रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि जो बैंक कस्टमर अपने अकाउंट ऑपरेट नहीं करते, उन्हें सेविंग खाते पर और फिक्स्ड डिपॉजिट की मच्योरिटी के बाद भी 3.5 फीसदी की दर से ब्याज की राशि मिलती रहेगी। आरबीआई के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि बैंक ब्याज न देकर ऐसी जमा राशि पर मौज करते हैं, जिनके लिए लंबे समय से दावा नहीं किया गया है।
बैंक ने नोटिफिकेशन में कहा कि सेविंग खाते में ब्याज नियमित तौर पर दिया जाना चाहिए। चाहे अकाउंट ऑपरेटिव हो या न हो। अगर फिक्स्ड डिपॉजिट मच्योर होने के बाद भी पड़ा रहता है और परिपक्वता राशि के लिए कोई दावा नहीं किया जाता तो बैंक के पास जमा राशि पर सेविंग खाते की ब्याज दर से ब्याज मिलता रहेगा। फिलहाल बैंक सेविंग खाते पर 3.5 फीसदी की दर से ब्याज देते हैं। आरबीआई ने ऑपरेट न हो रहे अकाउंटों का एक्टिवेट किए जाने पर कोई शुल्क लिए जाने पर रोक लगा दी है।
रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि ऑपरेट न होने वाले अकाउंटों के होल्डरों या उनके वारिसों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाएं। यह काम उन लोगों के जरिए भी किया जा सकता है, जो होल्डरों के परिचयदाता रहे हैं। बैंक उन कस्टमरों से संपर्क करें, जिनका एक अकाउंट एक साल से ज्यादा समय से ऑपरेट नहीं हुआ है। संपर्क होने पर वे नए अकाउंट में रकम ट्रांसफर कर दें। अगर ऐसे कस्टमर को भेज गया पत्र बिना सौंपे लौट आता है, तो बैंक को इनक्वायरी करनी होगी। उसे खातेदार या उसके वारिस का पता लगाना होगा।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि सेविंग और करंट अकाउंट को तभी ऑपरेट न किया जा रहा माना जाएगा, जब उसमें दो साल से ज्यादा समय से ट्रांजैक्शन न हो रहा हो। ऐसे खातों के लिए डेबिट के साथ क्रेडिट ट्रांजैक्शन पर भी विचार किया जाना चाहिए। हां, बैंकों की ओर से लगाए जाने वाले सर्विस चार्ज से कोई अकाउंट ऑपरेटिव नहीं कहा जाएगा। किसी अकाउंट को ऑपरेटिव न मानकर कस्टमर को परेशान भी नहीं किया जाना चाहिए। ऑपरेट न हो रहे खातों में जो रकम पड़ी हो, उनका ऑडिट उचित तौर पर होते रहना चाहिए। संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर उच्च स्तर पर नज़र रखी जानी चाहिए।
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