कश्मीर घाटी में लोगों की ट्रेन देखने की हसरत 11 अक्टूबर 2008 को पूरी हुई। कश्मीर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घाटी की ऐतिहासिक पहली रेल सेवा का उद्घाटन किया।
यह परियोजना 2009 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। तब यह कश्मीर के उत्तरी हिस्से में बारामूला को दक्षिण स्थित काजीगुंड तक जोडे़गी। यह फासला 117 किलोमीटर का है। इस परियोजना पर करीब 20 अरब रूपए खर्च होने का अनुमान है ।

यह ट्रेन शुरु होने से काजीगुंड से श्रीनगर तक तीन घंटे का सफर अब मात्र 45 मिनट में पूरा होगा। इससे यहां के गंभीर मरीजों, छात्रों तथा उघमियों को विशेष लाभ मिलेगा।
सफर को सुहाना बनाने के मकसद से ट्रेन की खिड़कियों की साइज को बड़ा बनाया गया है, जिससे यात्री सफर का लुत्फ ले सकें।
आठ कोच वाली इस ट्रेन में प्र्त्येक कोच की क्षमता 90 यात्रियों की है। यह खासतरह के सुरक्षा इंतजाम से लैस होगी।
फ़ूलों से सजाई गई नई ट्रेन में की शुरुआत बच्चों के सफ़र से हुई.
इस रेलगाड़ी की बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ विशेष पॉली-कारबोनेटिड शीट से बनाई गई हैं जो आम रेल की खिड़कियों की तरह टूट नहीं सकती है. इसके अंदर लगाए गए सामान में आग नहीं लगेगी.
इसके डीज़ल इंजन में बर्फ़ काटने के यंत्र भी लगे हुए हैं ताकि सर्दी के मौसम में भी रेल सेवा जारी रहे.
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