दिन में सपने देखने से दिमाग तेज़ होता है
ऑफिस में काम करने के बजाय इधर-उधर की बातों में सिर खपाने को बुरी बात माना जाता है। लेकिन फिर भी लोग काम करते-करते दूर ख्यालों में खो जाते हैं। लेकिन हालिया रिसर्च से पता चला है कि यूं दूर ख्यालों में खोना यानी दिन में ही सपने देखना बुरी बात नहीं है। साइंटिस्ट के मुताबिक इस तरह दिन में ही ऊटपटांग सपने देखना इंसान की रचनात्मकता में इजाफा करता है।
रिसर्च बताती है कि दिन में सपने देखने के दौरान दिमाग कई ऐसी बातों और संबंधों के बारे में सोचता है, जिन पर सामान्य परिस्थितियों में ध्यान नहीं जाता। इस दौरान इंसान का ध्यान अपने आसपास के हालात से परे जाकर अजीबोगरीब चीजों पर लगता है। ऐसे में उन चीजों की भी कल्पना कर ली जाती है, जो वास्तव में होती भी नहीं हैं।
दिन में सपने देखने से जुड़ी रिसर्च की शुरुआत की एक दिलचस्प कहानी है और यह कहानी एक कहानी से ही शुरू हुई। ईस्ट एंगलिया यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट टेरेसा बेल्टन को प्राइमरी स्कूल के बच्चों की लिखी कहानियां चेक के दौरान दिन में सपने देखने के नफा-नुकसान की स्टडी करने का ख्याल आया।
बेल्टन ने प्राइमरी स्कूल के बच्चों को वह सबकुछ लिखने को कहा था, जो कभी भी उनके दिमाग में उभरता है। बेल्टन को यह देखकर खासी निराशा हुई कि ज्यादातर बच्चों की कहानियां एक जैसे ढर्रे पर थीं और उनमें रचनात्मक कल्पनाशीलता का खासा अभाव था। कहानियों बहुत ही सीमित दायरे के इर्द-गिर्द घूमती नजर आईं गोया बच्चों की सोच बंध चुकी हो। जब उनसे खास तौर पर कल्पना की उड़ान भरने को कहा गया, तब भी ऐसा नतीजा रहा।
रिसर्च एसोसिएट ने अगले कुछ महीनों तक इन बच्चों की रूटीन को ऑब्जर्व किया। रूटीन में क्लासों के बीच खाली समय या किसी क्रिएटिव काम के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं थी। ऐसे काम नहीं कराए जाते थे, जिसमें बच्चों को अपनी सोच और कल्पना पर जोर देना पड़े। जब भी बच्चों को खाली टाइम मिलता था या वे बोर होते थे तो टीवी के सामने बैठ जाते थे।
दिन में सपने देखने के लिए खाली टाइम और उससे पैदा होने वाली बेचैनी खासी जरूरी है। कई बार कल्पना के घोड़े खुली आंखों से दौड़ाने पर न सिर्फ वक्त कट जाता है, बल्कि इसमें खासा मजा भी आता है। मगर दिन में सपने देखना यूं ही नहीं आ जाता, इसके लिए भी अभ्यास की जरूरत पड़ती है। बेल्टन के मुताबिक दिन में सपने देखने के लिए बहुत आराम से सोचने की जरूरत है बिना किसी पूर्व निर्धारित शर्त या दबाव के। ऐसे ख्यालों को खास तौर पर आजादी देनी होती है, जो पहली नजर में बकवास लगते हैं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजिस्ट मेलिया के मुताबिक दिन में सपने देखने से लोगों में खुद को फ्यूचर में प्रोजेक्ट करने और उसकी तमाम संभावनाओं पर प्रतिक्रिया जताने की क्षमता बढ़ जाती है। उसके बिना हम बेहद सीमित सोच के इंसान बनकर रह जाएंगे। तो अगली बार जब दिन में ख्यालों की भूलभुलैया में भटकें, तो कोई गिला नहीं रहे क्योंकि इससे दिमाग तेज होता है।
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