हर जगह है हैकर

जिनेवा में हैकरों से ब्रह्मांड का रहस्य जानने के लिए महाप्रयोग की प्रयोगशाला भी अछूती नहीं रही। हैकरों ने लार्ज हैड्रान कोलाइडर (LHC) के कंप्यूटरों में सेंध लगाने की कोशिश की। इन खबरों के बाद हैकरों के कारनामें एक बार फिर चर्चा में हैं। नई बहस में न केवल सुरक्षा के तमाम इंतजामात की बात की जा रही है बल्कि हैकरों के ताकतवर होने की बात भी स्वीकार की जा रही है।

  1. तुर्की के एक हैकर ने इंटरनेट सिक्योरिटी को तार-तार कर कर बीते पखवाड़े एक ही दिन में 21 हजार से ज्यादा वेबसाइटें हैक की।
  2. पूर्व में वोडाफोन, सोनी म्यूजिक स्टूडियो, सोनी म्यूजिक इंट और भारत की एसबीआई साइटों को भी हैक किया जा चुका है।
  3. कम्प्यूटर सुरक्षा तंत्र पर काम कर रही लंदन स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था एम आई 2 जी के अनुसार अब कम्प्यूटर आतंकवाद अब पहले से ज्यादा संगठित होता जा रहा है। अब तमाम देशों की महत्वपूर्ण वेबसाइटें जैसे पावर स्टेशन और जल संसाधनों की कम्प्यूटर नियंत्रित प्रणाली भी आतंकवादियों के सीधे निशाने पर होने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता।
  4. भारतीय प्रमुख वेबसाइटों को हैक करने के लिये तमाम हैकर समूह जी-जान से लगे हुए हैं। पाकिस्तान में ही एफ बी एच के अलावा ‘किल इंडिया’, ‘जी फोर्स पाकिस्तान’, ‘डेथ टू इंडिया’, ‘मुस्लिम ऑन लाइन सिंडीकेट’, ‘सिल्वर लार्ड’, जैसे अजीब-अजीब नामों वाले हैकर समूह है
  5. इनमें से कई भारतीय वेबसाइटों को हैक करने की सभी संभावित संभावनाएं तलाशते हैं। पासवर्ड चुराकर डी एन एस संरचना में छेड़छाड़ कर भारतीय वेबसाइटों को सत्यानाश करने में जुटे अपराधी जिन साइटों को अपना निशाना बना चुके हैं उसमें भाभा एटोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और विदेश मंत्रालय जैसी वेबसाइटें भी शामिल हैं।

अच्छे हैकर सभी हैकर खराब नहीं होते। आजकल अच्छी वेबसाइटें अपने सुरक्षा इंतजामों को जांचने के लिए भले हैकरों की सेवाएं लेती हैं। भले हैकरों को ब्लू हैट हैकर कहा जाता है। सुरक्षा एजेंसी एफबीआई रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में कंप्यूटर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 12 लाख 80 हजार विशेषज्ञों की जरूरत होगी।

अब वायरलेस हैकिंग : वायरलेस नेटवर्क के अनधिकृत उपयोग को वायरलेस हैकिंग कहा जाता है। आजकल ऐसी हैंकिंग में तेजी से इजाफा हुआ है।

मोबाइलों पर गिरेगी गाज : 200 से ज्यादा मोबाइल वायरस अस्तित्व में आ चुके है। इंटरनेट से जुड़ सकने वाले मोबाइल फोनों में हैंकिंग की सामत आ सकती है। सभी स्मार्ट फोन नए जंजाल ला सकता है। हैकर मोबाइल का न केवल डाटा चुरा सकते हैं बल्कि उसका आपरेटिंग बरबाद कर सकते हैं, उसे दूर से ही कंट्रोल सकते है और आपके परचितों को बेहूदे मैसेज भेज सकते हैं। मोबाइल वायरस का बाजार 11.75 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

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One Response to “महाप्रयोग की प्रयोगशाला भी हैकरों से अछूती नहीं रही”

  1. SAMEER says:

    IF YOU CAN WATCH ALL INDIAN CHANNELS VIST
    HTTP://HUMNAWAB.COM

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