सरकार वर्ष 2008 के आखिर तक कारों के लिए फ्यूल इकॉनमी रेटिंग सिस्टम लॉन्च करने जा रही है। इससे कंज्यूमर को कार खरीदते वक्त पता चल सकेगा कि किस कार का माइलेज कितना है और उस सेगमंट के दूसरे मॉडल्स के मुकाबले वह कितनी बेहतर है।
शुरू में यह कार कंपनियों की इच्छा पर होगा कि वह सरकार की ओर से तय एजेंसी से अपने मॉडल्स की लेबलिंग कराए। वह एजेंसी तय मानकों पर मॉडल को एक से पांच स्टार के बीच एक रेटिंग देगी। यह रेटिंग काफी कुछ एसी और फ्रिज को दी जाने वाली एनर्जी एफिशंसी रेटिंग की तरह ही होगी। किसी सेगमंट में पांच स्टार का मतलब होगा बेस्ट और एक का अर्थ वर्स्ट। लेकिन 2011-12 से सरकार सभी पैसिंजर वीइकल के लिए यह लेबलिंग अनिवार्य कर देगी। जो भी वाहन इन मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उसे सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं होगी।
इस रेटिंग से जहां कंस्यूमर को ज्यादा बेहतर कार खरीदने में मदद मिलेगी, वहीं सरकार को उम्मीद है कि इन मानकों के लागू होने से 2030 तक सालाना 5 से 15 मिलियन टन ईंधन की बचत होगी। कार के मॉडलों को वेट के हिसाब से आठ कैटिगरी में बांटा जाएगा। हर कैटिगरी में सरकार बेस्ट और वर्स्ट मॉडल की पहचान करेगी। स्मॉल सेगमंट में तो रेटिंग के हिसाब से मॉडल्स में ईंधन की बचत का अंतर 60 से 70 फीसदी तक जा सकता है। इस कैटिगरी में जहां बेस्ट मॉडल एक लीटर में 20 किलोमीटर तक का माइलेज दे सकता है, वहीं वर्स्ट मॉडल 8 से 10 किलोमीटर प्रति लीटर में ही अटक सकता है।
लेकिन स्टार रेटिंग के लागू होने के बाद सरकार चाहेगी कि फ्यूल एफिशंसी में खराब प्रदर्शन कर रहे मॉडल इंडस्ट्री की ओर से तय बेस्ट लेवल को छुएं। इस रेटिंग से दो चीजें तय होंगी। कंस्यूमर को जहां हर साल बेहतर कार मॉडल मिलेंगे, वहीं ऑटो कंपनियां यह दावा भी नहीं कर सकेंगी कि उन पर महंगी तकनीक इस्तेमाल करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। पर अगर खराब मॉडलों ने सुधार नहीं किया तो उन्हें 2011-2012 से सड़क पर उतरने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
ग्राहकों के लिए इस दिशा में पहला कदम इस साल की आखिरी तिमाही से शुरू होगा। जब सरकार कारों की लेबलिंग शुरू करेगी। कार निर्माता तय फीस देकर सरकार से अपने मॉडल टेस्ट करने और फिर उन्हें स्टार रेटिंग देने के लिए कह सकेंगे। इस रेटिंग लेबल में सरकार से सर्टिफाई माइलेज की जानकारी भी होगी। रेटिंग के डेटा वेबसाइट पर भी उपलब्ध होंगे, जिससे कि मॉडल के शोरूम पहुंचने से पहले ही कंस्यूमर उसके माइलेज की जानकारी हासिल कर सके व अन्य मॉडलों से उसकी तुलना कर सके। हालिया स्थिति बताती है कि इस समय कोई भी मॉडल फाइव स्टार मानकों को पूरा करता नहीं दिख रहा है। तीन-चौथाई मॉडल तो थ्री या फोर स्टार को ही मुश्किल से छू पा रहे हैं।
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