बिंदिया भारतीय नारी के सौभाग्य एवं सौन्दर्य का प्रतीक है। एक आम नारी मेकअप के नाम पर कुछ करे या न करे पर एक प्यारी सी बिंदिया अवश्य लगाती है, क्योंकि यह किसी कवि या शायर की कल्पना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक तथा नारी शृंगार की परिपूर्णता की निशानी है। एक छोटी सी खूबसूरत बिंदिया सितारे जैसी चमक कर नारी के चेहरे व सौन्दर्य को चार-चांद लगा देती है।
प्राचीनकाल में अक्षत, रोली, फूल पत्ती, पेड़ पौधों की छाल, चंदन आदि घिसकर माथे पर बिंदी के रूप में लगाय जाते थे। कुछ स्त्रियां अपने माथे, हाथ एवं गले पर स्थायी रूप से गोदना गोदवाकर बिंदी का प्रतीक बनवा लिया करती थीं क्योंकि बिंदिया सुहाग का प्रतीक जो है। बिंदिया ग्रामीण, शहरी युवा बुजुर्ग व आधुनिकाओं सभी को प्रिय है।
बिंदियां को कई नामों से जाना जाता है, जैसे टिकिया, टिकुली, बिंदी, टिकी, टीका आदि। गोल बिंदी को कुछ लंबा स्वरूप देने पर उसे तिलक का कहते हैं। आजकल वेल्वेट तथा सेल्यूलाइड की बनी बनायी बिंदिया बाजार से मिलती है, उन पर विभिन्न तरह की कलाकृतियां व चित्रकारी तो होती ही है, साथ ही वे अनेक रंगों में भी उपलब्ध होती हैं।
नगों से जड़ी हुई बिंदिया भी आजकल की महिलाओं के माथे की शोभा बढ़ाती हैं और ऐसा लगता है जैसे कि छोटा सा नग डायमण्ड की तरह मुख की चमक बढ़ा रहा है। तो आइये अपने चांद के समान मुखड़े के लिए किस प्रकार की बिंदिया का चयन करे? बिंदिया चयन करते समय यह ध्यान रखे कि वह उत्तम किस्म की हो तथा उस पर लगा चिपकाने वाला पदार्थ हानिकारक रसायन का न बना हो, अन्यथा आपके माथे पर सफेद निशान बन कर आपकी परेशानी बढा सकता है।
चेहरे को सुन्दर बनाने वाली बिंदियों को लगाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। जिस तरह
बिंदी आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है, ठीक उसी तरह लापरवाही से इस्तेमाल की गयी बिंदी आपके खूबसूरत चेहरे को दागदार भी बना सकती है। बिंदी का चुनाव परिधान, अवसर, परिवेश आदि के हिसाब से करने पर चेहरा जगमगा उठता है। इसके लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान अवश्य देना चाहिए।
- चौड़े माथे वाली स्त्रियों को बड़ी बिंदी और छोटे माथे वाली स्त्रियों को छोटी बिंदी तथा लंबे चेहरे वाली स्त्रियों को मध्यम आकार की बिंदी लगाने से वो खूब फबती हैं।
- परिधान से मेल खाती बिंदी काफी अच्छी लगती है। अगर आपने क्रास मैचिंग की साड़ी व ब्लाउज पहनी हो तो साड़ी के रंग की ही बिंदी लगाएं। यदि आपने क्रास-मैचिंग का सलवार कुरता पहन रखा है तो कुरते के रंग की ही बिंदी लगाएं। आपकी खूबसूरती देखते ही बनेगी।
- जींस, मैक्सी, स्कर्ट आदि पाश्चात्य परिधानों के साथ बिंदी कभी न लगाएं, अच्छी नहीं लगेगी।
- बिंदी व लिपिस्टिक का रंग एक न हो, वरना चेहरे का संतुलन बिगड़ा हुआ लगेगा।
- सुर्ख लाल रंग की बिंदी गोरे, गेहुएं, सांवले रंग की युवती ही नहीं, हर उम्र की महिला पर फबती है।
- सुबह शाम हल्के चमकीले रंग की बिंदी का इस्तेमाल करें और दोपहर में गहरे रंग की बिंदी का ही इस्तेमाल करें।
- पार्टी में हमेशा हल्के शेड की बिंदी ही लगा कर जाएं जो शालीनता की परिचायक होगी।
- रात में गहरे रंग की बिंदी का प्रयोग न करें। इससे खूबसूरती में निखार की बजाय भद्दा सा लगेगा।
- मैरून व सिन्दूरी रंग की बिंदी का प्रयोग किसी भी समय किया जा सकता है।
- कभी माथे के बीचों बीच बिंदी लगायी जाती थी, पर आजकल भौहों के भीतरी सिरों के बीच या थोड़ी सी ऊपर की ओर बिंदी लगाना पसंद किया जाता है।
- अगर आपकी आंखें छोटी हैं तो छोटी बिंदी लगाइए तथा बड़ी आंखों के बीच बड़ी बिंदी लगाइए। अगर आप कामकाजी महिला हैं तो कार्य स्थल पर जाते समय परिधान से मेल खाती सादगीपूर्ण बिंदिया लगायेंगी तो अवश्य ही आकर्षक लगेंगी। बिंदी के इस्तेमाल से पूर्व की सावधानियां
- स्टिकर बिंदी हमेशा लगा कर न रखें। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
- सफर में जाने से कुछ समय पहले ही बिंदी लगाएं।
- नीचे गिरी या कई बार प्रयोग में लायी गई तथा किसी दूसरे द्वारा प्रयोग में लाई गई बिंदी का इस्तेमाल कभी न करें। इससे संक्रमण होने का भय बना रहता है।
- अच्छी कंपनी की एवं हर बार नई बिंदी का ही इस्तेमाल करें।
- बिंदी जिस जगह पर लगायी जाती है उस जगह को साफ करने के बाद कच्चा दूध, मलाई, कोल्ड क्रीम या स्किन आयल जरूर लगाएं।
- अगर बिंदी लगाने के बाद बिंदी लगाने वाली जगह पर खुजली हो तो कुछ दिनों के लिए बिंदी लगाना बंद कर दीजिए।
- किसी की मृत्यु आदि गमी के मौके पर आप जा रही हों तो इसका ध्यान अवश्य रखिए कि बिंदी लाल रंग की न हो। इस अवसर पर आप काली बिंदी लगाकर जा सकती हैं।
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