क्रान्तिकारी संत मुनि श्री तरुणसागर
(Muni Shri Tarunsagar)
- दान देना उधार देने के समान है । देना सीखो क्योंकि जो देता है वह देवता है और जो रखता है वह राक्षस । ज्ञानी तो इशारे से ही देने को तैयार हो जाता है मगर नीच लोग गन्ने की तरह कुटने पिटने के बाद ही देने को राजी होते हैं । जब तुम्हारे मन में देने का भाव जागे तो समझना पुण्य का उदय आया है । अपने होश हवास में कुछ दान दे डालो क्योंकि जो दे दिया जाता है वह सोना हो जाता है और बचा लिया जाता है वह मिट्टी हो जाता है । भिखारी भी भीख में मिली हुई रोटी तभी खाये जब उसका एक टुकडा कीडे मकोडों को डाल दे । अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो कई जन्मों तक भिखारी ही रहेगा । Read the rest of this entry »
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