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Shri Brahmanand Devotional Song-9

Posted by cls On November - 29 - 2009

 

 

ॐ श्री परमात्मने नमः Om Shri Parmatmane Namah:
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला Shri Brahmanand Bhajanmala

 

भजन संख्या ९ Bhajan Sankhya 9
(राग-जंगला ताल ३ Raag- Janglaa Taal 3)

 

अर्जुन को रणभूमि विषे हरि Ajrun ko rann bhumi vishe hari ।
ब्रह्मज्ञान निर्मल समझावे Brahmagyaan nirmal samjhaave ॥ टेक ॥ अर्जुन०
तू किसका है कौन तुम्हारा Tu kiska hai kaun tumaara ।
एकहि आवत एकहि जावे Ekahi aavat ekahi jaave ॥ १ ॥ अर्जुन०
अबिनाशी यह जीव सनातन Abinaashi yah jeev sanaatan ।
देह के संग मरण नहिं पावे Deh ke sang maran nahi paave ॥ २ ॥ अर्जुन०
घट घट भीतर व्यापक हूं मैं Ghat ghat bheetar vyaapak hu mai ।
भेदभावना क्यों मन लावे Bhedabhavanaa kyo man laave ॥ ३ ॥ अर्जुन०
ब्रह्मानन्द स्वरुप है तेरा Brahmanand swaroop hai teraa ।
शोक की बात न क्यों बिसरावे Shok ki baat n kyo bisaraave ॥ ४ ॥ अर्जुन०

 

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Shri Brahmanand Devotional Song-8

Posted by cls On November - 29 - 2009

 

ॐ श्री परमात्मने नमः Om Shri Parmatmane Namah:
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला Shri Brahmanand Bhajanmala
भजन संख्या ८ Bhajan Sankhya 8
(राग-जंगला ताल ३ Raag- Janglaa Taal 3)

 


नाथ दीजे अब दरस तुमारे Naath dije ab daras tumaare ।
सफल करो प्रभू नैन हमारे Safal karo prabhu nain hamaare ॥ टेक ॥ नाथ०
तेज पुंज मय अंग मनोहर Tej punjmay ang manohar ।
रबि शशि कोट लजावन हारे Rabi shashi kot lajavan haare ॥ १ ॥ नाथ०
शीश मुकुट मणि जडित बिराजे Shish mukut mani jadit biraaje ।
कानन कुण्डल मकरा कारे Kanan kundal makaraa kare ॥ २ ॥ नाथ०
शंख चक्र कर कमल सुहावे Shankh chakra kar kamal suhaave ।
पीत बसन तन ऊपर धारे Pit basan tan upar dhaare ॥ ३ ॥ नाथ०
ब्रह्मानन्द चतुर्भुज सुन्दर Brahmanand chaturbhuj sundar ।
मंद हसन हरि गरूड सवारे Mand hasan hari Garud savaare ॥ ४ ॥ नाथ०

 

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Shri Brahmanand Devotional Song-7

Posted by cls On November - 29 - 2009

ॐ श्री परमात्मने नमः Om Shri Parmatmane Namah:
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला Shri Brahmanand Bhajanmala
भजन संख्या ७ Bhajan Sankhya 7
(राग-जंगला ताल ३ Raag- Janglaa Taal 3)

जनम जनम को मैं दास तुमारो Janam janam ko mai das tumaro ।
करुणा कर अब तार मुरारे Karunaa kar ab taar muraare ॥ टेक ॥ जनम०
भवसागर जल तरण कठिन है Bhavsagar jal taran kathin hai ।
किस बिधि जाऊं पार मुरारे Kis bidhi jau paar muraare ॥ १ ॥ जनम०
तुम बिन और न पालक मेरो Tum bin aur n paalak mero ।
बंचक सब परिवार मुरारे Banchak sab parivaar muraare ॥ २ ॥ जनम०
मैं गुणहीन दोष परिपूरण Mai gunaheen dosh paripuran ।
अपनी ओर निहार मुरारे Apani aur nihaar murare ॥ ३ ॥ जनम०
ब्रह्मानन्द बिलंब न कीजे Brahmanand bilamb n kije ।
सुनिये मेरी पुकार मुरारे Suniye meri pukaar murare ॥ ४ ॥ जनम०

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Shri Brahmanand Devotional Song-6

Posted by cls On November - 29 - 2009


ॐ श्री परमात्मने नमः Om Shri Parmatmane Namah
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला Shri Brahmanand Bhajanmala
भजन संख्या ६ Bhajan Sankhya 6
(राग-जंगला ताल ३ Raag- Jangla Taal 3)


*** *** ***
नारायण को भजन करो नर Narayan ko bhajan karo nar ।
मन की छोड भटकना सारी Man ki chhod bhatakana saari ॥ टेक ॥ नारायण ०
क्या मथुरा क्या काशी जावे Kya Mathura kya Kashi jaave ।
क्या परबत वन फिरत अनारी Kya parbat ban firat anari ॥ १ ॥ नारायण ०
जप तप योग कठिन कलिमांही Jap tap yog kathin kali maahi ।
थोडी उमर काम बहु भारी Thodi umaar kaam bahu bhari ॥ २ ॥ नारायण ०
शास्त्र अनेक पढो दिन राती Shastra anek padho din raati ।
मुक्ति न हो बिन भजन तुमारी Mukti n ho bin bhajan tumari ॥ ३ ॥ नारायण ०
ब्रह्मानन्द कटे भवबन्धन Brahmanand kate bhavbhandhan ।
हरि का नाम सुमर सुखकारी Hari ka naam sumar sukhkari ॥ ४ ॥ नारायण ०

*** *** ***

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Shri Brahmanand Devotional Song-5

Posted by cls On November - 27 - 2009


ॐ श्री परमात्मने नमः
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला
भजन संख्या ५
(राग-जंगला ताल ३)


नारायण जिनके हिरदे में ।
सो कछु कर्म करे न करे रे ॥ टेक ॥ नारायण ०
नाव मिली जिसको जल अन्दर ।
बाहु से नीर तरे न तरे रे ॥ १ ॥ नारायण ०
पारसमणि जिनके घर मांही ।
सो धन संच करे न करे रे ॥ २ ॥ नारायण ०
सूरज को परकास भयो जब ।
दीपक जोत जरे न जरे रे ॥ ३ ॥ नारायण ०
ब्रह्मानन्द रुप जिन जान्यो ।
काशी में जाय मरे न मरे रे ॥ ४ ॥ नारायण ०

*** *** ***

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Shri Brahmanand Devotional Song-4

Posted by cls On November - 27 - 2009


ॐ श्री परमात्मने नमः
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला
भजन संख्या ४
(राग-जंगला ताल ३)


नारायण का नाम सुमर नर ।
जनम मरण दुःख जाय तुमारो ॥ टेक ॥ नारायण ०
मानुष जनम मिला जग माही ।
दाव जीतकर फिर किम हारो ॥ १ ॥ नारायण ०
जो परलोक सहायक तेरो ।
उस मालिक को काहे बिसारो ॥ २ ॥ नारायण ०
काल खडा सिर ऊपर तेरे ।
क्या सुख सोवत पांव पसारो ॥ ३ ॥ नारायण ०
ब्रह्मानन्द बिना हरि सुमरण ।
नहिं भवसागर को निस्तारो ॥ ४ ॥ नारायण ०

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Shri Brahmanand Devotional Song-2

Posted by cls On November - 27 - 2009


ॐ श्री परमात्मने नमः
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला
भजन संख्या २
(जंगला ताल ३)

 


नारायण मैं शरण तुम्हारी ।
दया करो महाराज हमारे ॥ टेक ॥ नारायण ०
मात तात सुत दार सहोदर ।
कोई न आवत काज हमारे ॥ १ ॥ नारायण ०
भवसागर जल दुस्तर भारी ।
तुमरे चरण जहाज हमारे ॥ २ ॥ नारायण ०
पाप अनेक किये जग माही ।
तुमको है अब लाज हमारे ॥ ३ ॥ नारायण ०
ब्रह्मानन्द दया तुमरी से ।
सब दुख जावत भाज हमारे ॥ ४ ॥ नारायण ०

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Shri Brahmanand Devotional Song-1

Posted by cls On November - 27 - 2009


ॐ श्री परमात्मने नमः
श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला
भजन संख्या १
(राग- जंगला अथवा पीलू ताल ३)

जय गणेश गणनाथ दयानिधि ।
सकल विघन कर दूर हमारे ॥ टेक ॥ जय०
प्रथम धरे जो ध्यान तुमारो ।
तिसके पूरण कारज सारे ॥ १ ॥ जय ०
लंबोदर गज वदन मनोहर ।
कर त्रिशूल परशू वर धारे ॥ २ ॥ जय ०
ऋद्धि सिद्धि दोऊ चमर डुलावे ।
मूषकवाहन परम सुखारे ॥ ३ ॥ जय ०
ब्रह्मादिक सुर ध्यावत मन में ।
ऋषि मुनि गण सब दास तुम्हारे ॥ ४ ॥ जय ०

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Devotional Video – Visit www.hindudevotionalblog.com for Lyrics of Lord Ramraksha Stotra. Rama Raksha Stotram is the Sanskrit Hindu devotional song dedicated to Lord Sri Ram (Ramachandar), composed by Saint Budha Koushika. This devotional bhajan song posted by Msabhi Hindu Devotional Blog.

Devotional – Video
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श्री मद्गोस्वामी तुलसीदासजी रचित

श्री रामचरितमानस


सुंदरकाण्ड

श्री राम गुणगान की महिमा

निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ।
यह चरित कलि मल हर जथामति दास तुलसी गायऊ॥
सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना।
तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना॥

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥६०॥

मासपारायण, चौबीसवाँ विश्राम
इति श्रीमद्रामचरितमानसे सकलकलिकलुषविध्वंसने
पंचमः सोपानः समाप्तः।
कलियुग के समस्त पापों का नाश करने वाले श्री रामचरितमानस
का यह पाँचवाँ सोपान समाप्त हुआ।
(सुंदरकाण्ड समाप्त)

—-पीछे आगे—-


सुन्दर काण्ड
  1. मंगलाचरण
  2. श्री हनुमान्‌जी का लंका को प्रस्थान
  3. लंका वर्णन
  4. हनुमान्‌-विभीषण संवाद
  5. श्री हनुमान्‌जी अशोक वाटिका में
  6. श्री सीता-त्रिजटा संवाद
  7. श्री सीता-हनुमान्‌ संवाद
  8. श्री हनुमान्‌जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस
  9. श्री हनुमान्‌-रावण संवाद
  10. लंकादहन
  11. श्री हनुमान्‌जी का सीताजी से विदा माँगना
  12. श्री राम-हनुमान्‌ संवाद
  13. श्री रामजी का समुद्र तट पर पहुँचना
  14. मंदोदरी-रावण संवाद
  15. रावण को विभीषण का समझाना
  16. विभीषण का श्री रामजी की शरण के जाना
  17. समुद्र पार करने के लिए विचार
  18. दूत का रावण को समझाना
  19. समुद्र पर श्री रामजी का क्रोध
  20. श्री राम गुणगान की महिमा

श्री रामचरितमानस

  1. बालकाण्ड
  2. अयोध्याकाण्ड
  3. अरण्यकाण्ड
  4. किष्किन्धाकाण्ड
  5. सुंदरकाण्ड
  6. उत्तरकाण्ड
  7. लंकाकाण्ड

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