1200 करोड़ रुपए बैंकों में जमा पर उनका वारिस कोई नहीं
देश के कमर्शियल बैंकों के करीब दो करोड़ खातों में पिछले दस साल से 1200 करोड़ रुपए ऐसे पड़े
हुए हैं, जिनके बारे में यही पता नहीं है कि इनके मालिक कौन हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने दस साल पहले एक
सर्कुलर जारी कर बैंकों से इन खातों के ग्राहकों या उनके वारिसों का पता लगाने के लिए कहा था, लेकिन नतीजा
कुछ भी नहीं निकला। उड़ीसा के कटक में रहने वाले सिध्दार्थ मिश्रा ने इस बारे में आरटीआई के तहत जानकारी
मांगी थी। अधिकृत सूत्रों के मुताबिक देश भर के बैंकों में 12,07,35,54,334.23 रुपए बेकार पड़े हैं। यह रकम 1,74,38,100 ऐसे खाता धारकों की है, जिन्होने आज तक इस पर दावा नहीं किया।
रिजर्व बैंक के मुताबिक ऐसी सबसे ज्यादा रकम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में जमा हुई। रिजर्व बैंक के एक अफसर ने बताया कि बैंक अपनी शाखाओं में बेकार पड़ी रकम के वारिस या मूल ग्राहक का सही तरीके से पता नहीं लगाते। वे खाताधारक को चिट्ठी भेजकर निश्चिंत हो जाते हैं और जवाब आया या नहीं, इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाता।
एसबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और विदेशी बैंकों में करीब 1,03,33,882 खातों में जमा निष्क्रिय राशि करीब 10,50,16,66,467.52 करोड़ रुपए के आसपास बैठती है।
राष्ट्रीयकृत बैंकों में करीब 7.94 अरब रुपए जमा हैं, जिनके लिए किसी ने दावा नहीं किया। इन बैंकों में पिछले दस साल से निष्क्रिय पड़े खातों की संख्या 72,45,581 है। रिजर्व बैंक का कहना है कि बैंकों को इससे निपटने के लिए खाताधारकों को नोमिनी की जानकारी बैंकों के लिए बाध्य करना चाहिए।
रिजर्व बैंक ने जो आंकड़े दिए हैं, वे 1996 से 2006 तक के हैं। बहुत मुमकिन है कि पिछले दो साल के दौरान बैंकों में ऐसी निष्क्रिय रकम में और बढ़ोतरी हुई होगी। जिन बैंकों में सबसे ज्यादा निष्क्रिय खाते हैं, उनमें एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, केनरा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईएमजी वैश्य बैंक, कोटक महिन््रा बैंक, एबीएन एमरो बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक, बीएनपी परिबास, सिटी बैंक, एचएसबीसी और स्टेण्डर्ड चार्टर्ड बैंक शामिल हैं।
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